प्रमुख कीट रोग व रोकथाम,

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कपास की उन्नत किस्मे, Cultivation of Cotton,

कपास की उन्नत किस्मे, Cultivation of Cotton, DCH Cotton,

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में. हमारी इस वेवसाईट पर हम कृषि से सम्बंधित पोस्ट या ब्लॉग लिखते है. ताकि किसान भाइयो को नई-नई जानकारी मिलती रहे.

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आज इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे डी.सी.एच. कपास के बारे में इसका उत्पादन कर किसान भाई अधिक लाभ कमा सकते है.

देश में दो तरह की कपास बोई जाती है एम.सी.एच. व डी.सी.एच. कपास. इसमें से कपास के कुल क्षेत्र में से बहुत बड़े हिस्से में लगभग 90% भाग में  एम.सी.एच. कपास व बाकी 10 प्रतिशत हिस्से में डी.सी.एच. कपास लगाई जाती है.

डी.सी.एच. कपास की अवधि एम.सी.एच.की तुलना में ज्यादा रहती है. यह कपास लम्बी अवधि तक लगती रहती है. इस कपास का धागा ज्यादा लम्बा रहता है. तथा धागे का रंग थोड़ा भूरे रंग का रहता है. इस कपास का भाव बाजार में ज्यादा मिलता है. जिन क्षेत्रों में यह कपास लगाई जाती है वहा पर इसकी बुवाई बारिश होने के बाद की जाती है. जबकि बहुत सारे राज्यों में एम.सी.एच. कपास की बुवाई बारिश से पूर्व की जाती है.

एक पैकेट में 450 ग्राम बी.टी. कपास आती है जो खेत में कपास के लिए लगाई जाती है. और इसके साथ 120 ग्राम नॉन बी.टी. कपास आती है जिसमे बी.टी. जीन नहीं रहता है. यह नॉन बी.टी. कपास. बी.टी. कपास के चारों और 2 या तीन लाइनों में बोई जाती है, इस पर ही कीटों की इल्ली का प्रकोप होता है व इल्ली का प्रकोप बी.टी कपास पर नही  होता है, इससे बी.टी. कपास के प्रति इल्लियों में प्रतिरोधी क्षमता पैदा नहीं होती हो व बी.टी. कपास की  प्रतिरोधी क्षमता बनी रहती है . बी.टी. कपास पर केवल रस चूसने वाले कीड़ो का ही प्रकोप होता है

एक हेक्टर की बुवाई में लगभग 2.5 किलों या 5 पैकेट बी.टी. कपास लगती है. बीज के एक पैकेट की कीमत 730 रुपये रहती है. कही कही पर कपास के साथ मक्का की इन्टरक्रोपिंग भी की जाती है. ज्यादातर कपास की खेती काली मिटटी में की जाती है, लेकिन आजकल किसी भी प्रकार की उपजाऊ मिट्टी में इसकी खेती कर सकते है, जिसमे जल निकास की सुविधा हो यानि खेत में लम्बे समय तक पानी न भरे. इसका औसत उत्पादन 20-40 क्विंटल प्रति हेक्टर तक होता है. कपास में अगर लगातार सिंचाई करते रहते है तो यह काफी लम्बे समय तक उत्पादन देती है.

यह खरीफ की एक प्रमुख फसल है यह मंडी में 5-6 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिकती है.

कपास की किस्मे – बहुत सी कंपनीयों के कपास के आते है , जिन में से किसी भी कंपनी के कपास की किस्म का चुनाव किसान भाई बुवाई के लिए कर सकते है.

यह सभी विभिन्न प्राइवेट कम्पनियो के कपास की किस्मे है, और भी कंपनी के कपास आते है तो किसान भाई किसी भी कंपनी के कपास का बीज लगा सकते है.

कपास के पैकेट के ऊपर बीज की परिक्षण दिनांक, पैकिंग की दिनांक, बीज की एक्सपायरी दिनांक ( इस तारीख के बाद का बीज नहीं बोना चाहिए), पैकेट की कीमत, बीज का वजन आदि की जानकारी लिखी रहती है.

और पैकेट के ऊपर यह भी लिखा रहता है की यह कपास किस किस राज्य में बुवाई के लिए उपयुक्त है. और पैकेट के ऊपर कस्टमर केयर नंबर भी रहता है, जिस पर किसान फ़ोन करके बीज व कपास की जानकारी ले सकते है. किसान भाई जब भी कपास का पैकेट ख़रीदे तो इन सभी सूचनायों को जरूर पढ़े.

इस पैकेट के ऊपर कपास की किस्म का नाम, कंपनी का नाम व कंपनी का पता आदि लिखा रहता है तो किसान भाइयो को यह जानकारी जरूर पढ़नी चाहिए.

Hydroponics and Mushroom Production Training. मशरूम व हाइड्रोपोनिक्स का प्रशिक्षण.

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

आज में आपको बताने वाला हूँ कुछ ट्रेनिंग के बारे में जिसे कोई भी कर सकता है चाहे वो गाँव में रहकर खेती करते है या शहर में रहते हो और उनके पास थोड़ी जगह है तो या वो किराये पर भी ले सकते है. और इस ट्रेनिंग या प्रशिक्षण का खर्चा आदि के बारे में . यह ट्रेनिंग है मशरूम के उत्पादन व हाइड्रोपोनिक्स तरीके से सब्जी उत्पादन के बारे में. अगर किसान खेती बाड़ी के साथ इनका व्यवसाय करता है या इस नए तरीके से खेती करता है तो उनकी आय निश्चित रूप से बढ़ेगी.

हमारी इस वेवसाईट पर हम कृषि से सम्बंधित पोस्ट लिखते है. ताकि किसान भाइयो को खेती के बारे में नई-नई जानकारी मिलती रहे.आप सभी किसान भाईयों और दोस्त, हमारी इस पोस्ट/ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करे व इस जानकारी को अपने व्हाट्सअप या फेसबुक पर शेयर जरूर करे. और पोस्ट के नीचे नीले रंग का सब्सक्राइब का बटन है, तो आप उस में अपना नाम व मेल आई.डी. लिखकर क्लिक करके हमारी इस वेवसाईट को सब्सक्राइब जरूर करे, ताकि जब भी हम कृषि की योजनाओं के बारे में नई पोस्ट डाले तो आपको नोटिफिकेशन के द्वारा इसकी जानकारी मिल जाये. और अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स है उसमे अपना कमेंट, नाम एवं मेल आई.डी. लिख कर नीले रंग के पोस्ट कमेंट के बटन पर क्लिक करे.

सबसे पहले हम बात करते है मशरूम की ट्रेनिंग के बारे में तो इसमें में आपको दो ट्रेनिंग के बारे में बताऊंगा जिसमे से आप कोई सी भी ट्रेनिग कर सकते है. तो इसमें सबसे पहले है इन्दोरी मशरूम के बारे में यह लोग मशरूम का उत्पादन करते है और किसानो को मशरूम के उत्पादन की ट्रेनिंग भी देते है, तो जो लोग मशरूम उत्पादन कर व्यवसाय करना चाहते है वो इसने संपर्क करके आप इनसे अगली ट्रेनिंग की समय स्थान व दिनांक पूछ सकते है और उस समय पर जाकर प्रशिक्षण ले सकते. यह ट्रेनिग में मशरूम उत्पादन व स्पान का उत्पादन (मशरूम का बीज), रोग कीड़ो का नियंत्रण, मशरूम की मार्केटिंग या उसको बेचने की व्यवस्था आदि के बारे में पूरी जानकारी देते है. इनकी फीस ट्रेनिग की अवधि व साथ में देने वाले सामान के अनुसार होती है. इनकी सबसे कम ट्रेनिंग की फीस 500 रुपये प्रति व्यक्ति है. इनसे संपर्क करने के लिए आपको इनके मोबाइल नंबर 7354247521 & 8718996585 पर इनसे बात कर सकते है. यह मध्यप्रदेश में इंदौर में कार्य करते है. तो इनके नजदीकी के जो लोग है वो इनसे संपर्क कर सकते है.

दूसरा है – सोम्य  फूड्स प्राइवेट लिमिटेड – इनका कार्यक्षेत्र देहरादून में है. ये लोग इन हाउस एडवांस मशरूम कल्टीवेशन ट्रेनिंग का आयोजन करते है. यह मशरूम उत्पादन में काफी एडवांस है. यह उतराखंड की कृषि विभाग व वहा की प्रदेश  सरकार के साथ मिलकर युवाओ को ट्रेनिंग देकर उनको व्यवसाय के लिए प्रेरित करते है. इनके संस्थापक व टीम के मेंबर कई बार मशरूम के सम्बन्ध में विदेश भ्रमण भी कर चुके है. व अभी रिसेंटली बाबा रामदेव के साथ पंतजलि के साथ भी मशरूम उत्पादन शुरू किया है.  इनकी अगली ट्रेनिंग 3 -10 जून 2019 को शुरू होगी. जिसकी फीस प्रति व्यक्ति पंद्रह हजार रुपये है. यह साल में कई बार ट्रेनिंग कराते है. तो इनसे संपर्क करने के लिए इस नंबर 7409993860 पर  आप इनसे संपर्क कर सकते है. यह मशरूम के उत्पादन रखरखाब व बेचने तक सभी के बारे में पूरी जानकारी देंगे. ट्रेनिंग की फीस अलग अलग रहती है.

तीसरा है – हाइड्रोपोनिक्स ट्रेनिंग – इसमें केवल पानी से सब्जी का उत्पादन किया जाता है. इसमें सब्जी फसल उगाने के लिए मिटटी का उपयोग नहीं किया जाता है. यह जो ट्रेनिग कराते है उनका नाम है धाकड़ हाई टेक नर्सरी. ये हाइड्रोपोनिक्स की सम्पूर्ण जानकारी देते है. और इनके पास सभी साइज़ में हाइड्रोपोनिक्स के सेट रहते है. जिनको किसान इनसे खरीद सकते है व हाइड्रोपोनिक्स द्वारा सब्जी उगाकर अपना बिज़नस शुरू कर सकते है. इनकी प्रशिक्षण की फीस कम से कम एक हजार रुपये रहती है.

इस प्रकार से कोई भी व्यक्ति इनसे संपर्क करके अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रशिक्षण ले सकता है. इन सभी का फेसबुक आई.डी. है जहा पर आप इंनके बारे में और  डिटेल ले सकते है. Facebook ID – 1. For Mushroom – इन्दोरी मशरूम – Indori mushroom सोम्य फूड्स प्राइवेट लिमिटेड – Soumya Foods Private Limited 2. for Hydroponics -धाकड़ हाई-टेक नर्सरी – Dhakad Hi-Tech Nursery .

Hello friends My name is Chandra Shekhar Joshi and you are welcome to our website www.kisanhomecart.com.

Today, I’m going to tell you about some training that anyone can do, whether they live in the village or they live in the city and they have some space or they can also rent it. And about the cost of this training etc. This training is about production of mushrooms and vegetable production in hydroponics manner. If the farmer does this business with their cultivation or cultivates this new way then his income will definitely increase.

On this website, we write posts related to agriculture. So that the farmers can get new information about farming. All of you must subscribe to this post / blog and share this information on your WhatsApp or Facebook. Below the post there is a blue subscribe box, in that box write your name and email id. Click on the button and subscribe to this website. so that whenever we put new posts about the agriculture, you can get this information through notification. And if you want to ask something then there is a comment box below the post, in this write your comment, name and email id. And send it to me by clicking on the blue comments button.

First of all, we talk about the training of mushrooms. In this I will tell you about two training from which you can do any training. First of all, I will tell you about Indori Mushroom. These people produce mushrooms and also train to the farmers for production of mushroom. People who want to do business mushroom production can contact them. And you can ask them the time and date of the next training. And then go to that training and take training. It gives full information about the production of mushroom, production of spawn (mushroom seeds), control of disease insects, marketing of mushroom or arrangement for selling it in the training. Their fees are in accordance with the duration of the training and the accompanying goods. Their lowest training fee is Rs 500 per person. To get in touch with them, you can talk to them on their mobile number 7354247521 & 8718996585. It works in Indore in Madhya Pradesh. So, people who are close to them can contact them.

The second is – Soumya Foods Pvt. Ltd. – Their area of ​​work is in Dehradun. These people organize In House Advance Mushroom Cultivation Training. This is quite advanced in mushroom production. It trains the youth of Uttarakhand with the agriculture State Department of Uttarakhand and the state government, giving them training and motivating them for business. Their founders and team members have also travelled abroad in relation to mushrooms. And with the Baba Ramdev, he has already started mushroom production. Their next training will begin on June 3-10 June, 2019. The fee of which is fifteen thousand rupees per person. It trains many times a year. You can contact them at this number 7409993860. It will provide complete information about all the mushroom production till production and marketing. Training fees remain different for different trainings.

The third is – Hydroponics training – In this vegetable are produced in water. In this, soil is not used to grow vegetable crops. The name Dhakad High Tech Nursery provides training to farmers about it. It gives complete information of hydroponics. And they have a set of hydroponics in all sizes. farmers can buy them and can start their own business of cultivating vegetable by hydroponics. Their training fees are at least one thousand rupees.

In this way, any person can contact them and can take training to start their own business.

 These are their Facebook IDs. Where you can take more details about trainings. Facebook ID – 1. For Mushroom – Indori mushroom. Soumya Foods Private Limited 2. For Hydroponics – Dhakad Hi-Tech Nursery .

अधिक उत्पादन के लिए गर्मी में किये जाने वाले कार्य, Activity taken in summer for higher production

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

अभी लगभग सभी खेत खाली पड़े है, जिनके पास सिंचाई की व्यवस्था है केवल उन्ही किसान भाईयो ने खेत में फसल लगा रखी होगी. तो अभी गर्मी के मौसम में ऐसा क्या किया जाये की जब बारिश के मौसम में फसल लगाये तो उत्पादन भी ज्यादा आये और फसल में कीड़ो व रोग से नुकसान भी कम हो. तो आज हम आपको बताने जा रहे है ऐसी ही एक तकनीकी के बारे में जिसका इस्तेमाल आप अपने खेत में करेंगे तो आपको उत्पादन ज्यादा मिलेगा एवं खेत में रोग व कीड़े भी कम लगेंगे. हालांकि इस तकनीकि का इस्तेमाल करके आपकी लागत बढ़ जाएगी लेकिन हम इसी ब्लॉग  में आपको बताएँगे की इसकी लागत की कम कैसे करे.

हमारे इस वेवसाईट पर हम कृषि से सम्बंधित, फसल उत्पादन की तकनीकी, उधानिकी फसलों, पशुपालन, कृषि की सरकारी योजनाओं आदि के बारे में पोस्ट या ब्लॉग डालते है. ताकि किसान भाइयो को खेती के बारे में नई नई जानकारी मिलती रहे.

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तो आज हम यहाँ बात करेंगे गर्मी की गहरी जुताई के बारे में, उसके क्या लाभ है, उसके कैसे करवाना है, उसकी लागत क्या आती है, लागत को कम कैसे करे, गहरी जुताई से उत्पादन कैसे बढेगा व फसल में रोग व कीड़ो के नुकसान को कैसे होंगे , आदि के बारे में यहाँ पर हम चर्चा करेंगे,

गर्मी की गहरी जुताई फसल कटाई के बाद अप्रैल -मई महीने में की जाती है. मई में महीने में अधिक गर्मी पड़ती है तो इस समय खेत में गहरी जुताई करने पर ज्यादा लाभ मिलता है. गहरी जुताई के लिए बिभिन्न प्रकार के हल आते है. उन्ही में से एक पलटी प्लाऊ आता है जो गहरी जुताई करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. गहरी जुताई लगभग एक फीट गहराई तक की जाती है. और इसमें एक फुट तक जमीन की पूरी मिट्टी पलट जाती है.  इस प्लाऊ/हल की कीमत लगभग 65 हजार तक रहती है, कुछ इस तरह के प्लाऊ की कीमत कम भी रहती है तो इसकी कीमत क्वालिटी के अनुसार रहती है. इससे जुताई करने के लिय ज्यादा हॉर्स पॉवर बाले ट्रेक्टर की जरूरत रहती है. तथा इस हल को चलाने के लिए ट्रेक्टर में हाइड्रोलिक सिस्टम लगा होना चाहिए. ये हल एक बार एक तरफ से चलता है व एक बार दूसरी तरफ से चलता है. इस तरह से चलने के कारण जमीन की पूरी जुताई होती है. नहीं तो सामान्य हल में कुछ जमीन बिना जुती छूट जाती है. इस प्रकार के पलटी प्लाऊ से पुरे खेत की जुताई हो जाती है. इसकी जुताई के चार्ज/लागत 700 रुपये/घंटे रहती है. व एक हेक्टर जमीन की गहरी जुताई में लगभग 8 घंटे लगते है. तो एक हेक्टर की गहरी जुताई की लागत 5600 रुपये आती है. तो इससे फसल उत्पादन की लागत बहुत बढ़ जाती है. 

लागत कैसे कम करे – गहरी जुताई तीन साल में एक बार करवाई जाती है हर साल खेतों की गहरी जुताई करने की जरूरत नहीं है.

एक बार में सभी खेतों की गहरी जुताई न करे. हर साल कुछ-कुछ खेत की गहरी जुताई करवाए जिससे एक बार में लागत बहुत अधिक नहीं आएगी.

कुछ राज्यों में गर्मी में गहरी जुताई करवाने पर प्रति हेक्टर अनुदान दिया जाता है, इसका लाभ लेने के लिए आप अपने जिले में कृषि विभाग में संपर्क कर सकते है. सभी किसानों को इसका लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि योजना कम लोगों के लिए आती है. लेकिन योजना हर साल आती है तो किसी भी साल किसान इसका लाभ ले सकते है.

उत्पादन पर प्रभाव- गहरी जुताई करने से खेत की पूरी मिट्टी पलट जाती है तो खेत में जो भी कचरा आदि रहता है वो मिटटी में नीचे चला जाता है, और सड़कर खाद बन जाता है.

खेत की मिट्टी में कीड़े कोकून बनाकर पड़े रहते है तथा अपनी सुसुप्त अवस्था में रहते है व इस तरह से जिन्दा रहते है, जब किसान फसल लगाता है तो ये कोकून में से निकालकर इल्ली व कीड़े बनाकर फसल को नुकसान पहुचाते है, मिटटी पलटने से कोकून जमीन के ऊपर आ जाते है व कीड़े खाने वाले पक्षी इनको खा जाते है. इसकी तरह से खेतो में रोग पैदा करने वाली फंगस रहती है.  तो गहरी जुताई के कारण ये सभी ऊपर आ जाते है व सूरज की तेज धुप के कारण नष्ठ हो जाते है. इनके नष्ट होने से फसल में नुकसान कम होता है.

लगातार एक स्तर पर जुताई करने से या एक ही तरह से जुताई करने पर जमीन के नीचे 15 सेमी. की गहराई पर जमीन की कठोर परत बन जाती है जिसके कारण बर्षा का पानी ज्यादा मात्रा में जमीन में अंदर नहीं घुस पाता है और बहकर खेत से बाहर निकल कर बेकार हो जाता है. इसके कारण उपजाऊ मिटटी व पानी दोनों का नुकसान होता है. गहरी जुताई से कठोर परत टूट जाती है और बारिश का पानी खेत में ज्यादा अन्दर तक जाता है व खेत में सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है. इस तरह से गर्मी की गहरी जुताई के कारण फसल का उत्पादन ज्यादा मिलता है व फसल में रोग भी कम लगते है.

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अधिक उत्पादन के लिए जुताई, Plough for High Production

Adhik Utpadan ke liye Jutai., अधिक उत्पादन के लिए गर्मी की गहरी जुताई,

यह तीन साल में एक बार की जाती है.सभी खेतों की एक ही बार में गहरी जुताई नहीं करे. टुकड़ो में जुताई करवाए.इसमें खेत की 30 सेमी.तक जुताई करते है. यह अप्रैल- मई में की जाती है.

ज्यादातर फसल उगाने का कार्य जमीन के 15 सेमी गहराई तक किया जाता है, फसल उगाने के लिए एक ही स्तर पर बार -बार जुताई करने से जमीन में एक कठोर परत बन जाती है, जिसके कारण बारिश में पानी जमीन के अन्दर नहीं जा पाता है, और बहकर खेत से बाहर निकल जाता है.गहरी जुताई से यह कठोर परत टूट जाती है व खेत की जमीन पानी का अवशोषण करती है.मिट्टी पलटने से जमीन में रहने बाले कीड़े व रोग (कवक) आदि जमीन के ऊपर आ जाते तो ये पक्षिओ द्वारा खा लिए जाते है, व कुछ तेज सूरज की धूप के कारण नष्ट हो जाते हो. जिससे फसलों के कीड़े व रोग कम लगते है. मिट्टी पलटने से जमीन का कचरा नीचे चला जाता है और अच्छी तरह से सडकर खाद बन जाता है. बाद में फसल की तैयारी के लिए खेत की जुताई भी आसानी से हो जाती है व मिट्टी भुरभुरी हो जाती है. इन सभी के कारण फसल का उत्पादन अधिक प्राप्त होता है.

हाइड्रोलिक पलटी प्लाऊ –यह हाइड्रोलिक सिस्टम से चलने वाला रहता है, जिसके कारण इसे केवल हाइड्रोलिक सिस्टम वाले ट्रेक्टर से ही चला सकते है.इसकी कीमत लगभग 35-40 हजार तक रहती है.इससे जुताई करने पर पूरी जमीन की जुताई होती है खेत में विना जुताई वाली जमीन नहीं रहती है.इसकी लागत 4500 रुपये प्रति हेक्टर रहती है.

सामान्य गहरी जुताई वाला प्लाऊ –इसकी कीमत 20-25 हजार रुपये रहती है.इससे गहरी जुताई करने पर कुछ जमीन विना जुताई के रह जाती है.इसकी जुताई की लागत 3 हजार रुपये प्रति हेक्टर रहती है.इस तरह किसान भाई अपनी सुविधा अनुसार प्लाऊ का इस्तेमाल करके गर्मी की गहरी जुताई कर सकते है.

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विभिन्न फसलों के मंडी भाव

Mandi Rate of Different Crops.

Mandi-Neemuch-Mandsaur-Indore-Ujjain)

विभिन्न फसलों के मंडी भाव ( रुपये प्रति क्विंटल )

मंडी– नीमच -मंदसौर -इंदौर -उज्जैन

गेंहू (Wheat)– 1900-2240

गेंहू शरबती (Wheat -Sharbati) – 2602-2630

जौ  (Barley)– 1630-1830

मक्का (Maize)– 1300-1560

सोयाबीन  (Soybean) – 2800- 3370

रायडा/सरसों (Mustard) – 3620-3820

ज्वार – (Sorghum) – 1560-1700

अलसी (Linseed) – 3950-4120

तारामीरा (Taramira)– 3900-4000

मूंगफली (Ground Nut) – 2800-4400

चना (Chick Pea) – 3650-4100

उड़द (Black Gram) – 3300-4100

मसूर (Lentil)- 2150-3350

मूंग- (Green Gram ) – 2500-2800

तुवर/अरहर (Pigeon Pea ) – 2500-3320

मैंथी (fenugreek) – 3210-3950

धनिया (Coriander)– 4700-5800

अजवाइन (Ajwain) – 8900-14500

इसबगोल  (Isabgol)– 5800-8720

कलौंजी  (Kalonji)– 7550 – 9350

ग्वार ( Guar )(Cluster Bean)– 3700-4000

तिल्ली/तिल (Til) (Sesamum) –5500-11500

असगंध (Ashwagandha)– 6100-7150

तुलसी  बीज (Tulsi Seed)–5500-10500

लहसुन (Garlic) – 200-1500

लहसुन  सुपर (Garlic Super)– 3000-7200

सुवा (Suva)– 5850-6700

असालिया (Asaliya)– 3600-3900

चिरायता (chirata)– 1300-1400

पोस्ता/खसखस (Posta Seed/Khaskhas/Opium poppy)– 40000-60500

कपास एम.सी.एच. (Cotton-MCH) –3900- 5099

कपास – डी.सी.एच. (Cotton -DCH) – 5150- 5861

डालर चना Dollor Chick pea)– 3000-5510

प्याज (Onion)– 100-500

बटला/मटर (Pea) – 1501-1950

Courtesy- Patrika News

How to claim crop insurance

How to apply for crop Insurance.
  • How to claim crop insurance.
  • Debated Farmers- (compulsory)- Farmers who have credit card/Kisan Credit Card (KCC) or loan from the bank. They must have crop insurance. Banks insure their crop if they have credit card from the bank compulsorily. The bank will take insurance premium from their loan account. So, there is no more problem for these debated farmers. If they want to make changes in crops or others information they can contact to their bank.
  • Undebated Farmers- farmers who do not have credit card or loan from the bank can apply for crop insurance. They are advised to take crop insurance essentially.
  • Document for undebated farmers-
  • Completely filled Crop Insurance Application.
  • Khata khasra/bhoo adhikar patrika/Document of agriculture/crop land.
  • Crop sowing Certificate from Patwari/field agriculture officer.
  • Identity Card- Aadhar Card, Voter-ID, Rashan Card or Pan Card etc.
  • Premium Amount
  • All these documents are deposited with premium in your bank.
  • How to know Premium amount of insurance- contact agriculture department of your block or District, bank where farmer has his account. They can search online to this website – www.pmfby.gov.in.
  • Last date of insurance- Farmer can insured their crops up to last date from the date of sowing.
  • Last date of crop insurance is 15 January for rabi crops and 31 august for kharif crops. Up to this date farmers can deposit premium amount in their bank. Sometimes dates may vary according to area.
  • The premium amount is 1.5% of insured amount for Rabi Crops and 5% for cash & commercial crops and 2% for Kharif Crops, of insured amount.
  • For example, insured amount for wheat crop is 54000 Rs. /ha then the premium amount @ 1.5 % will be (54000*1.5)/100 = 810 Rs. /ha.
  • Insured amount of crops- it is decided by the district level technique committee under chairmanship of District Collector.
  • Alternate of Loss compensation/reimbursement – in case of hailstorm, landslide, or water flooding, compensation will be done on individual basis.
  • Failure of sowing- if sowing is not competed in 75% of crop sowing area then compensation is given by the insurance company. Insurance amount is paid on the basis of average yield data at the end of season.
  • if losses occur 15 days after crop cutting due to unseasonal rain or cyclone then, compensation is provided to farmers accordingly.
  • Procedure of estimating losses reimbursement/compensation-
  • Crop cutting experiment are done by the field agriculture officer or Patwari officers in each patwari halkawise in gram panchayat/gram/village. In this experiment, crop of 5*5meter square area within field is harvested and after threshing, data are taken of wet and dry crop yield. This crop cutting experiment are done by smart mobile application, in this photo are taken of crop field, crop cutting, threshing and weighing of crop yield of 5*5meter square area. All these data are sent online by the help of mobile app. Rational Reimbursement is provided to farmer if the average yield of these experiment is lower than district average yield of last years.
  • In case of loss in crops yields, the insured amount proportionately will come directly and automatically in farmers accounts.
  • For more information farmer can contact banks, primary agriculture cooperative committee, agriculture department, insurance company or online.
  • courtesy- pmfby.gov.in

फसलों का बीमा क्लेम

  • प्रधान मंत्री फसल बीमा के लिए आवेदन कैसे करे ?
  • फसलों का बीमा क्लेम
  • योजना का लाभ कैसे उठाये-
  • ऋणी कृषक (अनिवार्य आधार पर) – जिन किसानो के पास किसान क्रेडिट कार्ड है, या जिन्होंने बैंक से (15 सितम्बर से 15 जनवरी तक)  लोन लिया है उनको बीमा करवाना अनिवार्य है. इनको बैंक में जाकर संपर्क करना है, ऋणी किसानों का बीमा बैंक स्वत कर देती है. बैंक को ऋणी किसान का बीमा करना ही पड़ता है.
  • अऋणी कृषक (ऐच्छिक आधार पर)- जिस किसान के पास किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है एवं बैंक से लोन नहीं लिया है वे किसान भी बीमा करा सकते है, उनको सलाह है कि वो भी बीमा अनिवार्य रूप से कराये.
  • अऋणी किसान के लिए आवश्यक दस्तावेज –
  • पूरी तरह भरा हुआ बीमा  प्रस्ताव पत्र. (बैंक या कृषि विभाग से ले)
  • भू अधिकार पत्रिका/ खाता खसरा  
  • पटवारी/ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से प्रमाणित बुवाई प्रमाण पत्र
  • पहचान पत्र (आधार कार्ड, वोटर आई डी, राशन कार्ड, पेन कार्ड) की फोटोकॉपी
  • प्रीमियम राशि, ये सभी ले जाकर जिस बैंक में उसका खाता है उसमे  जमा करे.
  • प्रीमियम राशि अपने खाते में जमा कराये, वहा से बैंक राशि को बीमा कंपनी के खाते में जमा करेंगी.
  • प्रीमियम राशि कैसे पता करे – कृषि विभाग में, या बैंक में जहा से किसान क्रेडिट कार्ड लिया है, या ऑनलाइन मोबाइल या कम्पूटर पर इस www..pmfby.gov.in वेवसाईट पर जाकर पता करे.
  • प्रीमियम की अंतिम तारीख –
  • किसान बुवाई के बाद अंतिम तारीख तक बीमा करा सकते है.
  • बैंक द्वारा  बीमा की प्रीमियम राशि लेने की अंतिम तारीख ऋणी व अऋणी किसानो के लिए 15 जनवरी है.
  • प्रीमियम दर- रबी फसलों के लिए 1.5 % व नगदी व वाणिज्य फसलों के लिए 5 % बीमित राशि का.
  • बीमित राशि – ऋणी व अऋणी किसानो के लिए  प्रत्येक जिले की जिला स्तरीय तकीनीकी  समिति दयारा कलेक्टर महोदय की अध्यक्षता में, उस क्षेत्र की सभी फसलों के लिय बीमित राशि निर्धारित की जाती है.
  • क्षतिपूर्ति के विकल्प –
  • ओलावृष्टि, भूस्खलन एवं जल प्लावन की स्थिति में व्यक्तिगत क्षतिपूर्ति की जाएगी.
  • बुआई की विफलता- यदि संभावित बुवाई क्षेत्र  के 75% क्षेत्र में बुवाई न होने पर क्षतिपूर्ति की जाएगी.
  • मौसम के अंत में औसत पैदावार आंकड़ो के आधार पर दावा भुगतान किया जायेगा.
  • फसल कटाई के बाद 15 दिन तक चक्रवात या बेमौसम बारिश से नुकसान होने पर क्षतिपूर्ति की जाएगी.
  • क्षतिपूर्ति का तरीका – इसमें हर पटवारी हलके में कृषि बिभाग के फील्ड अधिकारी व राजस्व विभाग के पटवारी अधिकारी  द्वारा फसल कटाई प्रयोग किये जाते है. इसमें खेत के अन्दर से 5*5 वर्ग मीटर  क्षेत्रफल से फसल, पकने पर काटी जाती है, फिर इसकी थ्रेशिंग करके गीले व सुखाकर उपज का वजन लिया जाता है.
  • यह फसल कटाई का प्रयोग स्मार्ट मोबाइल एप की सहायता से किया जाता है इसमें खेत का फोटो,फसल की कटाई करने का फोटो, 5*5 वर्ग मीटर की उपज के फोटो ऑनलाइन भेजे जाते है, फिर उस हलके की या एरिया की औसत उपज के आधार पर क्षति पूर्ति की जाती है. यदि इन फसल कटाई प्रयोगों की  औसत उपज, जिले की औसत उपज से कम आती है, तो उसी अनुपात में किसानों को बीमा राशि का भुगतान किया जाता है.
  • नुकसान होने पर या बीमा मिलने की दशा में पैसे किसान के खाते में स्वत आ जाते है.  
  • ज्यादा जानकारी के लिए किसान भाई निकटतम बैंक या प्राथमिक कृषि सहकारी समिति, कृषि विभाग या आपके जिले में बीमा करने वाली कंपनी के ऑफिस या कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करे.
  • Photo courtesy fr fmfby.com.
  • विजिट करे हमारे यूट्यूब चैनल – डिजिटल खेती – Digital Kheti—-
  • बीमा की पूरी जानकारी के लिए इस वीडियो को देखे या लिंक पर क्लिक करे –
  • https://youtu.be/yKpgx7L5en4

Weed Control in Wheat Crop, Weedicide in Wheat,

Weed Control in Wheat Crop, Weed of wheat,
Weedicide in Wheat,

  • Weed is a major problem in Wheat. Weedicides are sprayed to control weeds in wheat
  • Name of weedicide which is used to control weed in Wheat crop-
  • Clodinafop Propargyl 15% + Metsulfuron Methyl 1% WP.
  • This is used after 20-25 days of sowing of crop or in standing crop.
  • This controls both types narrow and broad leaf of weed.
  • Weedicide- it has two packet one of is 160-gram powder and second is 500 ml liquid. 160-gram powder is weedicide, and 500 ml liquid which increase the efficiency of weedicide.
  • Solution Preparation– Take 10 glass water in a bucket. Mix 160-gram powder in this and then mix 500 ml liquid in 10 glass water thoroughly with the help of wooden stick. Now solution is ready to use.
  • Take one glass of mixture solution in a pump and fill the pump with water and spray it on the standing crop.
  • 10 pumps are sprayed over one-acre crop area.
  • Cost of weedicide for one acre is 550 Rs.
  • Precaution- Spray weedicide on crop when filed has sufficient moisture.
  • Clean the pump completely after weedicide spray.
  • For more information visit —Digital Kheti —on YouTube..
  • https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA.

गेंहू फसल में खरपतवार का नियंत्रण

    • गेंहू के खरपतवारनाशी ,
    • गेंहू में खरपतवार का नियंत्रण,
    • गेंहू फसल में खरपतवार एक मुख्य समस्या है, इसके नियंत्रण के लिए बुवाई के बाद खडी फसल में खरपतवारनाशी का स्प्रे किया जाता है.
    • खरपतवारनाशी का नाम – क्लोडिनाफोप प्रोपरजिल 15% + मेटसल्फूरोन मैथिल 1 % डवल्यू.पी.
    • Clodinafop Propargyl 15% + Metsulfuron Methyl 1% WP.

  • इसका प्रयोग खडी फसल में बुवाई के 20-25 दिन बाद किया जाता है.
  • यह सकरी पत्ती व चौड़ी पत्ती दोनों प्रकार के खरपतवारों को नष्ट करता है.
  • खरपतवारनाशी – इसके डिब्बे में दो पैकिट  आती है एक 160 ग्राम दवाई (पावडर रूप में)का और दूसरा 500 मिली. (द्रव रूप में)का पैकेट जो खरपतवारनाशी की कार्य करने की क्षमता को बढाता है.
  • घोल तैयार करना – इसके लिए एक बाल्टी में 10 लीटर  या 10 ग्लास पानी लीजिये. इसमें पहले 160 ग्राम दवाई मिलाये इसके बाद 500  मिली. के पैकेट को मिलाये व लकड़ी आदि की सहायता से अच्छी तरह से घोल ले.
  • एक पम्प में एक लीटर या एक ग्लास दवाई व पम्प को पानी से भरे व स्प्रे करे.
  • यह दवाई एक एकड़ के लिए है इसलिए एक एकड़ में 10 पम्प दवाई का स्प्रे करे.
  • इसकी कीमत 550 रुपये रहती है एक एकड़ के लिए.
  • सावधानी –
  • इसके प्रयोग के समय खेत में नमी होना आवश्यक है की अन्यथा यह अच्छी तरह काम नहीं करती है.
  • दवाई के प्रयोग करने के बाद पम्प को अच्छी तरह साफ करके रखे.
  • ज्यादा जानकारी के लिए खोजे यूट्यूब चैनल – डिजिटल खेती —Digital Kheti—
  • https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA