खीरा की खेती, Cultivation of Cucumber Crop.

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उन्नत तरीके से खीरा की खेती

खीरा प्रमुख रूप से सलाद के रूप में खाई जानी वाला फल है. यह कुकरबिटेसी कुल का फल है जो गर्मी के मौसम में लगाया जाता है. लेकिन अभी किसी भी मौसम में इसकों लगा सकते है. लेकिन गर्मी के मौसम में खीरा के भाव अधिक रहते है. तो किसान भाई गर्मी में भी इसकी खेती करके अच्छा लाभ ले सकते है.

इसकी खेती खुले खेत में व पॉली हाउस दोनों में की जा सकती है.

खेत में खीरे का उत्पादन.

इसकी बुवाई के लिए 10-12 पैकेट लगे है . एक पैकेट का वजन 25 ग्राम आता है. और एक पैकेट की कीमत 300-500 रुपये प्रति पैकेट रहती है. इस तरह से एक एकड़ में 3000-6000 रुपये तक का बीज लगता है. बुवाई के अनुसार बीज दर 250-350 ग्राम प्रति एकड़ या 11000 बीज प्रति एकड़ रहती है. नुन्हेम्स, सिंजेंटा, वी.एन.आर. आदि कंपनीयों का खीरा आता है तो किसान भाई किसी भी अच्छी कंपनी का बीज लगा सकते है.

खीरे को खरीफ-बारिश में भी लगा सकते है. मई के अंतिम सप्ताह में बुवाई करने पर बहुत अच्छा लाभ होगा. क्योकि बारिश शुरू होने के कुछ समय बाद से इसकी तुड़ाई शुरू हो जाएगी. बुवाई के 50-55 दिन बाद से खीरा लगना शुरू हो जाता है, और कुछ दिनों के अंतर से लगातार लगभग 12-15 बार तुड़ाई होती है.

एक एकड़ जमीन से एक बार में तुड़ाई में 10-15 क्विंटल निकलेगा. और ऐसे इसमें 10-12 बार तुड़ाई होगी तो, इसमें कुल उत्पादन 100-180 क्विंटल तक होगा.

इसकी बुवाई के लिए पांच फुट की दूरी पर मेढ़े बनाई गई है व पौधों से पौधे की दूरी सवा फीट है. अभी इसमें बांस, तार व धागे की सहायता से मचान/पांडाल बनाया जा रहा है जिस पर इसकी बेले चढ़ जाएँगी व फल जमीन से दूर रहेंगे तो सड़ेंगे नहीं. व खीरे की तुड़ाई भी आसानी से कर सकते है.

गर्मी के खीरे की बुवाई करने पर सिंचाई करने के लिए ड्रिप भी लगा सकते है ताकि पानी की कम मात्रा लगे व आसानी से सिंचाई भी की जा सके. बारिश शुरू हो जाएगी तो सिंचाई की जरूरत नहीं है लेकिन ड्रिप लगी रहती है. और बारिश ख़त्म होने के बाद या बीच में अगर सिंचाई की जरूरत पड़ेंगी तो ड्रिप से सिंचाई कर संकते है.

चूकि यह जुलाई के अंतिम सप्ताह में बाजार में बिकना शुरू होगा तो इस समय बाजार भाव अच्छा रहता है. व बाद में सभी लोगो का खीरा बाजार में आ जाता है तो भाव कम हो जाते है. अगर औसत 10 रुपये किलों बिकता है तो एक से 1.5 लाख तक की फसल बेच सकते है. सभी सब्जियों या फलों के उत्पादन पर लाभ भाव पर भी निर्भर रहता है. अगर भाव थोड़ा ज्यादा रहता है तो लाभ बहुत अधिक होता है. सामान्य भाव में भी लाभ अच्छा रहता है.

इस तरह से खीरे का उत्पादन का सकते है.

खीरे की फसल ख़त्म होने के बाद इसमें मक्का लगायेंगे और मक्का को पकने के बाद गर्मी में लोकी या तोरई की फसल लगायेंगे ताकि बांस व तारो से बनाये गए मचान का फिर से उपयोग कर सके.

इस तरह से पुरे साल में खेती से अच्छा लाभ मिलेगा.

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कपास की उन्नत किस्मे, Cultivation of Cotton,

कपास की उन्नत किस्मे, Cultivation of Cotton, DCH Cotton,

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आज इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे डी.सी.एच. कपास के बारे में इसका उत्पादन कर किसान भाई अधिक लाभ कमा सकते है.

देश में दो तरह की कपास बोई जाती है एम.सी.एच. व डी.सी.एच. कपास. इसमें से कपास के कुल क्षेत्र में से बहुत बड़े हिस्से में लगभग 90% भाग में  एम.सी.एच. कपास व बाकी 10 प्रतिशत हिस्से में डी.सी.एच. कपास लगाई जाती है.

डी.सी.एच. कपास की अवधि एम.सी.एच.की तुलना में ज्यादा रहती है. यह कपास लम्बी अवधि तक लगती रहती है. इस कपास का धागा ज्यादा लम्बा रहता है. तथा धागे का रंग थोड़ा भूरे रंग का रहता है. इस कपास का भाव बाजार में ज्यादा मिलता है. जिन क्षेत्रों में यह कपास लगाई जाती है वहा पर इसकी बुवाई बारिश होने के बाद की जाती है. जबकि बहुत सारे राज्यों में एम.सी.एच. कपास की बुवाई बारिश से पूर्व की जाती है.

एक पैकेट में 450 ग्राम बी.टी. कपास आती है जो खेत में कपास के लिए लगाई जाती है. और इसके साथ 120 ग्राम नॉन बी.टी. कपास आती है जिसमे बी.टी. जीन नहीं रहता है. यह नॉन बी.टी. कपास. बी.टी. कपास के चारों और 2 या तीन लाइनों में बोई जाती है, इस पर ही कीटों की इल्ली का प्रकोप होता है व इल्ली का प्रकोप बी.टी कपास पर नही  होता है, इससे बी.टी. कपास के प्रति इल्लियों में प्रतिरोधी क्षमता पैदा नहीं होती हो व बी.टी. कपास की  प्रतिरोधी क्षमता बनी रहती है . बी.टी. कपास पर केवल रस चूसने वाले कीड़ो का ही प्रकोप होता है

एक हेक्टर की बुवाई में लगभग 2.5 किलों या 5 पैकेट बी.टी. कपास लगती है. बीज के एक पैकेट की कीमत 730 रुपये रहती है. कही कही पर कपास के साथ मक्का की इन्टरक्रोपिंग भी की जाती है. ज्यादातर कपास की खेती काली मिटटी में की जाती है, लेकिन आजकल किसी भी प्रकार की उपजाऊ मिट्टी में इसकी खेती कर सकते है, जिसमे जल निकास की सुविधा हो यानि खेत में लम्बे समय तक पानी न भरे. इसका औसत उत्पादन 20-40 क्विंटल प्रति हेक्टर तक होता है. कपास में अगर लगातार सिंचाई करते रहते है तो यह काफी लम्बे समय तक उत्पादन देती है.

यह खरीफ की एक प्रमुख फसल है यह मंडी में 5-6 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिकती है.

कपास की किस्मे – बहुत सी कंपनीयों के कपास के आते है , जिन में से किसी भी कंपनी के कपास की किस्म का चुनाव किसान भाई बुवाई के लिए कर सकते है.

यह सभी विभिन्न प्राइवेट कम्पनियो के कपास की किस्मे है, और भी कंपनी के कपास आते है तो किसान भाई किसी भी कंपनी के कपास का बीज लगा सकते है.

कपास के पैकेट के ऊपर बीज की परिक्षण दिनांक, पैकिंग की दिनांक, बीज की एक्सपायरी दिनांक ( इस तारीख के बाद का बीज नहीं बोना चाहिए), पैकेट की कीमत, बीज का वजन आदि की जानकारी लिखी रहती है.

और पैकेट के ऊपर यह भी लिखा रहता है की यह कपास किस किस राज्य में बुवाई के लिए उपयुक्त है. और पैकेट के ऊपर कस्टमर केयर नंबर भी रहता है, जिस पर किसान फ़ोन करके बीज व कपास की जानकारी ले सकते है. किसान भाई जब भी कपास का पैकेट ख़रीदे तो इन सभी सूचनायों को जरूर पढ़े.

इस पैकेट के ऊपर कपास की किस्म का नाम, कंपनी का नाम व कंपनी का पता आदि लिखा रहता है तो किसान भाइयो को यह जानकारी जरूर पढ़नी चाहिए.