पैसा सीधा किसान के बैंक खाते में DBT

  • पैसा सीधा किसान के बैंक खाते में ?

  • डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT ?

  • किसानों को किसी कृषि व कृषि से सम्बंधित विभागों भी आदान (खाद, बीज दवाई व कृषि यंत्रो) पर अनुदान /छूट दी जाती है.
  • ताकि उनकी खेती की लागत को कम किया जा सके.
  • व वे लोग कृषि की सभी अनुशंषित मात्राओ का खेती में उपयोग कर सकते है, व मशीनरी जो किसानों के लिए महंगी रहती है अगर उन पर अनुदान दिया जाता है तो खेती में मशीनरी का उपयोग करके अपनी उपज में वृद्धि कर सकते है व किसान भाई ज्यादा लाभ कमा सकते है. इससे उनके जीवन स्तर आर्थिक व सामाजिक सुधार होगा.
  • डी.बी.टी से पहले 

  • जब आदान विभाग में आता था तो कभी कभी किसानों को समय पर जानकारी नहीं मिल पाती तथा आदान का पूरी तरीके से वितरण नहीं हो पाता है, क्योकि बजट अनुसार कभी आदान कम व कभी ज्यादा होते रहते है.
  • पहले आदान विभाग में आते थे जिसके कारण उसका किराया भाडा लगता था,जो सरकार को  देना पड़ता था .
  • कभी कभी आदान समय निकल जाने के बाद आता था. जिसके कारण गोडाउन में ही पड़ा रह जाता था. कभी कभी आदान विभाग में रखा-रखा एक्सपाइर हो जाता था, तथा किसी काम का नहीं रहता था.
  • गुड़वत्ता पर किसान को शंका  रहती थी.
  • किसान को विभाग में आये आदान पर ही निर्भर रहना पड़ता था. किसान अपनी मर्जी का आदान नहीं खरीद नहीं पाता था.
  • डी.बी.टी.

  • इसमें किसानों को विभाग से मिलने वाले आदान पर छूट/अनुदान सीधे किसानों के खाते में आयेगी.
  • इसके लिए किसानों को पहले विभाग की वेवसाइट पर ऑनलाइन या बिभाग में पंजीयन करना पड़ेगा.
  • इसमें किसानों को बताना पड़ेगा की वो विभाग से क्या लेना चाहते है.
  • इसमें पहले से ही निश्चित रहेगा की किस किस आदान पर व कितना अनुदान किसानो को मिलेगा.
  • इसमें पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर किसानों को अनुदान दिया जायेगा. 
  • डी.बी.टी. की प्रक्रिया

  • पंजीयन करने के बाद स्वीकृति आने के बाद किसानो को चाहा गया आदान बाजार से ख़रीदना  है.
  • तथा उसका बिल लाके, सम्बंधित विभाग में जमा करना पड़ेगा.
  • यह आदान किसानों को पुरे पैसे देकर खरीदना है.
  • बिल टिन व पंजीकृत संस्था/दुकान का हो.
  • इसके बाद ख़रीदे गए आदान का भोतिक सत्यापन किया जायेगा जिसमे किसान के घर आकर देखा जायेगा की उसने आदान ख़रीदा है की नहीं. सत्य पाए जाने पर अनुदान मिलेगा.
  • बिल व भोतिक सत्यापन रिपोर्ट जमा हो जाने के बाद आदान पर मिलने वाली छूट/अनुदान एक निश्चित समय के बाद उनके बैंक खाते में आयेगी.
  • उदाहरण के लिए जैसे किसान ने ड्रिप पाईप का पंजीयन करवाया है. तो किसान को पूरा पैसा लगभग 53000 रूपये देकर एक एकड़ के लिए ड्रिप सिस्टम सिंचाई के लिए खरीदता है. अब इस पर जो भी छूट/अनुदान है वह उनके खाते में आयेगा.
  • इसी तरह जैसे उधानिकी विभाग में फलो के पेड़ लगने, पाली हाउस, नेट हाउस, प्याज का गोडाउन आदि बनाने के लिए अनुदान दिया जाता है तो किसान पहले उसकी मर्जी से फलो के पेड़ लगाना है या पाली हाउस वगेरह बनबाता है उसके पहले पेड़ लगवाने पड़ेंगे व पाली हाउस आदि का खर्चा पहले करना है बाद में अनुदान बाद में उसके खाते में आयेंगा. यह सब उसको आवेदन करने के बाद व स्वीकृति आने के बाद शुरू करना है
  • पंजीयन प्रक्रिया 

  • इसमें किसानो को पहचान पत्र (आधार कार्ड), बैंक पासबुक, जमीन का खाता खसरा, जाति प्रमाण पत्र, किसान का फोटो आदि कागज की जरूरत पड़ती है,
  • किसान को विभाग में या विभाग की वेवसाइट पर पंजीयन करना है.
  • किसान का फायदा

  • इसमें किसानों को खाद बीज दवाई व कृषि यंत्रो सभी पर अनुदान मिलेगा.
  • डी.वी.टी होने के बाद किसान को ज्यादा फायदा होगा.
  • उसे समय पर आदान मिलेगा व उसकी गुडवत्ता भी किसान की मर्जी की होगी.
  • छूट/अनुदान पर किसान को कोई शक की गुंजायश नहीं रहेगी.
  • यह प्रिक्रिया सभी राज्यों में लागु है.
  • किसान एक से अधिक योजनाओ में भी पंजीयन करा सकते है.
  • जिस किसान के नाम जमीन है सारे कागज उसी किसान के होने चाहिए.

अत योजनओं का लाभ व उनका अनुदान लेने के लिए कृषि, उधानिकी, पशुपालन, मछलीपालन आदि विभाग में जाकर संपर्क करे.

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