कम्पोस्ट खाद, आर्गेनिक खाद, कम्पोस्ट उर्वरक, Compost Khad, Organic Manure, Compost Manure,

कम्पोस्टिंग, Composting , फसल अवशेष से कम्पोस्ट खाद बनाना, Composting with Crop/Plant Residue, फसल के कचरे/बायोमास से कम्पोस्ट  खाद बनाना, Composting with Plant/Crop Debris or Biomass, कम्पोस्ट खाद, आर्गेनिक खाद, कम्पोस्ट उर्वरक, Compost Khad, Organic Manure, Compost Manure

इसको तैयार करने के लिए आपको निम्नलिखित सामग्री की जरूरत पड़ेंगी. It needs following items to prepare. फसल के अवशेष – 1400 – 1500 किलोग्राम. Crop Residue – 1400 – 1500 Kilogram. पशु का गोबर – 100 – 150 किलोग्राम. Animal Dung – 100 – 150 Kilogram. मिट्टी – 1500 – 1600  किलोग्राम. Soil – 1500 – 1600 kilogram पानी – 1500 – 2000 लीटर ( आठ से दस ड्रम ), Water – 1500 – 2000 Litres (or 8-10 Drums)

अब इसके लिय जमीन के ऊपर एक टांका बनाने की जरूरत रहती है जिसे पिट, या नाडेप टांका भी कहते है. A Tanka or pit is made on the ground. This is called pit or Nadep Tanka. जिसका साइज़/आकार 12 * 5 * 3 घन फीट रहता है.यानि जिसकी लम्बाई 12 फीट,  चौड़ाई 5 फीट, व ऊंचाई 3 फीट रहती है. इसकी दीवारों में 6-7 इंच के छेद रहते है. छेद एक के ऊपर एक नहीं होने चाहिए. The size of this pit is 12 * 5 * 3 cubic feet. In this the length   the width and the height of the pit are 12, 5 and 3 feet respectively. The holes are kept in the walls of pit. The holes are made in such a manner that these must not be in one line from above to down 

पिट को भरने के लिय सबसे पहले फसल के अवशेषों के छोटे- छोटे लगभग 3-4 इंच के टुकड़े कर लिए जाते है.इसके बाद गोबर व पानी घोल बनाकर उस घोल से पिट के फर्श व दीवारों को अच्छी तरह भिगाकर तर कर देते है. Now the mixture of water and dung is sprayed over the walls of the pit thoroughly with the bucket and mug.

अब पिट के फर्श के ऊपर बायोमास या फसल के अवशेषों को बिछाकर 6 इंच मोटी एक समान परत बनाते है.अब इसके बाद 10-15 किलों गोबर को 100-150 लीटर पानी में घोलकर, अवशेष की परत के ऊपर प्लास्टिक के मग्गे आदि से छिड़कते है एवं पूरी परत को गीला करते है.अब इस अवशेषों की परत के ऊपर पानी व गोबर का घोल डालने के बाद, 100-150 किलोग्राम मिटटी लेकर इसके ऊपर  एक सामान रूप से फैलाते है. व थोड़ा गोबर पानी का घोल डाले. Now uniform layer of 6 inch of the chaffed residues of crop is made in the pit. After this the mixture of 10-15 Kg. dung and 100-150 litres of water is made and poured over the layer of residues. After this well sieved field soil up to 100-150 kilogram is taken and spread uniformly upon the wet layer of residues. Pour some mixture of dung and water again.

इस तरह से फसल अवशेष, गोबर व पानी का घोल व मिट्टी के परत से तीन परत बन जाती है.अब इसी क्रम में तीनो की परत बनाते जाते है.और इस पिट को परत के ऊपर परत बनाकर पिट की दीवार के किनारों से 2-2.5 फीट ऊपर तक  भरते है. So, three layers of crop residue, mixture of dung and water and soil are made. Now these layers are repeated as above and the pit is filled up to 2 – 2.5 feet above the edge of the pit. अब मिट्टी, गोबर व पानी का गाड़ा घोल बनाया जाता है व इस पिट को ऊपर से मिट्टी व गोबर के गाड़े घोल से अच्छी तरह से लेप दिया जाता है.After this paste is made of soil and dung with the water. And now this heap is covered with this paste completely.

15-20 दिन के बाद यह ढेर थोड़ा 1-2 फीट तक नीचे दब जाता है. अब दुबारा इसके ऊपर परत बनाई जाती है व दुबारा पिट को मिटटी व गोबर से लेप दिया जाता है. इस तरह से पूरी तरह से पिट को भरने के लिए 8-10 परत बिछाई जाती है. After 15-20 days the heap gets down so again the layers are made of residue, mixture of dung and water and soil. And the heap is pasted again.8-10 layers are made for to fill the pit completely.

इस तरह 3.5 से 4 महीने में खाद पूरी तरीके से बनकर तैयार हो जाता है व किसान इसकों खेत में इस्तेमाल कर सकते है. इस बिधि से एक साल में तीन बार खाद बना सकते है. और लगभग 80 क्विंटल खाद बनाकर तैयार हो जाता है. So, the compost is ready within 3.5 to 4 months. Now it can be used in crops. In this composting method the compost can be made 3 times within a year. 80 quintal compost is produced in one year.

कम्पोस्टिंग की इस विधि एक साल में लगभग 80 किलोग्राम जैविक नाइट्रोजन,  80 किलोग्राम जैविक फास्फोरस व 80 किलोग्राम जैविक पोटाश पैदा की जाती है. जिसकी कीमत लगभग 7200 रुपये रहती हो जो डी.ए.पी. की चार बोरी , यूरिया की दो बोरी व पोटाश की 3 बोरी के बराबर है. So approx.  80-kilogram organic nitrogen, 80-kilogram organic phosphorus and 80-kilogram organic potash are produced within a year in this method of composting.If we convert this into DAP, Urea and murate of Potash then total cost of the compost will be 7200 Rs. Or 4 bags of DAP, 2 Bags of Urea and 3 bags of Potash.

चने की फसल की उर्वरक अनुशंषा है , नाइट्रोजन – 20 कि.ग्रा. फास्फोरस – 40 कि.ग्रा. व पोटाश 20 कि.ग्रा. रहती है, तो कम्पोस्टिंग की इस विधि से तैयार यह मात्रा चने के दो हेक्टर में इस्तेमाल की जा सकती है. The recommended dose for Chickpea (gram) is 20 Kg. nitrogen, 40 Kg. phosphorus and 20 Kg. Potash, so quantity produce by this composting method can be use in 2 hectares of gram Crop.

सावधानिया – पुरे पिट को एक ही दिन में भरे. ताजा गोबर का इस्तेमाल करे. ढेर में 40-50% तक नमी बनाये रखे.हो सके तो पिट पर छाव रखे. Precautions-Fill the pit same day only. Use fresh dung. And if possible, make shed upon the pit.

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