कृषि कार्यमाला-जैविक खेती,

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी का हार्दिक स्वागत है हमारी इस वेबसाईट www.kisanhomecart.com में.

दोस्तों आज बात करेंगे कृषि की एक और नई तकनीकि के बारे में. या यह तकनीकि आज के समय की जरूरत है. दोस्तों आज हम बात करेंगे जीरो बजट प्राकृतिक खेती के बारे में. घन जीवामृत, जीवामृत, वेस्ट दी कम्पोजर, गो मूत्र, दशपर्णी कीटनाशी, गोबर की धूपवत्ती, जैविक अंतरवर्ती फसल और विभिन्न जैविक फसले इन सभी के वारे में आज बात करेंगे. मुझे आशा है आप की हमारी इस वेबसाइट को सब्सक्राइब करके और इस पोस्ट को शेयर करके अपना सहयोग व स्नेह बनाये रखेंगे.  

जीवामृत – इसको फसलों पर स्प्रे किया जाता है. या सिंचाई की नाली के साथ पानी में डालकर पूरे खेत में डाला जाता है. इसका उपयोग फसल में 2-10 बार या इससे भी अधिक बार किया जाता है. फसल की अवधि के अनुसार इसका उपयोग किया जाता है. एक बार में 200 लीटर जीवामृत एक एकड़ में उपयोग किया जाता है. यह फसल में खाद का काम करता है व भूमि में उपस्थित जैविक पदार्थों को सडाता है. और उसमे उपस्थित पोषक तत्वों को पौधों को उपलब्ध कराता है. यह तरल रूप में रहता है.

घन जीवामृत- यह भी फसल में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. यह ठोस रूप में रहता है. इसका उपयोग फसल में दो बार किया जाता है. एक बार फसल बोने से 7 दिन पहले व दूसरी बार फसल बोने के 20 दिन बाद. एक बार में इसकी 100 किलोग्राम मात्रा एक एकड़ में प्रयोग की जाती है.

वेस्ट डी कम्पोजर – इस घोल का उपयोग स्प्रे करने या सिंचाई के पानी के साथ किया जाता है. इसकों फसल में 2-10 बार या इससे अधिक बार प्रयोग किया जाता है . फसल की अवधि के अनुसार इसका उपयोग किया जाता है.

इसको अकेले या जीवामृत के साथ अल्टरनेट भी उपयोग कर सकते है. जैसे एक बार वेस्ट डी कम्पोजर का व एक बार जीवामृत का उपयोग. इसका उपयोग गोबर व कूड़े करकट आदि को सड़ाने में भी किया जाता है. इसका 200 लीटर का घोल एक एकड़ में एक बार में इस्तेमाल किया जाता है. कभी कभी एक पम्प में आधा पानी व आधा वेस्ट डी कम्पोजर मिलाकर भी उपयोग किया जाता है. जीवामृत व वेस्ट डी कम्पोजर का उपयोग हर 15-20 दिन के बाद किया जाता है.

दशपर्णी जैविक कीटनाशी – इसको  10 तरह की पत्तियों का उपयोग करके बनाया जाता है. इसके द्वारा फसल में सभी प्रकार के कीड़ो का नियंत्रण किया जाता है. इसके उपयोग करने की दर 200-750 मिली. प्रति पम्प के हिसाब से रहती है. प्रयोग करने की मात्रा फसल की अवधि व फैलाव के अनुसार रहती है

गोमूत्र – इसका उपयोग घन जीवामृत व जीवामृत बनाने में किया जाता है. व केवल गोमूत्र का उपयोग भी कर सकते है. यह कीटनाशी व खाद दोनों के रूप में फसल में काम करता है.

गोबर की धूपवत्ती- गोबर व गोमूत्र का उपयोग करके गाय के गोबर से पूजा के लिए धूपवत्ती भी बनाई जाती है.

इंटरक्रोपिंग – यह गेंहू व मटर की इंटरक्रोपिंग की है. इसमें जैविक तरीके से इंटर क्रोपिंग की गई है. इसमें मेड बनाकर गेहू की बुवाई की गई है व बीच में मटर लगाई गई थी जिसकों तोड़कर बेच दिया है. इस तरह से इन्टर क्रोपिंग से कम समय में किसान अच्छा लाभ कमा सकते  है.  

जैविक फसल – यह जैविक तरीके से उगाया गया गेंहू, चना व आलू है . जिसमे सभी की गुणवत्ता बहुत ही अच्छी है. और खाने में स्वाद भी बहुत बढ़िया है. सुजाता गेंहू – इसकी उपज कम रहती है. क्योकि यह कम पानी में उगने वाली किस्म है. लेकिन यह गेंहू बाजार में 3500 से 5000 रुपये पर क्विंटल के हिसाब से बिकता है.


लहसुन की खेती – इसको भी जैविक तरीके से उगाया गया है. इस खेत में पहले लगभग 50 % फसल सूख जाती थी लेकिन अभी जीवामृत के उपयोग से फसल बहुत ही अच्छी है. व उत्पादन भी अच्छा होगा. इसमें सिंचाई के पानी के साथ जीवामृत का उपयोग किया गया है.

दोस्तों इन सभी – घनजीवामृत, जीवामृत, वेस्ट डी कम्पोजर, व दशपर्णी कीटनाशी को बनाने की जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे.

  1. https://youtu.be/RRi-fo27nwo. ( घनजीवामृत व अन्य)
  2. https://youtu.be/vNhKjD6PPME. (जीवामृत )
  3. https://youtu.be/KSK_d7dJ020. ( वेस्ट डी कम्पोजर )
  4. https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA……(यूट्यूब चैनल लिंक )

आशा है की किसान भाई इन सभी को बनाकर अपनी खेती में जरूर इस्तेमाल करेंगे. अगर आप कुछ पूछना चाहते है या आपका इससे सम्बंधित या या अन्य किसी भी तरह का खेती से सम्बंधित प्रश्न है तो इस पोस्ट के नीचे कंमेंट बॉक्स है उसमे लिखाकर आप अपना सवाल पूछ सकते है.

आशा है दोस्तों आप सभी ने हमारी इस वेबसाईट को सब्सक्राइब कर दिया होगा, पोस्ट को शेयर करने के लिए धन्यवाद. प्यार और स्नेह बनाये रखे -धन्यवाद.

2 thoughts on “कृषि कार्यमाला-जैविक खेती,”

  1. सरजी नमस्कार
    प्रश्न – जैविक विधि का उपयोग कर खरपतवार नियत्रण कर सकते है विधि बताये

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