श्री विधि से सरसों की बुवाई

  • System of root Intensification in Mustard-
  • System of Mustard Intensification-
  • SRI in Mustard
  • सरसों एक मुख्य तेलीय फसल है जिसमे से तेल निकलता है जो खाना बनाने में इस्तेमाल किया जाता है.  सरसों के दानों को जब मिलिंग करके तेल निकाला जाता है तो उससे बाई प्रोडक्ट के रूप में खली निकलती है जो दुधारू पशुओ के खिलायी जाती है, इस खली  के प्रयोग से पशु दूध ज्यादा देते है. सरसों रबी सीजन की एक मुख्य फसल है, हमारे देश में राजस्थान राज्य इसका सबसे ज्यादा उत्पादक राज्य है.

श्री विधि से सरसों की बुवाई

  • जड़ सघनता प्रणाली
  • यह सरसों में अधिक उत्पादन लेने की विधि है. बुवाई की इस विधि का प्रयोग करने पर फसल के उत्पादन में  वृद्धि होती  है. इसमें सरसों की नर्सरी तैयार की जाती है. जिसका बाद में खेत में रोपण किया जाता है.
  • इस विधि में उच्च उपज वाली किस्मों का प्रयोग करना चाहिए, अभी प्राइवेट कंपनी के बीज अच्छी उपज वाले आते है इसलिए इनका बीज प्रयोग कर सकते है. या अन्य कही से भी उन्नत किस्म का बीज खरीदकर भी प्रयोग कर सकते है.
  • एक हेक्टर में उपज के लिए सामग्री-
  • बीज 250 ग्राम
  • 500 मिलीग्राम गोमूत्र
  • 500 ग्राम वर्मी कम्पोस्ट/ केंचुए का खाद
  • 100 ग्राम गुड़ ( मीठा गुड)
  • 1 ग्राम कारबेंडाजिम या 5 ग्राम ट्राईकोडर्मा (बीजो उपचार के लिए)
  • 500 मिलीलीटर गर्म पानी
  • रोपणी तैयार करने की विधि- 500 मिलीलीटर पानी को गुनगुना होने तक गर्म करे व इसमें बीज को डाल दे, बीजो को हिलाए इससे ख़राब व थोथले बीज पानी के ऊपर तैरते है, उनको निकाल कर फेंक दे.
  • अब इस बीज व पानी के घोल में गोमूत्र, वर्मी कम्पोस्ट व गुड को डालकर हिलाए, गुड थोड़े से गर्म पानी में घोलकर भी डाल सकते है. अब इस मिश्रण को 6 घंटे के लिए छाया में रख दे.
  • इसके बाद इस घोल को छानले व इस बीज में में कारबेंडाजिम या ट्राईकोडर्मा से बीज उपचार करे.
  • इसके बाद इस मिश्रण को एक पोटली या हलके से गीले बोरे में बांधकर 12 घंटे के लिए लिए रख दे. 12 घंटे के बाद बीज अंकुरित हो जाते है.
  • नर्सरी की तैयारी- अब एक पर्याप्त साइज़ की थोड़ी ऊंचाई की नर्सरी तैयार करे. इसमें अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डाले. इसके बाद अकुरित बीजो को नर्सरी में बोये. व बीजों को भी खाद से अच्छी तरह से ढक दे.
  • 15-20 दिन में पौधे खेत में रोपने के लिए तैयार हो जाते है.
  • इससे पहले किसान को खेत को जुताई करके, समतल करके बुवाई के लिए तैयार कर लेना चाहिए.
  • खाद व उर्वरक-
  • जैविक खाद 25 क्विंटल/हेक्टर व  रासायनिक उर्वरक 60-80 :40: 20: 25 नत्रजन, फोस्फोरस, पोटाश व सल्फर प्रति हेक्टर प्रयोग करते है.
  • सल्फर से सरसों में तेल की मात्रा, दानों का वजन बढता है.
  • जैविक खाद व उर्वरको को बुवाई से पूर्व ही खेत की अंतिम तैयारी के समय मिला दिए जाते है.
  • केवल नत्रजन की आधी मात्रा बुवाई के समय व आधी मात्रा पहली सिंचाई के समय प्रयोग करते है.
  • पौधों का रोपण- तैयार किये गए खेत में 3*3 फीट की दूरी पर पौधों का रोपण करते है, इसमें पौधे से पौधे की दूरी 3 फीट व लाइन से लाइन की दूरी 3 फीट रखी जाती है.
  • खरपतवार का नियंत्रण- इसमें हाथ खुरपी की सहायता से या हैण्ड व्हील वीडर आदि से खरपतवार का नियंत्रण करते है. इससे भूमि में हवा का संचार बढ जाता है व पौधों पर मिट्टी भी चढ़ जाती है.
  • सिंचाई- आवश्यकता अनुसार सिंचाई करे.
  • श्री विधि से बुवाई के फायदे-
  • इस तरह बुवाई करने से फसल की उपज बहुत ही अच्छी आती है.
  • सामान्य बुवाई की तुलना में इस तरह बोने से बीज दर बहुत ही कम लगती.
  • पौधों के बीच दूरी ज्यादा रहती है इसलिए खरपतवार का नियंत्रण करना बहुत ही आसान है. रोग व कीड़ो का नियंत्रण करना भी आसान है.
  • पौधों की बडवार अच्छी होती है, पौधे में शाखाये ज्यादा लगती जिससे फलन भी ज्यादा होता है.

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फोटो- pixabay

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