अमरुद में बहार नियन्त्रण

अमरुद के फलों में ज्यादा उत्पादन एवं अच्छी गुणवत्ता के फलों के उत्पादन के लिए बहार का नियंत्रण किया जाता है.

अमरूद में तीन बार फूल आते है जिनको बहार कहते है.

अमरूद में उत्तरी व पूर्वी भारत में वर्ष में दो बार फलन एवं पश्चिमी व दक्षिणी भारत में वर्ष में तीन बार फलन आता है जिसे मृग बहार, अम्बे बहार एवं हस्त बहार कहते है.

अम्बे बहार – इसमें फरवरी-मार्च माह में फूल आते है इसे अम्बे बहार कहते है इसमें बारिश के मौसम में फल आते है. इस मौसम की फसल के फल कम मीठे होते है एवं इनकी गुणवत्ता भी अच्छी नहीं होती है.

हस्त बहार – इस बहार में अक्टूबर – नवम्बर माह में में फूल आते है एवं फरवरी-अप्रैल में फल आते है, इस मौसम के फलो की गुणवत्ता अच्छी होती है लेकिन उपज कम आती है.  

मृग बहार – इस बहार में जून – जुलाई माह में फूल आते है एवं नवम्बर-जनवरी  में फल आते है. मृग बहार के फलो की गुणवत्ता, स्वाद एवं उपज अच्छी होती है. इसलिए भारत में मृग बहार की उपज ली जाती है. मृग बहार में फूल अधिक लगते है, बड़े आकर के फलों का उत्पादन होता है, फल स्वाद में अधिक मीठे होते है, एवं फलों का उत्पादन ज्यादा आता है. मृग बहार के फलों का उत्पादन लेने के लिए, वर्षा ऋतु वाली फसल यानि अम्बे बहार के फूलों को लगने से रोका जाता है जिसे बहार नियंत्रण कहते है.

बहार नियंत्रण – 1. जड़ो के पास की मृदा को निकालकर – इस विधि में सिंचाई बंद कर दी जाती है तथा जड़ो की आसपास की उपरी मृदा को अप्रेल-मई में खोदकर बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे जड़ो को प्रकाश/धूप लगती है, परिणामस्वरुप मृदा में नमी की कमी हो जाती है एवं पत्तिया गिरने लगती है और पेड़ सुसुप्तावस्था में चले जाते है. फिर 20-25 दिन के बाद जड़ो को मिटटी से दुबारा ढक दिया जाता है एवं खाद-उर्वरक डालकर, सिंचाई की जाती है.

2. उर्वरकों का प्रयोग – जून माह में पेड़ो की जड़ो में खाद डालकर भी मृग बहार में फूलों की संख्या बढ़ाते है.

3. सिंचाई रोककर – मृग बहार के फल लेने के लिए फरवरी से 15 मई तक पानी देना बंद कर देना चाहिए, जिससे पत्तिया गिर जाती है एवं पेड़ सुसुप्तावस्था में चले जाते है. इसके बाद मध्य मई में पेड़ो की गुडाई करके उर्वरक डाले व सिंचाई करे जिससे मृग बहार में फूल ज्यादा आते है व फल भी ज्यादा लगते है.

4. वृद्धि नियंत्रकों का प्रयोग (ग्रोथ रेगुलेटर )- इसमें वृद्धि नियंत्रकों का प्रयोग किया जाता है, जैसे एन.ए.ए. -1000 पी.पी.एम, नेप्थिलिन एसिटामाईड – 50 पी.पी.एम., 2-4 डी – 10 – 30 पी.पी.एम. एवं यूरिया -10% आदि का छिडकाव किया जाता है. जिस बहार के फल नहीं चाहिए उस बहार के फूलों के खिलने पर उसे झड़ाने के लिए वृद्धि नियंत्रकों का प्रयोग किया जाता है.

5. फूलों को झड़ाकर – इसमें फूलो को हाथ से झड़ाया जाता है.

सामान्यतया अप्रैल के अंत व मई माह के शुरूआत में आने वाले सभी फूलों एवं छोटे फलो को तोड़ दिया जाता है, इससे मृग बहार में अच्छा फलन आता है.

6. जिस पेड़ की शाखायें सीधी रहती है उन शाखाओ में फलों का उत्पादन कम होता है अत पेड़ की ऐसी सीधी शाखाओ को अप्रैल-जून माह में झुकाकर जमीन में खूंटा आदि गाड़कर रस्सी से बांध दिया जाता है. एवं शाखाओ की शीर्ष की उपरी 10-12 जोड़ी पत्तियो को छोड़कर अन्य छोटी छोटी शाखाओं, पत्तियो, फूलो व फलो को तोड़कर हटा दिया जाता है. इससे इन शाखाओ में फल ज्यादा लगेंगे.

इस तरह बहार नियन्त्रण करने से अमरूद में फल ज्यादा लगते है. खेती के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए विजिट करे हमारा यूट्यूब चैनल – डिजिटल खेती – DIGITAL KHETI—Courtesy- मध्य भारत कृषक भारती

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