नेसनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर

National Mission for Sustainable Agriculture (NMSA)

  • यह योजना वर्षा आधारित क्षेत्र में कृषि की उत्पादकता को बढाने के लिए बनाई गई है. यह योजना मुख्यतः समग्र खेती, जल प्रयोग क्षमता, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एव साधन (जल व मृदा) सरंक्षण पर केन्द्रित रहेगी.
  • नमसा योजना के मुख्य बिंदु जल उपयोग क्षमता, पोषण प्रबंधन व जीविका उपार्जन विविधता है.

मिशन में उद्येश्य –

  • कृषि को अधिक उत्पादन व टिकाऊ खेती पर जोर देना है.
  • प्राकृतिक स्रोत जल व मृदा का सरक्षण करना.
  • मृदा उवर्कता मैप (नक्शा) के आधार पर मृदा के स्वास्थ्य का प्रबंधन और मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्वों के प्रयोग को बढावा देना है .
  • जल स्रोतों का विवेकपूर्ण उपयोग करना.
  • कृषक की क्षमता को बढाना.
  • यह पायलट आधार पर बने गयी योजना जो वर्षा आधारित (सूखा) क्षेत्रो में कम करेगी.

इस योजना के अंतर्गत के मुख्य चार घटक है

  •  रेनफेड वर्षा आधारित क्षेत्रो का विकास
  • खेत पर जल प्रबंधन
  •  मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन
  •  जलवायवीय परिवर्तन एवं टिकाऊ खेती की मोनिटरिंग. मॉडलिंग एव नेटवर्क स्थापित करना.
  • इस योजना के अंतर्गत लागत निर्देश व सहायता/अनुदान प्रक्रिया
  •    घटक – समग्र खेती सिस्टम ( इंटीग्रीटेड फार्मिंग सिस्टम)
  • क्रोपिंग सिस्टम –
  • धान-1.गेहू आधारित – आदान लागत का  50 % अनुदान
  • मोटे खाधान्य आधारित- आदान लागत का  50 % अनुदान
  • तेलीय फसल आधारित- आदान लागत का  50 % अनुदान
  • रेशे फसल  आधरित-आदान लागत का  50 % अनुदान 
  • वानिकी व फसल आधारित- आदान लागत का 50 % अनुदानउधानिकी आधारित फार्मिंग सिस्टम-आदान लागत का 50 % अनुदान
  • पशुपालन आधारित- आदान लागत का 50 % अनुदान
  • मछली पालन आधारित फार्मिंग सिस्टम- आदान लागत का 50 % अनुदान
  • मधुमक्खी पालन- 50% लागत का  अनुदान   (सीमा   20000 रुपये प्रति हितग्राही)
  • साईलेज का निर्माण-( हरे चारे सरंक्षित करने के लिए )-  100 % अनुदान सीमा 1.25 लाख रुपये/हितग्राही
  • ग्रीन हाउस/पाली हाउस- लागत का 50% अनुदान ( सीमा 10 लाख/हितग्राही)
  • वाटर हार्वेस्टिंग /मैनेजमेंट- व्यक्तिगत- अनुदान 50 % लागत का ( सीमा 75-90 हजार)
  • वाटर हार्वेस्टिंग एवं प्रबंधन- समुदाय/पुरे गाँव के लिए- 100 %  अनुदान( सीमा 20-25 लाख )
  • ट्यूब वेल व बोर वेल का निर्माण- लागत का 50 % अनुदान (सीमा 25 हजार/हितग्राही)
  • वर्मी कम्पोस्ट यूनिट का निर्माण- लागत का 50 % अनुदान( सीमा 50 हजार/ हितग्राही )

मूल्य संवर्धित एवं प्रक्षेत्र विकास क्रियाये-

  • पोस्ट हार्वेस्ट/ भण्डारण- गाँव स्तर पर भण्डारण /पैकिंग/प्रोसेसिंग यूनिट- लागत का 50 % अनुदान ( सीमा 2 लाख/हितग्राही.
  • किसान उत्पादक कंपनी का निर्माण- प्रोजेक्ट लागत का 2 % अनुदान.
  • माइक्रो इरीगेशन-  ड्रिप/स्प्रिंकलर- लागत  का 25-35%. अनुदान
  • यांत्रिक फल/सब्जी के व्यर्थ बचे भाग से कम्पोस्ट उत्पादन यूनिट-  100% का अनुदान सरकारी एजेंसी/संस्थानो के लिए (सीमा 190 लाख) . प्राइवेट संस्थानो के लिए लागत का 33% अनुदान ( सीमा 63 लाख/यूनिट).
  • तरल/वाहक आधारित बायो फर्टिलाइजर/बायो पेस्टिसाइड के उत्पादन की यूनिट-  100% का अनुदान सरकारी एजेंसी/संस्थानो के लिए (सीमा 160 लाख). व्यक्तिगत/प्राइवेट संस्थानो के लिए लागत का 25% अनुदान ( सीमा 40 लाख/यूनिट)
  • मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन
  • मृदा परीक्षण को मजबूत करना.
  • इसमें सरकारी संस्थानो के लिए.नई/वर्तमान प्रयोगशाला/चालित प्रयोगशाला स्थापित करने  के लिए लागत का 75% का अनुदान रहता है एवं इसकी लिमिट 56 लाख रहती यदि कोई प्राइवेट संस्थान मृदा परिक्षण प्रयोगशाला बनाना चाहता है तो प्रदेश सरकार को प्रोजेक्ट बनाकर भेज सकते है.
  • ज्यादा जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि विभाग में संपर्क करे.
  • कृषि की योजनओं आदि के लिए गूगल या यूट्यूब पर हमारे चैनल –Digital Kheti —को खोजे सर्च करे

Thanks.

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