Package of Practice -Organic Farming,.

Hello friends My name is Chandra Shekhar Joshi and you all are warmly welcomed at our website www.kisanhomecart.com.

Friends, today we will talk about another new technology in agriculture. Or in other words it is the technology which is needed in today’s time. Friends today we will talk about Zero budget natural farming.

Today we are going to tell you about Jeevamrit, Ghanjeevamrit. Waste Decomposer, Cow Urine, Ten Leaves Extract Insecticide, Dhoopvatti of Dung, Organic inter-cropping, and various organic crops. I hope you will keep your cooperation and affection by subscribing to this website and sharing this post.

Jeevamrit – This is sprayed on crops. Or put it in the irrigation water channel and spread in the entire farm. It is used 2-10 times or more in the crops. It is used according to the period of the crop. At a time 200 liters of Jeevamrit is used in one acre. It works as a fertilizer in the crop and decompose the organic substances present in the soil and Make its nutrients available to the crops. It remains in liquid form.

Ghanjeevamrit – It is also used as manure in the crop. It remains in solid form. It is used twice in the crop- Once 7 days before sowing of the crop, and second time 20 days after planting/sowing of crop. At one time, its 100 kilograms/acre quantity is used.

Waste Decomposer – Its solution is used for spraying or with irrigation water. It is used 2-10 times or more in crops. It is used according to the period of the crops.

It can be used alone or in alternate of Jeevamrit. Such as one time Waste Decomposer is sprayed and next jeevamrit is used and in next spray again waste decomposer is used, this cycle is followed. It is also used in rotting dung and crop residues etc. Its 200 liters solution is used in one acre at one time. Sometimes a mixture of half quantity of water and half quantity of waste decomposer is also used. Jeevamrit and West Decomposers are used every 15-20 days interval.

Ten Leaves Extract Organic Insecticide – It is made using 10 types of leaves. Through this, all kinds of insects are controlled in the crop. Its usage rate is 200-750 ml./pump accordingly. The quantity of use depends on crop duration and growth of the crop.

Cow urine – It is used in making Ghanjeevamrit and Jeevamrit. And the cow urine can be used alone too. It works as both insecticides and fertilizers.

Dung incense or Dung Dhoopvatti – Cow dung and urine are also used to make incense of worship.

Inter-cropping – This is the inter-cropping of wheat and pea. It has been inter-cropped organically. In this, wheat  has been sown on the  ridge and peas sown in between the ridge, Now pea has been harvested and sold. In this way farmers can earn good returns in less time by organic inter-cropping.

Organic Crops – These are Wheat, gram and potatoes which had grown in organic manner. In all these quality is very good. And the taste is also great in food. Sujata Wheat – Its yield is low. Because it is a grown in less number of irrigation. But this is sold in the market at a rate of 3500-5000 Rs./100 Kg. People grow Sujata and Banshi wheat in organic farming due to its high protein content.

Garlic cultivation – this has also been grown in organic way. In this field, almost 50% of the crop used to dry up, but nowvthe crop is very good by using the Jeevamrit. And the production will also be good. jeevamrit has been used with irrigation water.

Friends Click on this link to get information about how to make all these – Jeevamrit, Ghanjeevamrit. Waste Decomposer, Ten Leaves Extract Insecticide. I Hope that the farmer brothers will make  them all and will use them in their farms.

  1. Ghan Jeevamrit , Organic Insecticide and Othershttps://youtu.be/RRi-fo27nwo
  2. Jeevamrithttps://youtu.be/vNhKjD6PPME….
  3. Waste Decomposer –..https://youtu.be/umHRq6Jf7DM…
  4. Youtube Channel Linkhttps://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA

If you have any questions related to it or any other kind about farming then you can ask by writing in the comment box below this post.

Hope all of you friends have subscribed to this website, thanks for sharing the post too.

Keep Loving. Thanks

कृषि कार्यमाला-जैविक खेती,

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी का हार्दिक स्वागत है हमारी इस वेबसाईट www.kisanhomecart.com में.

दोस्तों आज बात करेंगे कृषि की एक और नई तकनीकि के बारे में. या यह तकनीकि आज के समय की जरूरत है. दोस्तों आज हम बात करेंगे जीरो बजट प्राकृतिक खेती के बारे में. घन जीवामृत, जीवामृत, वेस्ट दी कम्पोजर, गो मूत्र, दशपर्णी कीटनाशी, गोबर की धूपवत्ती, जैविक अंतरवर्ती फसल और विभिन्न जैविक फसले इन सभी के वारे में आज बात करेंगे. मुझे आशा है आप की हमारी इस वेबसाइट को सब्सक्राइब करके और इस पोस्ट को शेयर करके अपना सहयोग व स्नेह बनाये रखेंगे.  

जीवामृत – इसको फसलों पर स्प्रे किया जाता है. या सिंचाई की नाली के साथ पानी में डालकर पूरे खेत में डाला जाता है. इसका उपयोग फसल में 2-10 बार या इससे भी अधिक बार किया जाता है. फसल की अवधि के अनुसार इसका उपयोग किया जाता है. एक बार में 200 लीटर जीवामृत एक एकड़ में उपयोग किया जाता है. यह फसल में खाद का काम करता है व भूमि में उपस्थित जैविक पदार्थों को सडाता है. और उसमे उपस्थित पोषक तत्वों को पौधों को उपलब्ध कराता है. यह तरल रूप में रहता है.

घन जीवामृत- यह भी फसल में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. यह ठोस रूप में रहता है. इसका उपयोग फसल में दो बार किया जाता है. एक बार फसल बोने से 7 दिन पहले व दूसरी बार फसल बोने के 20 दिन बाद. एक बार में इसकी 100 किलोग्राम मात्रा एक एकड़ में प्रयोग की जाती है.

वेस्ट डी कम्पोजर – इस घोल का उपयोग स्प्रे करने या सिंचाई के पानी के साथ किया जाता है. इसकों फसल में 2-10 बार या इससे अधिक बार प्रयोग किया जाता है . फसल की अवधि के अनुसार इसका उपयोग किया जाता है.

इसको अकेले या जीवामृत के साथ अल्टरनेट भी उपयोग कर सकते है. जैसे एक बार वेस्ट डी कम्पोजर का व एक बार जीवामृत का उपयोग. इसका उपयोग गोबर व कूड़े करकट आदि को सड़ाने में भी किया जाता है. इसका 200 लीटर का घोल एक एकड़ में एक बार में इस्तेमाल किया जाता है. कभी कभी एक पम्प में आधा पानी व आधा वेस्ट डी कम्पोजर मिलाकर भी उपयोग किया जाता है. जीवामृत व वेस्ट डी कम्पोजर का उपयोग हर 15-20 दिन के बाद किया जाता है.

दशपर्णी जैविक कीटनाशी – इसको  10 तरह की पत्तियों का उपयोग करके बनाया जाता है. इसके द्वारा फसल में सभी प्रकार के कीड़ो का नियंत्रण किया जाता है. इसके उपयोग करने की दर 200-750 मिली. प्रति पम्प के हिसाब से रहती है. प्रयोग करने की मात्रा फसल की अवधि व फैलाव के अनुसार रहती है

गोमूत्र – इसका उपयोग घन जीवामृत व जीवामृत बनाने में किया जाता है. व केवल गोमूत्र का उपयोग भी कर सकते है. यह कीटनाशी व खाद दोनों के रूप में फसल में काम करता है.

गोबर की धूपवत्ती- गोबर व गोमूत्र का उपयोग करके गाय के गोबर से पूजा के लिए धूपवत्ती भी बनाई जाती है.

इंटरक्रोपिंग – यह गेंहू व मटर की इंटरक्रोपिंग की है. इसमें जैविक तरीके से इंटर क्रोपिंग की गई है. इसमें मेड बनाकर गेहू की बुवाई की गई है व बीच में मटर लगाई गई थी जिसकों तोड़कर बेच दिया है. इस तरह से इन्टर क्रोपिंग से कम समय में किसान अच्छा लाभ कमा सकते  है.  

जैविक फसल – यह जैविक तरीके से उगाया गया गेंहू, चना व आलू है . जिसमे सभी की गुणवत्ता बहुत ही अच्छी है. और खाने में स्वाद भी बहुत बढ़िया है. सुजाता गेंहू – इसकी उपज कम रहती है. क्योकि यह कम पानी में उगने वाली किस्म है. लेकिन यह गेंहू बाजार में 3500 से 5000 रुपये पर क्विंटल के हिसाब से बिकता है.


लहसुन की खेती – इसको भी जैविक तरीके से उगाया गया है. इस खेत में पहले लगभग 50 % फसल सूख जाती थी लेकिन अभी जीवामृत के उपयोग से फसल बहुत ही अच्छी है. व उत्पादन भी अच्छा होगा. इसमें सिंचाई के पानी के साथ जीवामृत का उपयोग किया गया है.

दोस्तों इन सभी – घनजीवामृत, जीवामृत, वेस्ट डी कम्पोजर, व दशपर्णी कीटनाशी को बनाने की जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे.

  1. https://youtu.be/RRi-fo27nwo. ( घनजीवामृत व अन्य)
  2. https://youtu.be/vNhKjD6PPME. (जीवामृत )
  3. https://youtu.be/KSK_d7dJ020. ( वेस्ट डी कम्पोजर )
  4. https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA……(यूट्यूब चैनल लिंक )

आशा है की किसान भाई इन सभी को बनाकर अपनी खेती में जरूर इस्तेमाल करेंगे. अगर आप कुछ पूछना चाहते है या आपका इससे सम्बंधित या या अन्य किसी भी तरह का खेती से सम्बंधित प्रश्न है तो इस पोस्ट के नीचे कंमेंट बॉक्स है उसमे लिखाकर आप अपना सवाल पूछ सकते है.

आशा है दोस्तों आप सभी ने हमारी इस वेबसाईट को सब्सक्राइब कर दिया होगा, पोस्ट को शेयर करने के लिए धन्यवाद. प्यार और स्नेह बनाये रखे -धन्यवाद.

Grading of Seed,बीज व दानों की ग्रेडिंग,

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

स्पाईरल ग्रेडर –आज हम यहाँ चर्चा करेंगे स्पाइरल ग्रेडर के बारे में- इसकी कीमत, इस पर मिलने वाला अनुदान, किस किस फसल में इसका प्रयोग कर सकते है, प्रयोग करने का तरीका, इसके द्वारा ग्रेडिंग के फायदे, फसल की सफाई, बीज व दानों से अन्य फसल के बीज व कूड़े करकट को हटाना आदि के बारे में चर्चा करेंगे.

इस वेवसाईट पर हम कृषि के बारे में पोस्ट या ब्लॉग लिखते है. ताकि किसान भाइयो को जानकारी मिलती रहे. आप सभी किसान भाईयों और दोस्तों से निवेदन है हमारी इस पोस्ट/ब्लॉग को सब्सक्राइब करे व इस जानकारी को अपने दोस्तों में व्हाट्सअप या फेसबुक पर शेयर जरूर करे. पोस्ट के नीचे नीले रंग का सब्सक्राइब का बटन है, उस में अपना नाम व मेल आई.डी. लिखकर  क्लिक करके वेवसाईट को सब्सक्राइब जरूर करे, ताकि जब भी हम कृषि या कृषि की योजनाओं के बारे में नई पोस्ट डाले तो आपको नोटिफिकेशन के द्वारा इसकी जानकारी मिल जाये. और अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स है उसमे अपना कमेंट, नाम एवं मेल आई.डी. लिख कर नीले रंग के पोस्ट कमेंट के बटन पर क्लिक करे

स्पाईरल ग्रेडर – इसका उपयोग बीज को साफ करने के लिए किया जाता है. इसके द्वारा गोल दाने वाले बीजों को साफ किया जाता है. जैसे सोयाबीन, उड़द, अरहर, मूंग और चवला आदि. अभी बुवाई का समय आ रहा है तो किसान भाई इसके द्वारा बीज को साफ करके बोये तो उनकी उपज में वृद्धि होगी व फसल में अन्य फसल के पौधे व खरपतवार कम रहेंगे. इसके द्वारा ग्रेडिंग करने से बीज में उपस्थित सभी टूटे हुए बीज, मिट्टी, कंकड़, अन्य फसल के बीज, खरपतवारों के बीज,पौधों के तने, डाली आदि के टुकड़े, पत्तियों के टुकड़े,दाने के छिलके आदि सभी को साफ किया जा सकता है.

अगर किसान फसल कटाई के बाद मंडी में बेचने से पहले सोयाबीन जैसी गोल दाने वालों फसलों को इस स्पाइरल ग्रेडर से साफ करके मंडी में बेचने ले जायेंगे तो निश्चित रूप से उनकों फसल के ज्यादा भाव मिलेंगे. गाँव में अगर एक किसान के पास भी यह स्पाइरल ग्रेडर है तो गाँव के अन्य किसान भी इसका प्रयोग करके अपनी फसल की ग्रेडिंग कर सकते है.

इसकी कीमत 5-6 हजार रुपये रहती है. कुछ राज्यों में कृषि विभाग द्वारा इस पर अनुदान दिया जाता है और इसकी कीमत 1200-1500 रुपये पड़ती है. इस पर लगभग 70-80 प्रतिशत तक अनुदान या छूट मिलती है. इसके लिए अपने जिले में कृषि विभाग में संपर्क करे. इसके द्वारा एक घंटे में लगभग 4-5 क्विंटल तक बीज/दानों की ग्रेडिंग की जा सकती है. और दो मजदूर की एक दिन लागत 500 रुपये रहती है इस तरह से आठ घंटे में लगभग 32-40 क्विंटल तक ग्रेडिंग कर सकते है और ग्रेडिंग की प्रति क्विंटल लागत 12-15 रुपये आती है. और ग्रेडिंग वाली फसल बिना ग्रेडिंग की गई फसल की तुलना में 100-350 रुपये प्रति कुन्तल ज्यादा भाव में बिकती है. तो किसान को बहुत ही ज्यादा लाभ होता है.

ऊपर से जब बीजों या दानों को डालते है तो ये पुरे स्पाइरल मशीन में घूमते है और नीचे की तरफ लुढ़कते है, और एक तरफ साफ दाने व दूसरी तरफ से कचरा आदि बाहर निकलता है. इसको चलाने के लिए किसी इलेक्ट्रिक या मोटर ट्रेक्टर आदि की जरूरत नहीं पड़ती है. नाही किसी मजदूर आदि को इसे चलाना पड़ता है. बस इसकों सीधा खड़ा करके ऊपर से दानों को डालते रहे और नीचे टोकरी लगा कर साफ दानों को वापिस से बोरों में भरते रहे व कचरे आदि को भी टोकरी में भरकर एक तरफ डाल दे.

इस तरह से किसान भाई बीज व फसल की सफाई व ग्रेडिंग कर सकते है. व फसल उत्पादन में ज्यादा से ज्यादा लाभ ले सकते है. दोस्तों इस जानकारी/पोस्ट को शेयर करना न भूले साथ ही वेवसाईट को सब्सक्राइब करके आपका सहयोग व स्नेह बनाये रखे. धन्यवाद. सभी को शुभकामनाये.

Plastic Mulching-Video, मल्चिंग फार्मिंग -वीडियो

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Our Most Popular Videos List-Top Videos. हमारी सबसे अधिक लोकप्रिय 11 वीडियो- 1. गोबर की शक्तिशाली खाद कैसे बनाये, gobar ki shaktishali khad kaise banaye,. https://youtu.be/HAcNv47zAgA.,

2. मटका खाद कैसे बनाये, Matka Khad Kaise Banaye., https://youtu.be/j9_iFdybZ1M.,

3. Fertilizer Seed & Pesticides License ?, उर्वरक बीज एवं दवाई का लाइसेंस?., https://youtu.be/vjQ9-c46Us4.,

4. Subsidy on Agriculture Schemes, कृषि विभाग की योजनाओ पर अनुदान., https://youtu.be/dERBxUb6ErA.,

5. उन्नत कपास कैसे उगाये?, Cotton Cultivation ?., https://youtu.be/JKXgMdc6tOw.,

6. फसल बीमा के प्रीमियम की राशि/पैसे कैसे पता करे., https://youtu.be/rNa-0vxfA3I.,

7. सिंचाई सोलर पम्प के लिए आवेदन, Apply for Solar Pump., https://youtu.be/AWHkQVPehdA.,

8. कृषि यंत्रो पर अनुदान/छूट के लिए आवेदन, Apply for Subsidy on Agricultue Implement., https://youtu.be/sjLRnNMjYnE.,

9. खाद बीज का लाइसेंस.,…………………………………….. https://youtu.be/xHDyCey9Ofg., .

10. फार्मर प्रोडूसर कंपनी, Farmer Producer Company., https://youtu.be/BkkEf7Kzang., .

11. वेस्ट डी कम्पोजर जल्दी कैसे मंगाये, Waste Decomposer., https://youtu.be/IwiIuR4WsjE.,

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1. Agriculture Government Schemes/Krishi ki Sarkari yojanye/ कृषि की सरकारी योजनाये https://www.youtube.com/playlist?list….

2. All Horticulture Videos/fal and sabjiyo ki video/ उधानिकी फल एवं सब्जी उत्पादन की वीडियो., https://www.youtube.com/playlist?list….

3. Play List of All Waste Decomposer Videos/ वेस्ट दी कम्पोजर https://www.youtube.com/playlist?list….

4. Play List of All Videos about Organic Farming/jaivik kheti/ जैविक खेती https://www.youtube.com/playlist?list….

5. Play List of All Videos about crop Production/fasal utpadan/ फसल उत्पादन https://www.youtube.com/playlist?list….

6. Innovative Agriculture/kheti ki Naveen jankari/ खेती की नवीन जानकारी https://www.youtube.com/playlist?list….

7. Animal Husbandry & Veterinary/pashupalan and pashu chikitsa/पशुपालन व पशु चिकित्सा https://www.youtube.com/playlist?list…

Plastic Mulching, Cost 12500/acre-Benefit 2 Lac,

Hello friends My name is Chandra Shekhar Joshi and you are welcome to our website www.kisanhomecart.com.

In this post we will discuss about plastic mulching in which the price of the machine, the price of plastic mulch sheet bundle and the total cost or cost per hectare and its benefits and which crops can be planted in it. its use can earn good returns in farming.

On this website, we write posts related to agriculture. So that the farmers can get new information.

All of you must subscribe to this post / blog and share this information on your WhatsApp or Facebook. Below the post there is a blue subscribe box, in that box write your name and email id. Click on the button and subscribe to this website. so that whenever we put new post, you can get this information through notification. And if you want to ask something then there is a comment box below the post, in this write your comment, name and email id. And send it to me by clicking on the blue comments button.

Due to plastic mulching, the weed outbreak in the crop is less or no weed, because the whole bed is covered so the weed does not grow, if a little bit rises then the plastic does not let it increase so it dies. So, there is no loss or damage in yield due to weed infestation.

Due to mulching, irrigation has to be reduced in the field as the bed   is covered with plastic, the water evaporates less in steam.

Second, during mulching, a line of drip is laid down under plastic sheets, so that irrigation can be done at the time of need. Drip also saves irrigation water. And with drip water, fertigation can be done in the crop, the value of the fertilizers that are dissolved in water is low, they have to be given in small quantities, in drip system the crop uses manure efficiently and the waste will be less.

Insects and diseases are considered less because all crop trees are well sprayed with pesticides.

Price or cost- This machine cost is 45000 rupees. Or the rent mulching machine is 300 rupees per bundle. There are 3 bundles in one beegha or 15 bundles are laid in one hectare. So, rent for one hectare is Rs. 4500.

Price of plastic mulching bundle -One bundle costs Rs 1500-1800 Rs. In one hectare, there are 15 bundles are laid, so the cost of the bundle is up to 22500-2000000 rupees per hectare. So, the total cost – the cost of the machine + bundle price. 4500 + 22500 – 27000 = 27000-31500 rupees per hectare.

You can plant these chilli, tomato, bitter gourd or any other crop through mulching. The crops which has high yield and are much costlier can be grown in this.

Important – The most important thing is that by plastic mulching most of the things get settled. So, the farmer’s attention is more on the crop. Because it saves the cost of irrigation, weed, spray etc. and time spent on it. So, farmers can grow crops easily and can get higher yields.

All this is a new generation’s technology which must be adopted by the farmers.

For more information on this Link-

https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA

Video Link.- https://youtu.be/qkv4W-89DmY

लाभ 2 लाख -लागत 12500 रु/एकड़ प्लास्टिक मल्चिंग फार्मिंग,

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

आज इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे प्लास्टिक मल्चिंग के बारे में – जिसमे मशीन की कीमत, प्लास्टिक मल्च की कीमत और प्रति हेक्टर कुल लागत या खर्चा तथा इसके लाभ और इसकों कौन-कौन सी फसल में लगा सकते है. और इसके उपयोग से खेती बाड़ी में अच्छा लाभ कमा सकते है.

इस वेवसाईट पर हम कृषि, फसल उत्पादन, उधानिकी फसल, पशुपालन, कृषि की सरकारी योजनाओं के बारे में पोस्ट या ब्लॉग लिखते है. ताकि किसान भाइयो को खेती के बारे में नई-नई जानकारी मिलती रहे.

आप सभी किसान भाईयों और दोस्तों से निवेदन है हमारी इस पोस्ट/ब्लॉग को सब्सक्राइब करे व इस जानकारी को अपने दोस्तों में व्हाट्सअप या फेसबुक पर शेयर जरूर करे. और पोस्ट के नीचे नीले रंग का सब्सक्राइब का बटन है, उस में अपना नाम व मेल आई.डी. लिखकर  क्लिक करके हमारी इस वेवसाईट को सब्सक्राइब जरूर करे, ताकि जब भी हम कृषि की तकनिकी या कृषि की योजनाओं के बारे में नई पोस्ट डाले तो आपको नोटिफिकेशन के द्वारा इसकी जानकारी मिल जाये. और अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स है उसमे अपना कमेंट, नाम एवं मेल आई.डी. लिख कर नीले रंग के पोस्ट कमेंट के बटन पर क्लिक करे

सबसे पहले इसकों लगाने के फाएदे – प्लास्टिक मल्चिंग के कारण फसल में खरपतवार का प्रकोप कम होता है या नहीं के बराबर होता है क्योंकि पूरी क्यारी ढकी होने के कारण खरपतवार उगता ही नहीं है अगर थोड़ा बहुत उगता है तो प्लास्टिक के कारण वृद्धि नहीं कर पाता है और मर जाता है. तो खरपतवार के कारण उपज में कोई नुकसान या कमी नहीं होती है.

इसके कारण खेत में सिंचाई कम देनी पड़ती है क्योंकि क्यारी प्लास्टिक से ढकी होती है तो पानी कम भाप बनकर उड़ता है.

दूसरा इसमें मेड बनाकर मल्च बिछाने के समय प्लास्टिक शीट के नीचे ड्रिप की लाइन बिछाई जाती है जिससे आवश्यकता के समय फसल में सिंचाई की जा सके. ड्रिप के कारण भी सिंचाई के पानी की बचत होती है. और ड्रिप के साथ पानी में घुलने वाले खादों से फसल में खाद भी दे सकते है,  पानी में घुलने वालो खादों की कीमत कम रहती है, कम मात्रा में देने पड़ते है, और फसल खाद का अच्छी तरह से उपयोग करती है, वेस्ट कम होता है.

खेत में केवल फसल रहने के कारण कीड़े व रोगों की दवाई कम लगती है व सभी फसल के पेड़ो पर अच्छी तरह से स्प्रे होता है.

कीमत या लागत-

इसकी मशीन की कीमत 45000 रुपये रहती है.

या इस मशीन का प्लास्टिक मल्च बिछाने का किराया 300 रुपये प्रति बण्डल रहता है.

एक बीघा में 3 बण्डल लगते है या एक हेक्टर में 15 बण्डल बिछाये जाते है.

तो एक हेक्टर में 4500 रुपये का किराया लगता है.

प्लास्टिक मल्च के बण्डल की कीमत

इसके एक बण्डल की कीमत 1500-1800 रुपये रहती है.

एक हेक्टर में 15 बण्डल लगते है तो इस प्रकार से 22500 –27000 रुपये तक बण्डल का खर्चा आता है.

तो कुल लागत की – मशीन का किराया + बण्डल की कीमत

4500+22500 – 27000= 27000-31500 रुपये तक प्रति हेक्टर लागत आती है.

इसको आप किसी भी फसल मिर्ची, टमाटर , करेला तरबूज या किसी भी फसल में लगा सकते है. जिनकी कीमत अच्छी रहती है उपज ज्यादा रहती है.

महत्वपूर्ण – सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण ये है की प्लास्टिक मल्च लगाने से सभी चीजे व्यवस्थित हो जाती है. तो किसान का ध्यान फसल पर ज्यादा रहता है. क्योकी इसमें सिंचाई, खरपतवार, स्प्रे आदि की लागत व उनपर लगने वाले समय की बचत होती है. यह सब नए ज़माने की उत्पादन तकनीकी है जो किसानों को जरूर अपनानी चाहिए.

ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करे

plastic Mulch. https://www.youtube.com/watch?v=qkv4W-89DmY

YouTube Channel. https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA

Udhaniki ki Yojnao par Anudan, Subsidy on Horticulture Schemes.,

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