Cultivation of Flower-Tuberose & Rose, रजनीगंधा व गुलाब की खेती,

Rose crop Production, Tuberose Crop Production,

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आपका स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

  • आज इस पोस्ट में फूलों की खेती के बारे में जानकारी देंगे.
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  • गुलाब – इसकी रोपाई जुलाई-अगस्त या अक्टूबर -नवम्बर में की जाती है.
  • बीज/ कटिंग की मात्रा – इसमें बुबाई कटिंग से की जाती है.    10 हजार कट्टिंग प्रति हेक्टर बुवाई के लिए चाहिए. 
  • बुवाई की दूरी –  1*1 वर्ग मीटर, 2 * 1 वर्ग मीटर, या .75 * 1-2 मीटर  लाइन से लाइन व पौधे से पौधे की दूरी. 
  • प्रूनिंग – गुलाब के पौधे की पुरानी बढ़ी हुई डालियो को काटा जाता है.यह अक्टूबर से दिसंबर महीने में की जाती है. प्रूनिंग के 45 दिन बाद गुलाब में फूल आते है.
  • खाद व उर्वरक – 10-15 टन गोबर की खाद. और नाइट्रोजन – 90 कि.ग्रा./हे., फॉस्फोरस 60 कि.ग्रा./हे. व पोटाश 60 कि.ग्रा./हेक्टर की दर से उपयोग करते है.
  • रजनीगंधा – इसकी रोपाई मार्च – अप्रैल महिने में की जाती है.
  • बीज/कंद की मात्रा – इसकी बुवाई कंद से की जाती है. एक लाख कंद  एक हेक्टर में बुवाई के लिए पर्याप्त है.
  • दूरी – कंदों की रोपाई 30*30 वर्ग सेंटीमीटर पर की जाती है.
  • अंतिम जुताई के समय में 20-25 टन गोबर की खाद डाली जाती. और नाइट्रोजन 200 कि.ग्रा./हे., फॉस्फोरस 50 कि.ग्रा./हे. व पोटाश 70 कि.ग्रा./हे. की दर से उपयोग करते है.
  • खेती बाड़ी में ज्यादा जानकारी के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करे. https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA

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  • Today I will tell you about the production of flowers.
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  • Rose/Gulab – It is planted in July-August or October-November.
  • It is planted by cutting.
  • Amount of seeds / cutting – 10 thousand cuttings per hectare are required.
  • Sowing distance – 1 * 1 or 1 * 2 or .75 * 2 square meter- line to line and plant to plant.
  • Pruning- Vigorous past season shoots or branches are cut down half of it length in the month of October to December. After 45 days of pruning flowering starts.
  • Compost and fertilizer – 10-15 tons of dung manure.
  • And nitrogen 90 kg/ha, phosphorus 60 kg/ha and potash 60 kg/ha are used for planting.
  • Rajanigandha (Tuberose) – It is transplanted in March – April.
  • Number of seeds / tubers – It is sown from the tubers. To plant one hectare one lakh tubers are enough.
  • Distance – Planting of tubers is done at 30 * 30 square centimetres.
  • During last ploughing 20-25 tonne dung manure was added. Nitrogen – 200 kg/ha., Phosphorus 50 kg/ha. And Potash 70 kg/ha are used.

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फूलों की खेती, Cultivation of Flower crops, Foolo ki Kheti.,

फूलों की खेती , Cultivation of Flower Crops.Production of Flower Plants. Fulo Ki kheti, foolo ka utpadan, Phoolo ki kheti, Phoolo ka utpadan,

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  • गुलदाऊदी/सेवंती–
  • इसकी बुवाई – जनवरी फरवरी व जून – जुलाई – अगस्त माह में की जाती है.
  • बीज की मात्रा – आजकल बाजार में हाइब्रिड बीज मिलते है. किसान वहा से खरीद सकते है.
  • इसकी बुवाई के लिए पहले नर्सरी में पौध तैयार की जाती है. इसके बाद पौध की खेत में रोपाई की जाती है.
  • इसको जड़ सकर (root Suckers) व टर्मिनल कटिंग (Turminal Cutting) से भी बुवाई करते है.
  • बुवाई के लिए एक लाख प्रति हेक्टर जड़ सकर या टर्मिनल कटिंग की जरूरत पड़ती है.
  • इसमें विभिन्न रंग के फूल आते है.
  • लगाने की दूरी – 45-50*30 सेमी.
  • खाद व उर्वरक – 10-15 टन गोबर की खाद. और और नाइट्रोजन  125 कि.ग्रा./हे., फॉस्फोरस 120 कि.ग्रा./हे. व पोटाश 25 कि.ग्रा./ हे. दर से उपयोग करते है
  • गेंदा – बुवाई का समय.
  • गर्मी में – जनवरी -फरवरी में लगाते है.         
  • खरीफ/बारिश में – मई – जून में लगाते है.
  • सर्दी/रबी में – सितम्बर – अक्टूबर में लगाते है.
  • बीज की मात्रा – अभी हाइब्रिड बीज आते है. जिसमे में एक बीज की कीमत  एक रुपये से लेकर 1.5 रुपये तक रहती है. और एक हेक्टर में लगभग दस से पंद्रह हजार बीज बुवाई में लगते है. पहले बीजों नर्सरी लगाई जाती है. इसके बाद खेत में पौध की रोपाई की जाती है.
  • बुवाई की दूरी – पौध को 30*30 सेंटीमीटर या 40*40 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाते है.
  • खाद एवं उर्वरक – गोबर की खाद – 30 टन/हे., और नाइट्रोजन – 120 कि.ग्रा./हे., फॉस्फोरस 80 कि.ग्रा./हे. व पोटाश 80 कि.ग्रा./हेक्टर की दर से उपयोग करते है.
  • ग्लाडियोलस – बुवाई का समय – यह जुलाई – नवम्बर महीने में लगाई जाती है.  
  • बीज/कंद की मात्रा- इसकी बुवाई के लिए 150000-180000 ( 1.5 से 1.8 लाख ) कंद/हेक्टर की जरूरत रहती है.                   
  • दूरी – इसकी बुवाई में लाइन से लाइन व पौधे से पौधे से की दूरी 30*20 सेमी. रहती है.                                   
  • खाद – इसमें प्रति हेक्टर 20-25 टन गोबर की खाद प्रयोग की जाती है. और नाइट्रोजन – 60 कि.ग्रा./हे., फॉस्फोरस 40 कि.ग्रा./हे. व पोटाश 40 कि.ग्रा./हेक्टर की दर से उपयोग करते है.                                                         
  • इसके फूल विभिन्न रंगों के आते है.
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  • Today in this  I will tell you about the production of flowers.
  • On this website, we write posts or blogs related to agriculture. So that the farmers keep getting information about farming.
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  • Chrysanthemum (Guldaudi) – It is sown in January -February and June-July-August Month.
  • The quantity of seed – Now a days hybrid seeds can be purchased from market.
  • It has flowers of different colors
  • Seedlings are prepared in the nursery for the sowing of it first. After this planting is done in the field.
  • It is also sown by root sucker or terminal cuttings. One lakh root suckers or terminal cutting are used for sowing one hactre area.
  • The distance for sowing – 45-50 * 30 cm
  • Compost and fertilizer – 10-15 tons of dung manure. And nitrogen 125 kg/ha, phosphorus 120 kg/ha and potash 25 kg/ha are used.
  • It has different kinds of flowers.
  • Marigold – sowing time- in Summer –  January-February month.
  • Kharif / rainy season – in June / June month.
  • Winter / Rabi – September-October month.
  • Quantity of Seed – Now hybrid seeds are used in sowing of marigold. The price of one seed range from one rupee to one and half rupees (1-1.5 Rs/seed). And in one hectare, about ten to fifteen thousand seeds are sown.
  • First nursery is planted with seeds. After this planting of seedling is done in the field.
  • Sowing distance – Planting is done at the space of 30 * 30 cm or 40 * 40 cm. away.
  • Fertilizers and manure – Farm yard manure /compost – 30 ton/ha. And nitrogen 120 kg/ha, phosphorus 80 kg/ha and potash 80 kg/ha are used for planting.
  • Gladiolus – It is planted in the month of July – November.
  • Quantity of seeds / tubers – 150000-180000 (1.5 to 1.8 lakh) of tubers / hectare are needed for sowing.
  • Distance – The distance from the plant to the plant and line to line is 20 * 30 cm for sowing.
  • Compost and fertilizer – 20-25 tons of dung manure. And nitrogen 60 kg/ha, phosphorus 60 kg/ha. and potash 40 kg/ha are used.
  • It has different kinds of flowers.

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Hydroponics and Mushroom Production Training. मशरूम व हाइड्रोपोनिक्स का प्रशिक्षण.

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

आज में आपको बताने वाला हूँ कुछ ट्रेनिंग के बारे में जिसे कोई भी कर सकता है चाहे वो गाँव में रहकर खेती करते है या शहर में रहते हो और उनके पास थोड़ी जगह है तो या वो किराये पर भी ले सकते है. और इस ट्रेनिंग या प्रशिक्षण का खर्चा आदि के बारे में . यह ट्रेनिंग है मशरूम के उत्पादन व हाइड्रोपोनिक्स तरीके से सब्जी उत्पादन के बारे में. अगर किसान खेती बाड़ी के साथ इनका व्यवसाय करता है या इस नए तरीके से खेती करता है तो उनकी आय निश्चित रूप से बढ़ेगी.

हमारी इस वेवसाईट पर हम कृषि से सम्बंधित पोस्ट लिखते है. ताकि किसान भाइयो को खेती के बारे में नई-नई जानकारी मिलती रहे.आप सभी किसान भाईयों और दोस्त, हमारी इस पोस्ट/ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करे व इस जानकारी को अपने व्हाट्सअप या फेसबुक पर शेयर जरूर करे. और पोस्ट के नीचे नीले रंग का सब्सक्राइब का बटन है, तो आप उस में अपना नाम व मेल आई.डी. लिखकर क्लिक करके हमारी इस वेवसाईट को सब्सक्राइब जरूर करे, ताकि जब भी हम कृषि की योजनाओं के बारे में नई पोस्ट डाले तो आपको नोटिफिकेशन के द्वारा इसकी जानकारी मिल जाये. और अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स है उसमे अपना कमेंट, नाम एवं मेल आई.डी. लिख कर नीले रंग के पोस्ट कमेंट के बटन पर क्लिक करे.

सबसे पहले हम बात करते है मशरूम की ट्रेनिंग के बारे में तो इसमें में आपको दो ट्रेनिंग के बारे में बताऊंगा जिसमे से आप कोई सी भी ट्रेनिग कर सकते है. तो इसमें सबसे पहले है इन्दोरी मशरूम के बारे में यह लोग मशरूम का उत्पादन करते है और किसानो को मशरूम के उत्पादन की ट्रेनिंग भी देते है, तो जो लोग मशरूम उत्पादन कर व्यवसाय करना चाहते है वो इसने संपर्क करके आप इनसे अगली ट्रेनिंग की समय स्थान व दिनांक पूछ सकते है और उस समय पर जाकर प्रशिक्षण ले सकते. यह ट्रेनिग में मशरूम उत्पादन व स्पान का उत्पादन (मशरूम का बीज), रोग कीड़ो का नियंत्रण, मशरूम की मार्केटिंग या उसको बेचने की व्यवस्था आदि के बारे में पूरी जानकारी देते है. इनकी फीस ट्रेनिग की अवधि व साथ में देने वाले सामान के अनुसार होती है. इनकी सबसे कम ट्रेनिंग की फीस 500 रुपये प्रति व्यक्ति है. इनसे संपर्क करने के लिए आपको इनके मोबाइल नंबर 7354247521 & 8718996585 पर इनसे बात कर सकते है. यह मध्यप्रदेश में इंदौर में कार्य करते है. तो इनके नजदीकी के जो लोग है वो इनसे संपर्क कर सकते है.

दूसरा है – सोम्य  फूड्स प्राइवेट लिमिटेड – इनका कार्यक्षेत्र देहरादून में है. ये लोग इन हाउस एडवांस मशरूम कल्टीवेशन ट्रेनिंग का आयोजन करते है. यह मशरूम उत्पादन में काफी एडवांस है. यह उतराखंड की कृषि विभाग व वहा की प्रदेश  सरकार के साथ मिलकर युवाओ को ट्रेनिंग देकर उनको व्यवसाय के लिए प्रेरित करते है. इनके संस्थापक व टीम के मेंबर कई बार मशरूम के सम्बन्ध में विदेश भ्रमण भी कर चुके है. व अभी रिसेंटली बाबा रामदेव के साथ पंतजलि के साथ भी मशरूम उत्पादन शुरू किया है.  इनकी अगली ट्रेनिंग 3 -10 जून 2019 को शुरू होगी. जिसकी फीस प्रति व्यक्ति पंद्रह हजार रुपये है. यह साल में कई बार ट्रेनिंग कराते है. तो इनसे संपर्क करने के लिए इस नंबर 7409993860 पर  आप इनसे संपर्क कर सकते है. यह मशरूम के उत्पादन रखरखाब व बेचने तक सभी के बारे में पूरी जानकारी देंगे. ट्रेनिंग की फीस अलग अलग रहती है.

तीसरा है – हाइड्रोपोनिक्स ट्रेनिंग – इसमें केवल पानी से सब्जी का उत्पादन किया जाता है. इसमें सब्जी फसल उगाने के लिए मिटटी का उपयोग नहीं किया जाता है. यह जो ट्रेनिग कराते है उनका नाम है धाकड़ हाई टेक नर्सरी. ये हाइड्रोपोनिक्स की सम्पूर्ण जानकारी देते है. और इनके पास सभी साइज़ में हाइड्रोपोनिक्स के सेट रहते है. जिनको किसान इनसे खरीद सकते है व हाइड्रोपोनिक्स द्वारा सब्जी उगाकर अपना बिज़नस शुरू कर सकते है. इनकी प्रशिक्षण की फीस कम से कम एक हजार रुपये रहती है.

इस प्रकार से कोई भी व्यक्ति इनसे संपर्क करके अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रशिक्षण ले सकता है. इन सभी का फेसबुक आई.डी. है जहा पर आप इंनके बारे में और  डिटेल ले सकते है. Facebook ID – 1. For Mushroom – इन्दोरी मशरूम – Indori mushroom सोम्य फूड्स प्राइवेट लिमिटेड – Soumya Foods Private Limited 2. for Hydroponics -धाकड़ हाई-टेक नर्सरी – Dhakad Hi-Tech Nursery .

Hello friends My name is Chandra Shekhar Joshi and you are welcome to our website www.kisanhomecart.com.

Today, I’m going to tell you about some training that anyone can do, whether they live in the village or they live in the city and they have some space or they can also rent it. And about the cost of this training etc. This training is about production of mushrooms and vegetable production in hydroponics manner. If the farmer does this business with their cultivation or cultivates this new way then his income will definitely increase.

On this website, we write posts related to agriculture. So that the farmers can get new information about farming. All of you must subscribe to this post / blog and share this information on your WhatsApp or Facebook. Below the post there is a blue subscribe box, in that box write your name and email id. Click on the button and subscribe to this website. so that whenever we put new posts about the agriculture, you can get this information through notification. And if you want to ask something then there is a comment box below the post, in this write your comment, name and email id. And send it to me by clicking on the blue comments button.

First of all, we talk about the training of mushrooms. In this I will tell you about two training from which you can do any training. First of all, I will tell you about Indori Mushroom. These people produce mushrooms and also train to the farmers for production of mushroom. People who want to do business mushroom production can contact them. And you can ask them the time and date of the next training. And then go to that training and take training. It gives full information about the production of mushroom, production of spawn (mushroom seeds), control of disease insects, marketing of mushroom or arrangement for selling it in the training. Their fees are in accordance with the duration of the training and the accompanying goods. Their lowest training fee is Rs 500 per person. To get in touch with them, you can talk to them on their mobile number 7354247521 & 8718996585. It works in Indore in Madhya Pradesh. So, people who are close to them can contact them.

The second is – Soumya Foods Pvt. Ltd. – Their area of ​​work is in Dehradun. These people organize In House Advance Mushroom Cultivation Training. This is quite advanced in mushroom production. It trains the youth of Uttarakhand with the agriculture State Department of Uttarakhand and the state government, giving them training and motivating them for business. Their founders and team members have also travelled abroad in relation to mushrooms. And with the Baba Ramdev, he has already started mushroom production. Their next training will begin on June 3-10 June, 2019. The fee of which is fifteen thousand rupees per person. It trains many times a year. You can contact them at this number 7409993860. It will provide complete information about all the mushroom production till production and marketing. Training fees remain different for different trainings.

The third is – Hydroponics training – In this vegetable are produced in water. In this, soil is not used to grow vegetable crops. The name Dhakad High Tech Nursery provides training to farmers about it. It gives complete information of hydroponics. And they have a set of hydroponics in all sizes. farmers can buy them and can start their own business of cultivating vegetable by hydroponics. Their training fees are at least one thousand rupees.

In this way, any person can contact them and can take training to start their own business.

 These are their Facebook IDs. Where you can take more details about trainings. Facebook ID – 1. For Mushroom – Indori mushroom. Soumya Foods Private Limited 2. For Hydroponics – Dhakad Hi-Tech Nursery .

तोरई/गिलकी फसल, चिकनी व धारीवाली तोरई, Cultivation of Torai/ Gilki/ Sponge Gourd and Ridge Gourd.

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

आज इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे तोरई या गिलकी फसल के उत्पादन के बारे में. और इसके बीज की कीमत, बीज दर व उत्पादन से मुनाफा या लाभ के बारे में. इसको इंग्लिश में sponge guard व Ridge Guard भी कहते है क्योकि यह दो तरह की रहती है चिकनी तोरई व धारी वाली तोरई. जिन किसान भाइयो के पास सिंचाई की सुविधा है वो किसान तोरई को गर्मी में उत्पादन कर लाभ कमा सकते है. और बारिश के मौसम में भी लगा सकते है.

हमारी इस वेवसाईट पर हम कृषि से सम्बंधित, फसल उत्पादन, उधानिकी फसल, पशुपालन, कृषि की सरकारी योजनाओं के बारे में पोस्ट या ब्लॉग लिखते है, ताकि किसान भाइयो को खेती के बारे में नई-नई जानकारी मिलती रहे.आप सभी से निवेदन है इस जानकारी को अपने दोस्तों में व्हाट्सअप या फेसबुक पर शेयर जरूर करे. और पोस्ट के नीचे नीले रंग का सब्सक्राइब का बटन है, उस में अपना नाम व मेल आई.डी. लिखकर  क्लिक करके हमारी इस वेवसाईट को सब्सक्राइब जरूर करे, ताकि जब भी हम कृषि के बारे में नई पोस्ट  डाले तो आपको नोटिफिकेशन के द्वारा पोस्ट की जानकारी मिल जाये. और अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स है उसमे अपना कमेंट, नाम एवं मेल आई.डी. लिख कर नीले रंग के पोस्ट कमेंट के बटन पर क्लिक करे.

तोरई के बीज की दर 400 से 600 ग्राम प्रति एकड़ रहती है और बीज की कीमत 4000 से 12000 रुपये प्रति किलोग्राम रहती है. बीज का भाव बीज की गुणवत्ता के अनुसार रहता है, बहुत सारी प्राइवेट कंपनी कलश सीड, बायोसीड, सिंजेंटा, नुन्हेम्स, वी.एन.आर.सीड,अंकुर सीड आदि कंपनी है जो दोनों प्रकार की तोरई का बीज बेचती है. बाजार में बहुत सारी कंपनी का बीज आता है, आप किसी भी कंपनी का बीज खरीद सकते है. यह बीज हाइब्रिड रहता है जिसका उत्पादन अधिक रहता है.

इसकों लगाने के लिए दूरी पौधे से पौधे व लाइन से लाइन अलग अलग रहती है. बारिश के सीजन में दूरी ज्यादा रखते है. व गर्मी में दूरी कम रखी जाती है.1.5 मीटर *1.5 मीटर  या  1.5-2 *1-1.5 मीटर या  1.5-2.5*0.6-1.2  मीटर .

खाद या उर्वरक की मात्रा – 16-24 कि.ग्रा. नाइट्रोजन 12-16 कि.ग्रा. फॉस्फोरस व 12 कि.ग्रा. पोटाश प्रति एकड़. तथा बाद में 10 कि.ग्रा. नाइट्रोजन फूल लगने के समय दिया जाता है. बुवाई का समय – आजकल किसी भी मौसम में तोरई लगाई जा सकती है. गर्मी की बुवाई – जनवरी – फरवरी महीने में. बारिश की बुवाई – जून- जुलाई महीने में की जाती है

इसमें सीधे बुवाई की जाती है ,बीज को मेड नीचे वाले किनारे पर लगा दिया जाता है. वुबाई के 30-35 दिन वाद से फूल आने लगते है एवं 60-75 दिन के फल लगना शुरू हो जाते है. फिर कुछ दिन 4-6 दिन के अंतर पर लगातार फलों तुड़ाई की जाती जाती है. लगभग 2 महीने तक तुड़ाई होती है व उपज प्राप्त की जाती है.

उपज – एक एकड़ में लगभग 8-10 टन या 80-100 क्विंटल या 8000-10000 किलोंग्राम तक तोरई की उपज प्राप्त होती है. अगर 5-10 रुपये प्रति किलों भी बेचते है मंडी में 40-50 हजार रुपये तक आते है. जो सामान्य फसल उत्पादन की तुलना में हमेशा ज्यादा रहते है.गर्मी में तोरई के भाव ज्यादा रहते है व लाभ भी अधिक मिलता है.

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Cultivation of Torai/ Gilki/ Sponge Gourd and Ridge Gourd.

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Today in this post we will discuss about the production of Torai or Gilki crop. And about the price of its seed, seed rate and profit of production. It is also called sponge guard and ridge guard in English because it has two types- smooth Torai and striped Torai (Dhari Vali Torai). Farmers who have irrigation facilities, can make the profit by cultivating it in summer. And it can also be planted in the rainy season.

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The quantity  of tomato seed is 400 to 600 grams per acre and the cost of seed is 4000 to 12000 rupees per kg. The seed price remains in accordance with the quality of the seed. There are so many private companies include Kalash Seed, Biosseed, Syngenta, Nunhems, VNR Seed, Ankur seed etc which sell  seed of Torai. You can buy seeds of any company. This seed remains hybrid, which produces more.

The distance from the plant to plant and line to line is different for planting it. Keep the distance in the rainy season more. And the distance is kept low in summer. Spacing – Plant to Plant & Row to Row-   1.5 meters * 1.5 meters or 1.5-2 * 1-1.5 meters or 1.5-2.5 * 0.6-1.2 meters.

Quantity of fertilizer or fertilizer – Use 16-24 kg Nitrogen, 12-16 kg Phosphorus and 12 kg Potash per acre And at the time of flowering, 10 kg Nitrogen is given.

Sowing Time – Nowadays, it can be grown in any season. Summer Sowing  – in the month of January – February . Sowing of rainy Season or Kharif  – in month of June-July . The sponge guards are sown directly and the seeds are placed on the bottom edge of the ridge.

Flowers begin from 30-35 days after sowing, and fruiting starts 60-75 days after sowing. Then on the difference of 4-6 days, the fruits are harvested continuously. It is harvested roughly for 2 months.

Yield – Yield of it, Approximately 8-10 ton / acre or 80-100 quintals / acres 8000-10000 Kg / acre. If you sell 5-10 rupees per kilo in the mandi, then it comes to 40-50 thousand rupees. Which is always more than normal crop production. The rate of torai is high in summer. The benefits also get more.

For more Information Please visit our YouTube channel ” Digital Kheti” . Thanks.

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तरबूज की उत्पादन तकनीकि, Cultivation of Watermelon.,

तरबूज की उत्पादन लागत, तरबूज की उत्पादन तकनीकि, Cultivation of Watermelon.

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आज इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे तरबूज (water melon) फसल के उत्पादन के बारे में. यह मुख्यतया गर्मी की फसल है. यह एक अतिरिक्त आय की तरह है क्योंकि लोग ज्यादातर गर्मी में फसल उत्पादन नहीं करते है, तो जिन किसान भाइयो के पास सिंचाई की सुविधा है वो तरबूज का उत्पादन कर अधिक लाभ कमा सकते है.

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तरबूज की बीज दर – इसकी बीज दर 250 ग्राम प्रति एकड़ रहती है.  बीज का भाव 35-40 हजार रूपये प्रति किलोग्राम रहता है. हालाँकि सस्ता बीज भी आता है लेकिन उसका उत्पादन बहुत ही कम रहता है. बहुत सारी प्राइवेट सिंजेंटा, कलश सीड, नुन्हेम्स सीड कंपनी आदि, जिनका हाइब्रिड तरबूज का बीज आता है, किसान भाई खाद, बीज बेचने वालों की दुकान से तरबूज का बीज खरीद सकते है.

लगाने की विधि – इसको रिज बेड पध्दति से लगाते है इसमें चार फीट की दूरी पर मेड बनाते है और पौधे से पौधे एक फुट की दूरी रखकर बीज को लगा दिया जाता है.लगाने का समय – जनवरी -फरवरी –मार्च का प्रथम सप्ताह बुवाई के लिय उपयुक्त है.

कुछ लोग तरबूज उगाने के लिए प्लास्टिक मल्च का उपयोग करते है, जिसके अन्दर सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम भी लगा दिया जाता है. मल्च वाली पॉलिथीन में पौधों को बाहर आने के लिए छेद कर दिए जाते है. कुछ लोग एक हिल में दो बीज भी लगाते है ताकि कम से कम एक बीज उग आये और जगह खाली न रहे, नहीं तो उत्पादन में कमी आती है. इसमें  बीज की मात्रा ज्यादा लगती है.प्लास्टिक मल्च के कारण खेत में खरपतवार नहीं उगते है व ड्रिप के कारण आसानी से सिंचाई भी कर सकते है. प्लास्टिक मल्चिंग की लागत प्रति एकड़ 20 हजार रुपये आती है.

पौधों में 30-40 दिन बाद फूल आते है एवं लगभग 70-75 दिन में फल बनता है. जिसकी तुड़ाई करते है और मंडी में थोक में या फुटकर में बेच सकते है.

आय व्यय एक एकड़ में लगभग बीस हजार फल लगते है अगर एक फल का वजन 2 किलो का माने तो लगभग 2 कि.ग्रा. * 20000 फल तो कुल चालीस हजार किलोग्राम तरबूज का उत्पादन होता है एक एकड़ में.और मंडी में 5-10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से थोक में बिकता है और फुटकर में बेंचे तो 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भी बिकता है. इस तरह से किसान तरबूज की खेती से अच्छा लाभ कमा सकते है. अगर पाच रुपये किलो के हिसाब से भी सेल माँने तो  दो लाख होता है और एक लाख का भी खर्चा माने तो लगभग एक लाख की बचत होती है.

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मिर्च के बीज का भाव, नर्सरी, किस्म व उत्पादन

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

आज इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे मिर्ची की उन्नत व संकर किस्मो के बारे में. नर्सरी तैयार करने, बीज दर, बीज के भाव आदि, साथ ही चर्चा करेंगे मिर्ची की खेती के बारे में. जो लोग मिर्ची लगाते है या लगाना चाहते है वो सभी अभी तैयारी कर रहे होंगे. तो उनके लिए मिर्ची के उत्पादन के बारे में बात करेंगे .हम सभी जानते है खाने में मिर्ची रोज इस्तेमाल की जाती है हरी मिर्ची के रूप में व लाल मिर्च पाउडर के रूप में. जो किसान मिर्ची का उत्पादन करते है व सामान्य फसलो की तुलना में अधिक लाभ कमाते है.

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बीज दर – मिर्ची बोने के लिए एक एकड़ में बीज की मात्रा लगभग 80-100 ग्राम लगती है. यानि लगभग 8-10 पैकेट्स लगते है. पहले पैकेट 10 ग्राम के आते है लेकिन अभी पैकेट बीज की संख्या के आधार पर आने लगे है. एक पैकेट में लगभग 1500 बीज आते है.

नर्सरी – खेत में जिसमे पानी आदि नहीं भरता हो व जानवर आदि के कारण नुकसान न हो ऐसे खेत के हिस्से में मिर्ची की पौध तैयार की जाती है. जब पौध 30-40 दिन के हो जाये तो इसको पहले से तैयार खेत में रोप दिया जाता है.लगाने का समय – खरीफ, रबी व जायद में लगा सकते है.खरीफ रोपाई/वुबाई के लिय मई जून में नर्सरी लगाते है.

दूरी – इसमें रोपते समय 75 सेमी. की दुरी पर मेड बनायीं जाती है व उस मेड पर 60-60 सेमी की दूरी पर पौध को रोप दिया जाता है.कुछ लोग मेड़ो के ऊपर प्लास्टिक की मलच बिछाते है व उसके अन्दर ड्रिप बिछाते है और फिर रोप लगते. इससे खेत में खरपतवार नहीं उगती है व ड्रिप के कारण सिंचाई भी आसानी से हो जाती है.

हाइब्रिड मिर्ची की किस्म – यू. एस.-ओजस (US- Ojus)– यह मोटी व लम्बी रहती है. इसका रंग गहरा ग्रीन रहता है एव पनजेंसी/तीखापन कम से मध्यम तक रहता है. इसका प्रयोग मिर्च की भजिया बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. जो बेसन के घोल में को मिर्च को डालकर फिर तेल में तलकर बनाया जाता है. इस किस्म ओजस को लाल मिर्च पाउडर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. इसका इस्तेमाल सब्जी में लाल मिर्च पाउडर के रूप में इस्तेमाल करने पर ग्रेवी का रंग बहुत ही अच्छा रहता है. पूरी ग्रेवी लाल रंग की दिखाई देती है. इस तरह से यह हरी व लाल मिर्ची दोनों में इस्तेमाल की जाती है. इसके बीज का भाव 320 रुपये प्रति पैकेट रहता है.

हाइब्रिड किस्म यू.एस.(US)- 1003 – यह सामान्य रूप से वह किस्म है जो रोज सब्जी बनाने में इस्तेमाल कर सकते है. इसका रंग हल्का हरा या तोतई रंग की रहती है. इसका तीखापन या पनजेंसी मध्यम से उच्च रहती है. यह ज्यादातर हरे फल के रूप सब्जी में इस्तेमाल की जाती है.

US – 720 यह किस्म हरे मिर्च व लाल मिर्च पाउडर दोनों के रूप में इस्तेमाल की जाती है. इसका रंग गहरा व फल की बाहरी परत थोड़ी मोती रहती है. मिर्च का तीखापन माध्यम से उच्च रहता है. उत्पादन भी अच्छा रहता है. इसके पैकेट का भाव 375 रुपये प्रति पैकेट रहता है.

तीनों ही किस्मे उच्च उत्पादन वाली है. ये दोनों किस्मे नुन्हेम्स कंपनी की आती है. नुन्हेम्स कंपनी सब्जी के बीजो के उत्पादन व बेचने वाली एक प्रमुख कंपनी है. अच्छी कंपनी के बीज थोड़े महंगे जरूर होते है लेकिन इनका उत्पादन बहुत अच्छा (High) रहता है व ऐसे बीजो में रोग भी कम ही लगता है.किसान भाई इनमें से किसी भी किस्म को लगा सकते है. जो उनके स्थानीय बाजार में चलती हो. सभी अपने अपने सेगमेंट में अधिक उत्पादन देने वाली किस्मे है.

कीट व रोग – सबसे प्रमुख रूप से थ्रिप्स कीट व  चुर्रा -मुर्रा/ मिर्ची का मोज़ेक या लीफ कर्ल रोग लगता है. जिसकी रोकथाम के लिए दवाई बाजार में आसानी से मिल जाती है.

उत्पादन – हरी मिर्ची का उत्पादन लगभग 30-40 टन प्रति हेक्टर तक होता है और सुखी लाल मिर्ची का उत्पादन 2-3 टन प्रति हेक्टर रहती है. लाल मिर्च उत्पादन वाली मिर्च में दो तुड़ाई हरी मिर्च की जाती है व बाद उसको लाल मिर्च तैयार होने के लिए छोड़ दिया जाता है और अंत में लाल मिर्च बनने पर तुड़ाई कर ली जाती है.

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अधिक उत्पादन के लिए गर्मी में किये जाने वाले कार्य, Activity taken in summer for higher production

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

अभी लगभग सभी खेत खाली पड़े है, जिनके पास सिंचाई की व्यवस्था है केवल उन्ही किसान भाईयो ने खेत में फसल लगा रखी होगी. तो अभी गर्मी के मौसम में ऐसा क्या किया जाये की जब बारिश के मौसम में फसल लगाये तो उत्पादन भी ज्यादा आये और फसल में कीड़ो व रोग से नुकसान भी कम हो. तो आज हम आपको बताने जा रहे है ऐसी ही एक तकनीकी के बारे में जिसका इस्तेमाल आप अपने खेत में करेंगे तो आपको उत्पादन ज्यादा मिलेगा एवं खेत में रोग व कीड़े भी कम लगेंगे. हालांकि इस तकनीकि का इस्तेमाल करके आपकी लागत बढ़ जाएगी लेकिन हम इसी ब्लॉग  में आपको बताएँगे की इसकी लागत की कम कैसे करे.

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तो आज हम यहाँ बात करेंगे गर्मी की गहरी जुताई के बारे में, उसके क्या लाभ है, उसके कैसे करवाना है, उसकी लागत क्या आती है, लागत को कम कैसे करे, गहरी जुताई से उत्पादन कैसे बढेगा व फसल में रोग व कीड़ो के नुकसान को कैसे होंगे , आदि के बारे में यहाँ पर हम चर्चा करेंगे,

गर्मी की गहरी जुताई फसल कटाई के बाद अप्रैल -मई महीने में की जाती है. मई में महीने में अधिक गर्मी पड़ती है तो इस समय खेत में गहरी जुताई करने पर ज्यादा लाभ मिलता है. गहरी जुताई के लिए बिभिन्न प्रकार के हल आते है. उन्ही में से एक पलटी प्लाऊ आता है जो गहरी जुताई करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. गहरी जुताई लगभग एक फीट गहराई तक की जाती है. और इसमें एक फुट तक जमीन की पूरी मिट्टी पलट जाती है.  इस प्लाऊ/हल की कीमत लगभग 65 हजार तक रहती है, कुछ इस तरह के प्लाऊ की कीमत कम भी रहती है तो इसकी कीमत क्वालिटी के अनुसार रहती है. इससे जुताई करने के लिय ज्यादा हॉर्स पॉवर बाले ट्रेक्टर की जरूरत रहती है. तथा इस हल को चलाने के लिए ट्रेक्टर में हाइड्रोलिक सिस्टम लगा होना चाहिए. ये हल एक बार एक तरफ से चलता है व एक बार दूसरी तरफ से चलता है. इस तरह से चलने के कारण जमीन की पूरी जुताई होती है. नहीं तो सामान्य हल में कुछ जमीन बिना जुती छूट जाती है. इस प्रकार के पलटी प्लाऊ से पुरे खेत की जुताई हो जाती है. इसकी जुताई के चार्ज/लागत 700 रुपये/घंटे रहती है. व एक हेक्टर जमीन की गहरी जुताई में लगभग 8 घंटे लगते है. तो एक हेक्टर की गहरी जुताई की लागत 5600 रुपये आती है. तो इससे फसल उत्पादन की लागत बहुत बढ़ जाती है. 

लागत कैसे कम करे – गहरी जुताई तीन साल में एक बार करवाई जाती है हर साल खेतों की गहरी जुताई करने की जरूरत नहीं है.

एक बार में सभी खेतों की गहरी जुताई न करे. हर साल कुछ-कुछ खेत की गहरी जुताई करवाए जिससे एक बार में लागत बहुत अधिक नहीं आएगी.

कुछ राज्यों में गर्मी में गहरी जुताई करवाने पर प्रति हेक्टर अनुदान दिया जाता है, इसका लाभ लेने के लिए आप अपने जिले में कृषि विभाग में संपर्क कर सकते है. सभी किसानों को इसका लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि योजना कम लोगों के लिए आती है. लेकिन योजना हर साल आती है तो किसी भी साल किसान इसका लाभ ले सकते है.

उत्पादन पर प्रभाव- गहरी जुताई करने से खेत की पूरी मिट्टी पलट जाती है तो खेत में जो भी कचरा आदि रहता है वो मिटटी में नीचे चला जाता है, और सड़कर खाद बन जाता है.

खेत की मिट्टी में कीड़े कोकून बनाकर पड़े रहते है तथा अपनी सुसुप्त अवस्था में रहते है व इस तरह से जिन्दा रहते है, जब किसान फसल लगाता है तो ये कोकून में से निकालकर इल्ली व कीड़े बनाकर फसल को नुकसान पहुचाते है, मिटटी पलटने से कोकून जमीन के ऊपर आ जाते है व कीड़े खाने वाले पक्षी इनको खा जाते है. इसकी तरह से खेतो में रोग पैदा करने वाली फंगस रहती है.  तो गहरी जुताई के कारण ये सभी ऊपर आ जाते है व सूरज की तेज धुप के कारण नष्ठ हो जाते है. इनके नष्ट होने से फसल में नुकसान कम होता है.

लगातार एक स्तर पर जुताई करने से या एक ही तरह से जुताई करने पर जमीन के नीचे 15 सेमी. की गहराई पर जमीन की कठोर परत बन जाती है जिसके कारण बर्षा का पानी ज्यादा मात्रा में जमीन में अंदर नहीं घुस पाता है और बहकर खेत से बाहर निकल कर बेकार हो जाता है. इसके कारण उपजाऊ मिटटी व पानी दोनों का नुकसान होता है. गहरी जुताई से कठोर परत टूट जाती है और बारिश का पानी खेत में ज्यादा अन्दर तक जाता है व खेत में सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है. इस तरह से गर्मी की गहरी जुताई के कारण फसल का उत्पादन ज्यादा मिलता है व फसल में रोग भी कम लगते है.

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DAESI, Agriculture inputs,- Fertilizers, Seeds, Pesticides

DAESI, Diploma in Agriculture Extension Services for Input Dealer.

Business of fertilizers, seeds and pesticides is very reputed. Margins are enough good in this. So, person who pursue this business get good benefit.

Agriculture inputs — Fertilizers, Seeds & Pesticides. Fertilizers and Manure – In this NPK, DAP, single super phosphate/ super, Urea, Murate of Potash/ Potash, Sulphur, Zink Sulphate etc Fertilizers come. In includes all kind of fertilizers viz. organic, chemical, liquid, solid etc. Seeds- it includes hybrid, BT, certified etc. seeds of maize, sorghum, pearl-millet, cotton, sunflower, wheat, chick pea, soybean etc. Pesticides – This includes insecticide, which is used to control insects of the crops, fungicides, which is used to control diseases and weedicides, which is used to control weed or waste plants in the crops. It includes both kind of organic and chemical pesticides.So, anyone who wants to run business of agriculture inputs can contact in agriculture and horticulture government department to acquire license .

I have made four videos regarding- eligibility for license, required documents and fees of the license. These videos can be seen on our YouTube channel – Digital Kheti. Link of this channel can be seen at the end of this post. I have written also some blog post about this, which can be seen by scrolling down the posts.

DAESI, Diploma in Agriculture Extension Services for Input Dealers. Earlier anyone can take the agriculture input license whatever education he has. But now the law or eligibility for input license, has changed. This change is made to provide necessary and appropriate, knowledge about fertilizer, seed and pesticide to the farmers through well trained dealers. So, the old dealers or sellers of inputs ( who practice agriculture input business already) who do not have requisite eligibility for license, can do this diploma. After getting this diploma they can run their business further. Without this diploma the old dealers can not renew their input licenses.

To pursue this diploma, they can contact to agriculture department. Its fee is Rs. 20 thousand. In this diploma there is total 48 session of classes. these session are consisted of  40 sessions of classroom teaching and 8 session of practical session. In practical session the dealers will be taken for field visit. Classes of this diploma will be held on each Sunday or on public holidays. This is one-year diploma course. During these sessions, tea and lunch are arranged to them. Vehicles are also arranged for field visit.

To start a batch in diploma course, 40 registration of dealers is required. After completion the sessions, examination will be conducted. Certificate of DAESI will be given to aspirants who get 40 % and more 40 % of the total marks. This diploma is offered from MANAGE, Hyderabad. Diploma course is managed by  agriculture department in the district. To apply for this diploma duly filled application is deposited with fees receipt and two recent passport size photos in agriculture department of your (dealer) district.

Nodal training centre for diploma is decided by MANAGE, Institute Hyderabad and district agriculture department under guidance of state agriculture department.10 thousand rupees are subsidized by DAC, Government of India from fee amount of 20 thousand Rs.Diploma is offered in the district of dealers.

There is not necessary to do this diploma course to the Old dealers who or their family members, have eligibility as per the new guideline or law. So old dealers can submit copy of their or their family member educational certificate in the agriculture department at the time of license renew. Other persons can be sponsored behalf of them to do the diploma if dealers or their family member can not do diploma due to some reasons.

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DAESI, देसी, डेसी, डिप्लोमा इन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन सर्विसेज फॉर इनपुट डीलर.

Diploma in Agriculture Extension Services for Input Dealer., DAESI, देसी, डेसी, डिप्लोमा इन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन सर्विसेज फॉर इनपुट डीलर.,

कृषि में खाद, बीज व दवाई का व्यवसाय बहुत ही सम्मानजनक व लाभ वाला है. इसमें मार्जिन बहुत अच्छा रहता है,तो इनका व्यवसाय करने वाले को लाभ बहुत अच्छा मिलता है. खाद – इसमें एन.पी.के.,डी.ए.पी., सिंगल सुपर फॉस्फेट/ सुपर/ राकोडिया, यूरिया, म्यूरेट ऑफ़ पोटाश/पोटाश, सल्फर खाद, जिंक सल्फेट आदि आते है. इसमें जैविक व रासायनिक तथा तरल व ठोस, आदि सभी प्रकार के खाद आते है. बीज (Seeds)– संकर, बी.टी. व प्रमाणित बीज. मक्का,ज्वार, बाजरा, कपास, सूरजमुखी, गेहू, चना, सोयाबीन आदि के बीज. दवाई/पेस्टिसाइड (Pesticides)- इसके अन्तरगत कीड़ो को मारने व नियंत्रण करने वाली दवाई कीटनाशी (Insecticide), रोगों को ठीक करने वाली या रोगों के कारक बैक्टीरिया वायरस या कवक को मारने वाली दवाई कवकनाशी (fungicide) आदि, तथा फसल में उगने वाले कचरे या फालतू पौधों या खरपतवार को नष्ट करने के लिए खरपतवारनाशी (Herbicide) आती है. इसमें जैविक व रासायनिक दोनों प्रकार की दवाई आती है.

इस तरह से जो भी इन कृषि आदानों (खाद,बीज व दवाई) का  व्यवसाय करना चाहता है, वह अपने जिले में कृषि विभाग व उधानिकी विभाग में संपर्क करके इनका लाइसेंस बनवा सकता है व व्यवसाय शुरू कर सकता है.इसके व्यवसाय करने के लिए किन-किन योग्यताओ (शिक्षा), कागज (documents) व फीस कितनी लगेगी, इसकी मैंने चार वीडियो बनाई है, जिनको आप हमारे यूट्यूब चैनल (डिजिटल खेती )पर जाकर देख सकते है, उसकी लिंक आपको इस पोस्ट के अंत में मिल जाएगी. योग्यताओ व फीस आदि के वारे मैंने और पोस्ट मैंने लिखी है. वह पोस्ट नीचे की पोस्ट में मिल जाएगी, वहा से पढ़कर आप जानकारी ले सकते है.

DAESI देसी डेसीडिप्लोमा इन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन सर्विसेज फॉर इनपुट डीलर. Diploma in Agriculture Extension Services for Input Dealer.पहले कृषि आदानों का लाइसेंस कोई भी ले सकता है, चाहे उसकी शिक्षा कुछ भी हो, चाहे उसने कृषि या उससे से सम्बंधित शिक्षा ली हो या न ली हो,लेकिन अभी कुछ साल पहले खाद,बीज व दवाई का लाइसेंस लेने की योग्यताओ (शिक्षा आदि ) में परिवर्तन किया गया था. ताकि इन खाद ,बीज व दवाई की सही मात्रा, सही उपयोग का तरीका या समय, सही दवाई, खाद व बीज आदि की जानकारी मिल सके. इसके लिए पुराने कृषि आदानों (खाद बीज दवाई) के विक्रेताओ को जिनके पास लाइसेंस के लिए चाही गई योग्यताये न होने की दशा में वो इस डिप्लोमा को करके अपने बिज़नेस को जारी रख सकता है, अगर पुराना विक्रेता इस डिप्लोमा को नहीं करेगा तो उसका लाइसेंस पुनःनवीनीकरण (Renew) नहीं होगा इसलिए उसको इस डिप्लोमा को करना बहुत जरूरी है.

इस डिप्लोमा को करने के लिए कृषि विभाग में संपर्क करना है. इसकी फीस 20 हजार रुपये है.जिसमे कुल 48 सेशन होंगे. इसमें से 40 क्लास रूम सेशन होंगे जिसमे विक्रेताओ को पढाया जायेगा, तथा 8 सेशन प्रैक्टिकल होंगे जिसमे फील्ड भ्रमण कराया जायेगा.इसकी क्लास हर रविवार (Sunday) या शासकीय अवकाश के दिन लगेगी.यह कुल एक साल का डिप्लोमा है.इसमें विक्रेताओ के लिए चाय व खाने (Lunch) की व्यवस्था रहती है.तथा फील्ड भ्रमण के लिए गाड़ी की भी व्यवस्था रहती है.इसमें
डिप्लोमा प्रारंभ करने के लिए, एक बैच में 40 लोग होने चाहिए.इसमें पढाई के बाद परीक्षा होगी जिसकों परीक्षा पास करना अनिवार्य है. जिनके अंक 40% या 40% से अधिक आएंगे वो पास हो जायेंगे और डिप्लोमा का सर्टिफिकेट मिल जायेगा.

यह डिप्लोमा MANAGE हैदराबाद द्वारा कराया जाता है.,जिले में इसकी जिम्मेदारी कृषि विभाग की रहती है. तो इस डिप्लोमा को करने के लिए आवेदन – आई डी.की फोटो कॉपी व फीस व बैंक खाते की जानकारी आदि, अपने जिले में कृषि विभाग में जमा कराये, जैसे ही 40 लोगो का पंजीयन हो जायेगा तो डिप्लोमा का बैच प्रारंभ कर दिया जायेगा. इसमें मैनेज इंस्टिट्यूट हैदराबाद व कृषि विभाग जिले में नोडल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट का निर्धारण करता है. जिसमे डिप्लोमा की पढाई करवाई जाती है.फीस की 20 हजार की राशी में से 10 हजार रुपये का अनुदान या छूट दी जाती है,जो डिप्लोमा पूरा करने के बाद उनके खातो में वापिस की जाती है.

इसमें विक्रेता के स्वय के जिले में ही डिप्लोमा कराया जाता है. पुराने डीलर या विक्रेता जो नए नियमो के अनुसार लाइसेंस की योग्यता रखते है, उनकों इस डिप्लोमा को करने की जरूरत नहीं है. वो अपने स्वयं के या अपने घर के सदस्यों की पढाई के सर्टिफिकेट की कॉपी नवीनीकरण के समय कृषि विभाग में जमा करा सकते है.

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ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर भी क्लिक कर सकते है या इसकी पूरी गाइडलाइन इंग्लिश में मिल जाएगी.

https://www.manage.gov.in/daesi/guidelines.pdf