लहसुन की वैज्ञानिक खेती, Garlic Production

लहसुन की खेती

  • लहसुन की खेती के लिए दोमट, बलुई दोमट तथा काली दोमट मिटटी उपयुक्त है, जिसमे कार्बनिक पदार्थ ज्यादा हो व उचित जल निकास हो.
  • लहसुन की किस्म- जी.-1, जी.-41, जी.-50, जी.- 282, जी.- 313, ऊटी-1 आदि.
  • किस्मों की जानकारी के लिए ,अपने नजदीकि की बड़े जिले में या अपने जिले में कृषि विज्ञान केंद्र या अपने जिले में उधानिकी या कृषि विभाग में भी संपर्क कर सकते है.

  • खेत की  तैयारी- 2-3 बार खेत की जुताई करे, पाटा चलाकर खेत को समतल करे. इसके बाद उपयुक्त आकर की क्यारिया बनाये.
  • बुवाई का समय – अक्टूबर – नवम्बर माह.
  • बीज दर – 7-10 क्विंटल/हेक्टर.
  • बीज उपचार – इसमें कार्बेन्डाजिम  2.5 ग्राम/किलो.कलिया (क्लोव) की दर से बीज उपचार करते है – इसमें 2.5 ग्राम दवाई को एक किलो क्लोव की दर से मिलाते है. जैसे लहसुन की कलिया (बीज) 700 कि.ग्रा. बुवाई के लिए ले रहे है तो इसमें 1.75 कि.ग्रा. कार्बेन्डाजिम बीज उपचार के लिए चाहिए.  दवाई की मात्रा = (2.5*700)/1000.
  • खाद एवं उर्वरक की मात्रा –
  • 25-50 टन/हेक्टर सड़ी हुई गोबर की खाद.
  • 200 कि.ग्रा. डी.ए.पी., 100 कि.ग्रा. यूरिया, 100 कि.ग्रा. पोटाश, 50 कि. ग्रा. दानेदार सल्फर,
  • या 200 कि.ग्रा. कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट, 100 कि.ग्रा. यूरिया, 300 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फॉस्फेट, 100 कि.ग्रा. पोटाश, 50 कि.ग्रा. दानेदार सल्फर.
  • गोबर की खाद को बुवाई से 15-20 दिन पूर्व खेत में अच्छी तरह मिलाये. सभी उर्वरकों को बुवाई के समय डाले व यूरिया को 30-35 दिन बाद खडी फसल में डाले.
  • लहसुन की बुवाई – इसमें लहसुन की गांठ को रगड़कर कलिया निकाली जाती है इन कलियों (क्लोव) की बुवाई की जाती है.
  • कलियों को 15*7.5 -10 सेमी.की दूरी पर बोया जाता है. लाइन से लाइन की दूरी 15 सेमी. व पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी पर कलियों की बुवाई की जाती है.
  • बुवाई के समय ध्यान रखना है कलिओ की नुकीली साइड ऊपर रहे. तथा कलिओ को 4-5 सेमी की गहराई पर बुवाई करते है.
  • कम क्षेत्रफल में बो रहे है तो मजदूरों से बुवाई करे, ज्यादा क्षेत्रफल में बुवाई मशीन का प्रयोग करे.
  • खरपतवार – स्टॉम्प- बुवाई के एक दो दिन के अन्दर स्प्रे करे.
  • Quizalofop ethyl 5% EC+ Oxyfluorfen 23.5% EC
    क्युजालोफोप एथिल + ओक्सिफ़्लुओरफेन
  • यह फसल में वुबाई/रोपाई के बाद जब खरपतवार 4-5 पत्ती की अवस्था में हो तब डाली जाती है.
  •  कीड़े व रोग – इसमें रस चूसने वाले कीड़े थ्रिप्स लगते है इसके नियंत्रण के लिए लेम्बडासाईंहेलोथ्रिन +थाईमेथाक्जोम या लेम्बडासाईंहेलोथ्रिन का प्रयोग करे. और भी कीटनाशी आते है बाजार में उनका भी इस्तेमाल कर सकते है.
  • लहसुन में बेंगनी रोग लगता है इसके नियंत्रण के लिए 2.5 ग्राम/लीटर स्प्रे करे.
  • सिंचाई (पानी) – सर्दी के समय 10-15 दिन में एवं गर्मी में 5-7 दिन में सिचाई करे.
  • सिचाई क्यारी बनाकर मेड नाली पध्दति से करे या स्प्रिंकलर का भी प्रयोग कर सकते है.

 

 

  • पत्तिया पीली होने पर सिंचाई को बंद करे, इसके कुछ  दिन बाद लहसुन कंदों की खुदाई करे.
  • लहसुन की पत्तियो को आपस में बांधकर 20-25 के झुण्ड में सुखाये.
  • अच्छी तरह सूखने के बाद हवादार स्थान पर स्टोर करे. या हवादार प्लास्टिक के बोरो में भरकर हवादार स्थान पर भण्डारण करे.
  • उपज – 175-200 क्विंटल/हेक्टर रहती है.
  • ज्यादा जानकारी के लिए विजिट करे यू ट्यूब चैनल – डिजिटल खेती – Digital Kheti—

 

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