प्याज का बीज उत्पादन, प्याज उत्पादन

प्याज का बीज उत्पादन की विधि-

एक वर्षीय विधि

  • बीज की नर्सरी में बुवाई – मई – जून
  • जमीन में रोपाई – जुलाई – अगस्त
  • कन्द – कन्द नवम्बर में तैयार हो जाती है,
  • कन्दो को उखाड़कर कर छाटकर,10- 15 दिन बाद दुसरे खेत में लगा दिया जाता है. और मई के महीने तक बीज तैयार हो जाता है.
  • इस विधि से खरीफ प्याज की प्रजातियों का बीज उत्पादन किया जाता है
  • दो वर्षीय विधि
  • बीज की नर्सरी में बुवाई – अक्टूबर – नबंवर
  • खेत में रोपाई – दिसम्वर अंत या जनवरी के शुरू में.
  • कन्द मई में तैयार हो जाते है.
  • अच्छे कन्दो को छाटकर भण्डारण करते है. और नवम्वर में कन्दो को खेत में लगा देते है.
  • मई तक बीज तैयार हो जाता है. इस विधि से रवी प्याज की प्रजातियों का बीज तैयार किया जाता है.
  • प्याज कन्द उगाने की उन्नत तकनीकि
  • 3-4 जुताई करके खेत को अच्छी तरह तैयार करे.
  • बुवाई और रोपाई का  समय
  • फसल -खरीफ, बुवाई – जून -जुलाई , रोपाई – जुलाई – अगस्त.
  • फसल – रवी, बुवाई – अक्टूबर- नवम्बर, रोपाई – दिसंबर- जनवरी.
  • दूरी
  • रोपाई करते समय लाइन से लाइन – 15 सेमी.
  • पौधे से पौधे की दूरी – 10 सेमी.
  • रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करनी चाहिए.
  • बीज की मात्रा – 7-8 किग्रा. प्रति हेक्टर.
  • खाद एवं उर्वरक
  • गोबर की खाद – 500 क्विंटल
  • कैल्सियम अमोनियम नाइट्रेट – 100 किग्रा. या यूरिया 200 किग्रा.
  • सिंगल सुपर फोस्फेट – 300 किग्रा.
  • पोटाश – 100 किग्रा.
  • नाइट्रोजन की आधा मात्रा, पूरा सुपर व पूरी पोटाश की मात्रा रोपाई से पूर्व डाले व नाइट्रोजन की आधी मात्रा को दो भागो में, रोपाई के 30 दिन व 45 के बाद खेत में डालना चाहिए.
  • सिंचाई – 8-15 दिन के बाद आवश्यकतानुसार करे.
  • खरपतवार नियंत्रण – स्टॉम्प खरपतवारनाशी का उपयोग करे.
  • टरगा सुपर  सकरी पत्ती के खरपतवार के लिए 300 एम.एल. प्रति एकड़, या धानुटोप @ 1 लीटर/एकड़ रोपाई के 2-3 दिन के अन्दर,
  • उसके बाद हाथ से भी खरपतवार नियंत्रण कर सकते है.
  • कीट व रोग नियंत्रण – प्याज में थ्रिप्स के नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट, फिप्रोनिल-5%एस.सी. या थाओमिथोक्जाम या थाओमिथोक्जाम + लेम्डा सायहेलोथ्रिन का उपयोग करे.
  • पर्पल ब्लाच रोग के लिए डाईथेंन एम-45, 2.5 किग्रा.प्रति हेक्टर उपयोग करे.
  • कन्दो की खुदाई – 50% पत्तियाँ जमीन पर गिरने के एक सप्ताह बाद कन्द की खुदाई करे. पत्तो को गर्दन से 2.5 सेमी ऊपर से कन्द से अलग करे.
  • अच्छी, एक रंग की पतली गर्दन वाली दोफाड़े रहित प्याज का एक सप्ताह तक   भण्डारण करे. 4.5 सेमी. से 6.5 सेमी. व्यास के प्याज के कन्द बीज उत्पादन के लिए प्रयोग करते है.
  • बीज उत्पादन के लिए कंदों का लगाने का समय
  • नबंवर का प्रथम सप्ताह या दिसंबर के मध्य तक का समय अच्छा है.
  • रवी मौसम की प्रजातियो के लिए नबंवर के मध्य तक तथा खरीफ मौसम की प्रजातियो को दिसंबर मध्य तक लगाना चाहिए.
  • चुने हुए कन्दो का एक तिहाई काटकर गांठो को 0.1% कार्बेन्डाजिम के घोल में डुबाकर लगाया जाता है.
  • कन्दो को अच्छी तरह तैयार क्यारियों में 45*30 सेमी. की दूरी पर 1.5 सेमी. गहरा लगाते है.
  • बुवाई के लिय 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टर कन्द पर्याप्त है.
  • खाद एवं उर्वरक, – 50 टन गोबर की खाद – बुवाई से 20-25 दिन पहले खेत में डालते है,
  • यूरिया – 100 किग्रा., एस.एस.पी.- 300 किग्रा., पोटाश – 100 किग्रा.
  • 100 किग्रा यूरिया कंद लगाने के 30 दिन बाद डालना चाहिए.
  • खाद को खेत में कन्दो के लगाने के स्थान पर खुरपी से बनाये गए गड्डो में अच्छी तरह मिलाये इसके बाद कन्द को लगाये. खाद, कन्दो के संपर्क में नहीं आना चाहिए.
  • सिंचाई – 8-15 दिन के बाद आवश्यकतानुसार करे.
  • खरपतवार नियंत्रण – स्टॉम्प खरपतवारनाशी का उपयोग करे.
  • टरगा सुपर  सकरी पत्ती के खरपतवार के लिए 300 एम.एल. प्रति एकड़, या धानुटोप @ 1 लीटर/एकड़ रोपाई के 2-3 दिन के अन्दर,
  • उसके बाद हाथ से भी खरपतवार नियंत्रण कर सकते है.
  • कीट व रोग नियंत्रण – प्याज में थ्रिप्स के नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट, फिप्रोनिल-5%एस.सी. या थाओमिथोक्जाम या थाओमिथोक्जाम + लेम्डा सायहेलोथ्रिन का उपयोग करे.
  • पर्पल ब्लाच रोग के लिए डाईथेंन एम-45, 2.5 किग्रा.प्रति हेक्टर उपयोग करे.
  • बुवाई के दो महीने बाद पौधों की जड़ो के पास मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए.
  • अलगाव दूरी – प्याज में पर परागण होता है, तो दो जातियों का बीज उत्पादन करने के लिए उनके मध्य 500 मीटर की दूरी होनी चाहिए.
  • खराव पौधों की छटाई – रोगी एव भिन्न जाति का दिखने वाले पौधों को फूल आने से पहले ही निकाल देना चाहिए.
  • कटाई, मड़ाई, बीज की सफाई, सुखाई, भण्डारण तथा पैकिंग-
  • बुवाई के एक सप्ताह बाद अंकुरण प्रारम्भ हो जाता है, तथा लगभग ढाई माह बाद फूलवाले डंठल बनना शुरू हो जाते है, पुष्प गुच्छ बनने के 6 सप्ताह के अन्दर ही बीज पक जाता है. गुच्छों का रंग जब मटमैला एवं 20 केप्स्यूल में काले बीज दिखाई देने लगे तो गुच्छो की  कटाई करे.
  • सभी गुच्छे एक साथ नहीं पकते है अत उन्ही गुच्छो को काटना चाहिए जिनके बीज छितरने वाले हो. कटे हुए गुच्छों को छायादार पक्के फर्श या या मोटे कपडे के फैलाकर सुखाते है. सूखे हुए गुच्छो को हाथ से कूटकर तिनके आदि को अलग कर बीज को साफ़ करे. बीज को थाइरम से उपचार करके अच्छी तरह साफ़ बीज को डिब्बो या लिफाफों में पैक करे व भण्डारण करे.
  • उपज – औसत उपज 8-10 क्विंटल प्रति हेक्टर होती है.
  • यदि 300 रुपये किलों या 30000 रुपये प्रति क्विंटल से बीज बिकता है तो कम से कम लगभग 3 लाख तक की कमाई होती है.

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