दुधारू पशुओ का चारा

बरसीम – पशुओ  के लिए चारा
दुधारू पशुओ का चारा

बरसीम – हरा चारा

  • वानस्पतिक नाम – ट्राइफोलियम अलेक्जेन्डरियम (Trifolium alexandrium)
  • इजिप्टीयन क्लोवर
  • यह पशुओ के लिए बहुत ही अच्छा हरा चारा है. यह सर्दी में अक्टूबर से नवम्बर महीने में बोई जाती है.
  • इसकी बुबाई के लिए पहले खेत को अच्छी तरह तैयार कर लिया जाता है. इसके बाद पूरे खेत में मनचाहे साइज़ की क्यारी बना ली जाती है. इस क्यारी में पानी भरते है इसके बाद छिटकवा विधि ( इसमें पानी से भरी हुई क्यारी में बरसीम के बीज को छिटक कर पूरी क्यारी में फेकते है) से बरसीम की बुवाई करते है. पानी देते जाते है और पानी भरी हुई क्यारी में बीज छिटक कर डालते जाते है.
  • पहली कटाई में चारे की मात्रा कम निकलती है इसलिए सरसों का बीज 2-3 किलोग्राम प्रति हेक्टर, बरसीम के बीज के साथ मिलाकर बोना चाहिए. यह एक दलहनी फसल है, इसलिए इसमें खाद की मात्रा की बहुत कम जरूरत होती है. पहली कटाई एवं दूसरी कटाई के बाद यूरिया 25 किलोग्राम/हेक्टर की दर से डाल सकते है. इसमें खरपतवार के रूप में कासनी उगती है, इसलिए इसका अच्छा बीज उपयोग करना चाहिए.
  • इसकी बीजदर 20-25 किलोग्राम प्रति हेक्टर रहती है.
  • बुवाई के दो महीने बाद चारे के लिए कटाई शुरू हो जाती है. इसके बाद हर 18-20 दिन के बाद कटाई होती है. 8-10 कटाई तक कर सकते है. प्रत्येक 20-22 दिन के बाद सिंचाई करते रहे.
  • बीज उत्पादन – मार्च तक कटाई करके फसल को छोड़ दिया जाता है, इसके बाद फसल में फूल व बीज लगते है व मई या जून तक फसल बीज की कटाई के लिय तैयार हो जाती है.
  • एक हेक्टर में 4-5 क्विंटल तक बीज उत्पादन कर सकते है. इसके बीज का भाव बाजार में 100-175 रुपये प्रति किलोग्राम तक रहता है.
  • 2-3 पशुओ के लिए 1/10 हेक्टर भाग का चारा पर्याप्त है.
  • इसका बीज आपके जिले में कृषि की खाद, बीज दवाई बेचने वालों की दुकान पर मिल जायेगा.
  • आप चाहे तो ऑनलाइन भी सर्च/खोज/तलाश सकते है.

 

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