किसान पेंशन योजना -मानधन

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना

इसमें लघु एवं सीमान्त किसानों कों अंशदायी पेंशन का लाभ दिया जायेगा.

लघु किसान – जिनके पास 1 हेक्सेटर लेकर 2 हेक्टर तक जमीन है.

सीमान्त किसान – वो किसान जिनके पास 1 हेक्टर से कम जमीन है.

अंशदायी – इसमें किसानों को भी पैसा देना है तभी उनकों पेंशन योजना का लाभ मिलेगा.

इस योजना का लाभ लेने के लिए योग्यता – इस योजना का लाभ केवल वो ही किसान ले सकते है जो लघु या सीमान्त किसान है. बड़े किसानों ( 2 हेक्टर से अधिक जमीन वाले ) को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा. और जो किसान अन्य किसी पेंशन प्लान का लाभ नहीं ले रहे हो वो किसान इस योजना का लाभ ले सकते है.

योजना के लिय आयुसीमा – इस योजना का लाभ लेने वाले किसान की आयु 18 वर्ष से लेकर 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए . 18 साल से छोटे व 40 वर्ष से अधिक उम्र के किसान इस योजना का लाभ नहीं ले सकते है.

जमा की जाने वाली राशि- इसमें जमा की जाने वाली राशि 55 रुपये से लेकर 200 रुपये प्रति माह रहेगी. जिन की उम्र कम है उनकों कम राशि जमा करना है एवं जिन किसानों की उम्र ज्यादा है उनकों ज्यादा राशि जमा करनी है. उदाहरण के लिए 18 साल के किसान को 55 रुपये  प्रति माह  , 29 साल की उम्र के किसान को 100 रुपये प्रति और 40 वर्ष की उम्र के किसान को 200 रुपये प्रति माह जमा कराना है. इस तरह उम्र के हिसाब से राशि जमा होगी.

तथा जितनी राशि किसान से ली जाएगी उतनी ही राशि केंद्र सरकार द्वारा भी किसान के पेंशन खाते में जमा करायी जाएगी.

पेंशन का लाभ – जब किसान की उम्र 60 साल हो जाएगी इसके बाद किसान के खाते में हर महीने 3000 रुपये की पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी..

आवेदन – यह योजना 9 अगस्त 2019 से शुरू हो गई है तथा इसके आवेदन सामान्य सेवा केंद्र (common Service Centre ) पर होंगे. या जो शहर में ऑनलाइन कम्पूटर सेंटर रहते है जहा से आवेदन आदि भरे जाते है उन सेंटर से किसान भाई आवेदन कर सकते है.

कागजात – इसके लिए किसान को कम्पूटर सेंटर पर आधार कार्ड व बैंक की पासबुक लेके जाना है.

आवेदन की फीस – यह आवेदन निशुल्क है, इसके आवेदन के लिए केंद्र सरकार द्वारा आवेदन करने वाले सेंटर को 30 रुपये प्रति आवेदन का भुगतान किया जायेगा, इसलिए किसान को आवेदन के लिए कोई राशि नहीं देनी है.

प्रीमियम का भुगतान – इसमें किसान जब आवेदन करेंगे तो तो एक ऑटो डेबिट का फार्म आयेगा उसपर किसान अपने हस्ताक्षर करके वापिस कम्पुटर पर अपलोड करेंगे तो राशि स्वत उनके खाते से जमा होती रहेंगी.

और किसान चाहे तो अपनी प्रीमियम की राशि उनकों मिलने वाली प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि में से भी कटवा सकते है. आवेदन के समय यह आप्शन आयेगा. इस तरह किसान बही प्रीमियम का भुगतान कर सकते है.

आवेदन करने के लिए एवं ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करे.

www.pmkmy.gov.in

www.pmkisan.gov.in

खेती बाड़ी के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमारे यूट्यूब चैनल की इस लिंक पर क्लिक करे –

अन्य शर्ते या नियम – 60 वर्ष से पूर्व किसान की मृत्यु होने पर चाहे तो प्रीमियम भरके किसान की पत्नी पेंशन प्लान को चालू रख सकती है. एवं 60 साल पुरे होने पर पत्नी को पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी.

अगर 60 वर्ष की उम्र होने के पूर्व ही किसान की मृत्यु हो जाती है और किसान की पत्नी पेंशन योजना नहीं चाहती है तो जो राशि किसान ने जमा करायी थी वह ब्याज सहित वापिस मिल जाएगी.

अगर किसान की मृत्यु 60 वर्ष के बाद ( पेंशन शुरू होने के बाद ) होती है तो किसान की पत्नी को आधी पेंशन मिलेगी.

दोनों की मृत्यु हो जाने पर पेंशन का जमा फंड सरकार के पेंशन फंड में वापिस चला जायेगा.

इस योजना में महिला व पुरूष दोनों किसान ले सकते है.

Courtesy- krishi and kisan kalyan mantralay bharat sarkar, facebook page and website of of krishi and kisan kalyan mantralay bharat sarkar.

Subsidy on Combine Harvesters, कम्बाईन हार्वेस्टर पर अनुदान- छूट

कम्बाईन हार्वेस्टर खरीदने पर अनुदान/ छूट

इस योजना अन्तर्गत जो किसान कम्बाईन हार्वेस्टर खरीदना चाहते है उन किसानों को कृषि अभियांत्रिकी (Agriculture Engineering ) विभाग द्वारा हार्वेस्टर खरीदने पर अनुदान या छूट दी जा रही है.

जो किसान हार्वेस्टर खरीदना चाहते है वो इस योजना अन्तरगत आवेदन करके योजना का लाभ ले सकते है.हार्वेस्टर फसल कटाई के काम में लिय जाते है – गेंहू सोयाबीन आदि फसले.

हार्वेस्टर पर अनुदान –

  1. कम्बाईन हार्वेस्टर ( स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के साथ – भूसा को भी इकठ्ठा करने वाला ) सेल्फ प्रोपेल्ड (स्वचालित ) 14 फीट कटरवार के साथ – इसमें दो प्रकार से अनुदान दिया गया है. A. जो किसान सीमान्त, लघु, महिला किसान है ( किसी भी जातिवर्ग के ) व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के किसान है इन सभी किसानों को लागत का 50 % अनुदान दिया जायेगा या अधिकतम राशि 8 लाख 56 हजार तक की छूट या अनुदान दी जाएगी . B. एवं ऊपर दिए गए किसानों के अलावा अन्य वर्ग में आने वाले (सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के बड़े किसान) कृषकों को हार्वेस्टर की कुल लागत का 40% तक अनुदान दिया जायेगा या अधिकतम राशि 6 लाख 85 हजार तक की छूट या अनुदान दिया जायेगा.
  • 2. कम्बाईन हार्वेस्टर (ट्रैक टाइप ) ( स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के साथ या विना स्ट्रा मैनेजमेंट के – भूसा को भी इकठ्ठा करने वाला या बिना भूसा प्रबंध के) 6-8 फीट कटरवार के साथ –
  • A. जो किसान सीमान्त, लघु, महिला किसान है ( किसी भी जातिवर्ग के ) व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसान है उनकों लागत का 50 % अनुदान दिया जायेगा या
  • अधिकतम राशि 11 लाख तक का छूट या अनुदान दिया जायेगा .
  • B. एवं ऊपर दिए गए किसानों के अलावा अन्य वर्ग में आने वाले (सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के बड़े किसान) कृषकों को हार्वेस्टर की कुल लागत का 40% अनुदान दिया जायेगा
  • या अधिकतम राशि 8 लाख 80 हजार तक की छूट या अनुदान दिया जायेगा.
  • 3. कम्बाईन हार्वेस्टर (ट्रैक टाइप ) ( स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के साथ – भूसा को भी इकठ्ठा करने वाला ) सेल्फ प्रोपेल्ड (स्वचालित ) 6 फीट कटरवार के साथ –
  • A. जो किसान सीमान्त, लघु, महिला किसान है ( किसी भी जातिवर्ग के ) व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति किसान है उनकों लागत का 50 % अनुदान दिया जायेगा या
  • अधिकतम राशि 7 लाख तक की छूट या अनुदान दिया जायेगा.
  • B. एवं ऊपर दिए गए किसानों के अलावा अन्य वर्ग में आने वाले (सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के बड़े किसान) कृषकों को हार्वेस्टर की कुल लागत का 40% अनुदान दिया जायेगा या
  • या अधिकतम राशि 5 लाख 60 हजार तक की छूट या अनुदान दिया जायेंगा.

इस तरह से तीन प्रकार के हार्वेस्टर पर अनुदान दिया जायेगा – तो जो किसान कम्बाईन हार्वेस्टर खरीदना चाहते है वो किसान आवेदन कर सकते है.

इसके आवेदन ऑनलाइन होंगे तो आपके नजदीकि में जो कम्पूटर किओस्क या सेंटर है उनके द्वारा आवेदन कर सकते है.

आवेदन करने से पूर्व सामान्य श्रेणी के किसानों को 1 लाख रुपये का व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के किसानों को 50 हजार का डिमांड ड्राफ्ट (डी.डी.) बैंक से बनबाना है. और डिमांड ड्राफ्ट का विवरण व स्कैन कॉपी आवेदन के साथ लगानी है. इसके लिए आवेदन 5 अगस्त 2019 से लेकर 19 अगस्त 2019 है. यानि आवेदन की  अंतिम तारीख 19 अगस्त है.

आवेदन के बाद आवेदन की कॉपी व डिमांड ड्राफ्ट अपने जिले में सहायक कृषि यंत्री कार्यालय में जमा कराना होगा. एक जिले में कुल चार हार्वेस्टर तक देने की सीमा है. आवेदन एम.पी. ऑनलाइन (mp online) में माध्यम से होंगे. डिमांड ड्राफ्ट संचालक कृषि अभियांत्रिकी भोपाल के नाम बनवाना है. यह योजना केवल मध्यप्रदेश के किसानों के लिए है.

डिटेल में जानकारी वेवसाईट – www.mpdage.org से भी ले सकते है. ज्यादा जानकारी के अपने जिले में कृषि विभाग या कृषि अभियांत्रिकी के कार्यालय में संपर्क करे.

कृषि या खेती बाड़ी के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करे –

https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA

प्रमुख कीट रोग व रोकथाम,

ज्यादा जानकरी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे –

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बालोर की खेती, सेम की खेती, Cultivation of Bean/Sem,

आज इस पोस्ट में बालोर – सेम की खेती के बारे में जानकारी देंगे.बालोर या सेम को इंडियन बीन भी कहते है. यह एक बेल वाली फसल है जो बारिश में जून जुलाई में लगाई जाती है.

बालोर एक दलहनी फसल है जिसकों खाद/यूरिया की कम मात्रा की जरूरत पड़ती है.

हम जिस खेत की बात कर रहे है वो शांतिलालजी का खेत है इसमें बालोर के साथ लौकी की फसल भी लगाई गई है. किसान चाहे तो इसमें लौकी के जगह दूसरी बेल वाली तोरई या ककड़ी आदि की फसल भी लगा सकते है.

बालोर में पौधे से पौधे की दूरी 3 फीट रखी गई है व लाइन से लाइन से की दूरी 5 फीट रखी गई है.

और लौकी में पौधे से पौधे से की दूरी 6 फीट है व लाइन से लाइन की दूरी 5 फीट है.

लाइन में अल्टरनेट बालोर के पौधे के पास लौकी का पौधा लगाया गया है.

इसमें मेड व नाली बनाई गई है और नाली मेड के किनारे पर  बालोर/सेम व लौकी को लगाया गया है.

खेत के एक किनारे पर नाली बनाई जाती है जिसमें पानी लाकर फिर बालोर व लौकी के पौधों की नाली में पानी या सिंचाई दी जाती है.

किसान भाई चाहे तो ड्रिप लगाकर भी सिंचाई कर सकते है.

जिस जमीन के हम बात कर रहे है बो 1.5 बीघा है.

इसमें 1 किलों प्रति 1.5 बीघा या 3.5 किलों प्रति हेक्टर की दर से बीज लगाया गया है.

और लौकी में 5 पैकेट लेके आये थे 10 ग्राम के 230 रुपये प्रति पैकेट के भाव से.

इसमें बुवाई के बाद 25 किलों यूरिया व 15 किलोग्राम डी.ए.पी. मिलाकर तने से थोड़ी दूरी पर रखा था.

और फसल को 1 महीने की होने पर 10 किलोग्राम 12:32:16 खाद लौकी के पेड़ो के पास रखकर दिया था.

इसमें बेलों को चड़ने के लिए बांस, तार व धागे की सहायता से पांडाल या मचान बनाया जाता है. और बेल के टेनड्रिल धागों की सहायता से पांडाल पर चढ़ जाते है और वृधि/बढ़वार करते रहते है.

पांडाल बनाने के लिए दो बांस खड़े लगाये जाते है और उनके ऊपर एक बांस आड़ा लगाया जाता है. फिर ऊपर तीन लोहे के तार लगाये जाते है. दो तार किनारों पर व एक तार बीच में लगाया जाता है. और दोनों खड़े बांसों के निचले सिरे पर प्लास्टिक की रस्सी बांधते है.

और भी दुसरे तरीकों से मचान या पांडाल बना सकते है अपनी सुविधानुसार.

पांडाल बनाने से फसल बारिश में सडती नहीं है. और पैदावार ज्यादा आती है.

बालोर में शुरू में लीफ माईनर आता है उसकों कीटनाशी डालकर रोक सकते है. व फूलों के समय कीड़ा लगता है उसको कोराजन या टाकूमी कीटनाशी डालकर रोक सकते है.

इस तरह से दो फसल लगाने का फायदा ये है की शुरू में लौकी लगना शुरू हो जाती है व सितम्बर से अक्टूबर तक लगती रहती तो किसान लौकी को बाजार में बेचकर पैसा कमाता है.

बालोर/सेम की फसल अक्टूबर- नवम्बर से लगना शुरू होती है. तब तक लौकी ख़त्म हो जाती है.

तो बालोर लगना शुरू होने के बाद इसकी लगातार तुड़ाई होती रहती है और फलियो को बाजार में बेचकर किसान को पैसा आता रहता है.

अगर सिंचाई की सुविधा लम्बे समय तक उपलब्ध है तो बालोर फरवरी- मार्च तक चलती है.

इस तरह किसान को सितम्बर से फरवरी मार्च तक  लौकी व बालोर से लगातार पैसा आता रहता है.

किसान को इस 1.5 बीघा में लौकी से लगभग 50 हजार व बालोर से 1 लाख 10 हजार की आय होती है व तो कुल 1 लाख 60 हजार तक की आय किसान को प्राप्त होती है.

इस तरह से किसान भाई कम जमीन होने पर भी अच्छा लाभ कमा सकते है.

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