बालोर की खेती, सेम की खेती, Cultivation of Bean/Sem,

आज इस पोस्ट में बालोर – सेम की खेती के बारे में जानकारी देंगे.बालोर या सेम को इंडियन बीन भी कहते है. यह एक बेल वाली फसल है जो बारिश में जून जुलाई में लगाई जाती है.

बालोर एक दलहनी फसल है जिसकों खाद/यूरिया की कम मात्रा की जरूरत पड़ती है.

हम जिस खेत की बात कर रहे है वो शांतिलालजी का खेत है इसमें बालोर के साथ लौकी की फसल भी लगाई गई है. किसान चाहे तो इसमें लौकी के जगह दूसरी बेल वाली तोरई या ककड़ी आदि की फसल भी लगा सकते है.

बालोर में पौधे से पौधे की दूरी 3 फीट रखी गई है व लाइन से लाइन से की दूरी 5 फीट रखी गई है.

और लौकी में पौधे से पौधे से की दूरी 6 फीट है व लाइन से लाइन की दूरी 5 फीट है.

लाइन में अल्टरनेट बालोर के पौधे के पास लौकी का पौधा लगाया गया है.

इसमें मेड व नाली बनाई गई है और नाली मेड के किनारे पर  बालोर/सेम व लौकी को लगाया गया है.

खेत के एक किनारे पर नाली बनाई जाती है जिसमें पानी लाकर फिर बालोर व लौकी के पौधों की नाली में पानी या सिंचाई दी जाती है.

किसान भाई चाहे तो ड्रिप लगाकर भी सिंचाई कर सकते है.

जिस जमीन के हम बात कर रहे है बो 1.5 बीघा है.

इसमें 1 किलों प्रति 1.5 बीघा या 3.5 किलों प्रति हेक्टर की दर से बीज लगाया गया है.

और लौकी में 5 पैकेट लेके आये थे 10 ग्राम के 230 रुपये प्रति पैकेट के भाव से.

इसमें बुवाई के बाद 25 किलों यूरिया व 15 किलोग्राम डी.ए.पी. मिलाकर तने से थोड़ी दूरी पर रखा था.

और फसल को 1 महीने की होने पर 10 किलोग्राम 12:32:16 खाद लौकी के पेड़ो के पास रखकर दिया था.

इसमें बेलों को चड़ने के लिए बांस, तार व धागे की सहायता से पांडाल या मचान बनाया जाता है. और बेल के टेनड्रिल धागों की सहायता से पांडाल पर चढ़ जाते है और वृधि/बढ़वार करते रहते है.

पांडाल बनाने के लिए दो बांस खड़े लगाये जाते है और उनके ऊपर एक बांस आड़ा लगाया जाता है. फिर ऊपर तीन लोहे के तार लगाये जाते है. दो तार किनारों पर व एक तार बीच में लगाया जाता है. और दोनों खड़े बांसों के निचले सिरे पर प्लास्टिक की रस्सी बांधते है.

और भी दुसरे तरीकों से मचान या पांडाल बना सकते है अपनी सुविधानुसार.

पांडाल बनाने से फसल बारिश में सडती नहीं है. और पैदावार ज्यादा आती है.

बालोर में शुरू में लीफ माईनर आता है उसकों कीटनाशी डालकर रोक सकते है. व फूलों के समय कीड़ा लगता है उसको कोराजन या टाकूमी कीटनाशी डालकर रोक सकते है.

इस तरह से दो फसल लगाने का फायदा ये है की शुरू में लौकी लगना शुरू हो जाती है व सितम्बर से अक्टूबर तक लगती रहती तो किसान लौकी को बाजार में बेचकर पैसा कमाता है.

बालोर/सेम की फसल अक्टूबर- नवम्बर से लगना शुरू होती है. तब तक लौकी ख़त्म हो जाती है.

तो बालोर लगना शुरू होने के बाद इसकी लगातार तुड़ाई होती रहती है और फलियो को बाजार में बेचकर किसान को पैसा आता रहता है.

अगर सिंचाई की सुविधा लम्बे समय तक उपलब्ध है तो बालोर फरवरी- मार्च तक चलती है.

इस तरह किसान को सितम्बर से फरवरी मार्च तक  लौकी व बालोर से लगातार पैसा आता रहता है.

किसान को इस 1.5 बीघा में लौकी से लगभग 50 हजार व बालोर से 1 लाख 10 हजार की आय होती है व तो कुल 1 लाख 60 हजार तक की आय किसान को प्राप्त होती है.

इस तरह से किसान भाई कम जमीन होने पर भी अच्छा लाभ कमा सकते है.

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खीरा की खेती, Cultivation of Cucumber Crop.

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उन्नत तरीके से खीरा की खेती

खीरा प्रमुख रूप से सलाद के रूप में खाई जानी वाला फल है. यह कुकरबिटेसी कुल का फल है जो गर्मी के मौसम में लगाया जाता है. लेकिन अभी किसी भी मौसम में इसकों लगा सकते है. लेकिन गर्मी के मौसम में खीरा के भाव अधिक रहते है. तो किसान भाई गर्मी में भी इसकी खेती करके अच्छा लाभ ले सकते है.

इसकी खेती खुले खेत में व पॉली हाउस दोनों में की जा सकती है.

खेत में खीरे का उत्पादन.

इसकी बुवाई के लिए 10-12 पैकेट लगे है . एक पैकेट का वजन 25 ग्राम आता है. और एक पैकेट की कीमत 300-500 रुपये प्रति पैकेट रहती है. इस तरह से एक एकड़ में 3000-6000 रुपये तक का बीज लगता है. बुवाई के अनुसार बीज दर 250-350 ग्राम प्रति एकड़ या 11000 बीज प्रति एकड़ रहती है. नुन्हेम्स, सिंजेंटा, वी.एन.आर. आदि कंपनीयों का खीरा आता है तो किसान भाई किसी भी अच्छी कंपनी का बीज लगा सकते है.

खीरे को खरीफ-बारिश में भी लगा सकते है. मई के अंतिम सप्ताह में बुवाई करने पर बहुत अच्छा लाभ होगा. क्योकि बारिश शुरू होने के कुछ समय बाद से इसकी तुड़ाई शुरू हो जाएगी. बुवाई के 50-55 दिन बाद से खीरा लगना शुरू हो जाता है, और कुछ दिनों के अंतर से लगातार लगभग 12-15 बार तुड़ाई होती है.

एक एकड़ जमीन से एक बार में तुड़ाई में 10-15 क्विंटल निकलेगा. और ऐसे इसमें 10-12 बार तुड़ाई होगी तो, इसमें कुल उत्पादन 100-180 क्विंटल तक होगा.

इसकी बुवाई के लिए पांच फुट की दूरी पर मेढ़े बनाई गई है व पौधों से पौधे की दूरी सवा फीट है. अभी इसमें बांस, तार व धागे की सहायता से मचान/पांडाल बनाया जा रहा है जिस पर इसकी बेले चढ़ जाएँगी व फल जमीन से दूर रहेंगे तो सड़ेंगे नहीं. व खीरे की तुड़ाई भी आसानी से कर सकते है.

गर्मी के खीरे की बुवाई करने पर सिंचाई करने के लिए ड्रिप भी लगा सकते है ताकि पानी की कम मात्रा लगे व आसानी से सिंचाई भी की जा सके. बारिश शुरू हो जाएगी तो सिंचाई की जरूरत नहीं है लेकिन ड्रिप लगी रहती है. और बारिश ख़त्म होने के बाद या बीच में अगर सिंचाई की जरूरत पड़ेंगी तो ड्रिप से सिंचाई कर संकते है.

चूकि यह जुलाई के अंतिम सप्ताह में बाजार में बिकना शुरू होगा तो इस समय बाजार भाव अच्छा रहता है. व बाद में सभी लोगो का खीरा बाजार में आ जाता है तो भाव कम हो जाते है. अगर औसत 10 रुपये किलों बिकता है तो एक से 1.5 लाख तक की फसल बेच सकते है. सभी सब्जियों या फलों के उत्पादन पर लाभ भाव पर भी निर्भर रहता है. अगर भाव थोड़ा ज्यादा रहता है तो लाभ बहुत अधिक होता है. सामान्य भाव में भी लाभ अच्छा रहता है.

इस तरह से खीरे का उत्पादन का सकते है.

खीरे की फसल ख़त्म होने के बाद इसमें मक्का लगायेंगे और मक्का को पकने के बाद गर्मी में लोकी या तोरई की फसल लगायेंगे ताकि बांस व तारो से बनाये गए मचान का फिर से उपयोग कर सके.

इस तरह से पुरे साल में खेती से अच्छा लाभ मिलेगा.

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Plastic Mulching-Video, मल्चिंग फार्मिंग -वीडियो

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8. कृषि यंत्रो पर अनुदान/छूट के लिए आवेदन, Apply for Subsidy on Agricultue Implement., https://youtu.be/sjLRnNMjYnE.,

9. खाद बीज का लाइसेंस.,…………………………………….. https://youtu.be/xHDyCey9Ofg., .

10. फार्मर प्रोडूसर कंपनी, Farmer Producer Company., https://youtu.be/BkkEf7Kzang., .

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1. Agriculture Government Schemes/Krishi ki Sarkari yojanye/ कृषि की सरकारी योजनाये https://www.youtube.com/playlist?list….

2. All Horticulture Videos/fal and sabjiyo ki video/ उधानिकी फल एवं सब्जी उत्पादन की वीडियो., https://www.youtube.com/playlist?list….

3. Play List of All Waste Decomposer Videos/ वेस्ट दी कम्पोजर https://www.youtube.com/playlist?list….

4. Play List of All Videos about Organic Farming/jaivik kheti/ जैविक खेती https://www.youtube.com/playlist?list….

5. Play List of All Videos about crop Production/fasal utpadan/ फसल उत्पादन https://www.youtube.com/playlist?list….

6. Innovative Agriculture/kheti ki Naveen jankari/ खेती की नवीन जानकारी https://www.youtube.com/playlist?list….

7. Animal Husbandry & Veterinary/pashupalan and pashu chikitsa/पशुपालन व पशु चिकित्सा https://www.youtube.com/playlist?list…

Plastic Mulching, Cost 12500/acre-Benefit 2 Lac,

Hello friends My name is Chandra Shekhar Joshi and you are welcome to our website www.kisanhomecart.com.

In this post we will discuss about plastic mulching in which the price of the machine, the price of plastic mulch sheet bundle and the total cost or cost per hectare and its benefits and which crops can be planted in it. its use can earn good returns in farming.

On this website, we write posts related to agriculture. So that the farmers can get new information.

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Due to plastic mulching, the weed outbreak in the crop is less or no weed, because the whole bed is covered so the weed does not grow, if a little bit rises then the plastic does not let it increase so it dies. So, there is no loss or damage in yield due to weed infestation.

Due to mulching, irrigation has to be reduced in the field as the bed   is covered with plastic, the water evaporates less in steam.

Second, during mulching, a line of drip is laid down under plastic sheets, so that irrigation can be done at the time of need. Drip also saves irrigation water. And with drip water, fertigation can be done in the crop, the value of the fertilizers that are dissolved in water is low, they have to be given in small quantities, in drip system the crop uses manure efficiently and the waste will be less.

Insects and diseases are considered less because all crop trees are well sprayed with pesticides.

Price or cost- This machine cost is 45000 rupees. Or the rent mulching machine is 300 rupees per bundle. There are 3 bundles in one beegha or 15 bundles are laid in one hectare. So, rent for one hectare is Rs. 4500.

Price of plastic mulching bundle -One bundle costs Rs 1500-1800 Rs. In one hectare, there are 15 bundles are laid, so the cost of the bundle is up to 22500-2000000 rupees per hectare. So, the total cost – the cost of the machine + bundle price. 4500 + 22500 – 27000 = 27000-31500 rupees per hectare.

You can plant these chilli, tomato, bitter gourd or any other crop through mulching. The crops which has high yield and are much costlier can be grown in this.

Important – The most important thing is that by plastic mulching most of the things get settled. So, the farmer’s attention is more on the crop. Because it saves the cost of irrigation, weed, spray etc. and time spent on it. So, farmers can grow crops easily and can get higher yields.

All this is a new generation’s technology which must be adopted by the farmers.

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Video Link.- https://youtu.be/qkv4W-89DmY

लाभ 2 लाख -लागत 12500 रु/एकड़ प्लास्टिक मल्चिंग फार्मिंग,

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

आज इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे प्लास्टिक मल्चिंग के बारे में – जिसमे मशीन की कीमत, प्लास्टिक मल्च की कीमत और प्रति हेक्टर कुल लागत या खर्चा तथा इसके लाभ और इसकों कौन-कौन सी फसल में लगा सकते है. और इसके उपयोग से खेती बाड़ी में अच्छा लाभ कमा सकते है.

इस वेवसाईट पर हम कृषि, फसल उत्पादन, उधानिकी फसल, पशुपालन, कृषि की सरकारी योजनाओं के बारे में पोस्ट या ब्लॉग लिखते है. ताकि किसान भाइयो को खेती के बारे में नई-नई जानकारी मिलती रहे.

आप सभी किसान भाईयों और दोस्तों से निवेदन है हमारी इस पोस्ट/ब्लॉग को सब्सक्राइब करे व इस जानकारी को अपने दोस्तों में व्हाट्सअप या फेसबुक पर शेयर जरूर करे. और पोस्ट के नीचे नीले रंग का सब्सक्राइब का बटन है, उस में अपना नाम व मेल आई.डी. लिखकर  क्लिक करके हमारी इस वेवसाईट को सब्सक्राइब जरूर करे, ताकि जब भी हम कृषि की तकनिकी या कृषि की योजनाओं के बारे में नई पोस्ट डाले तो आपको नोटिफिकेशन के द्वारा इसकी जानकारी मिल जाये. और अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स है उसमे अपना कमेंट, नाम एवं मेल आई.डी. लिख कर नीले रंग के पोस्ट कमेंट के बटन पर क्लिक करे

सबसे पहले इसकों लगाने के फाएदे – प्लास्टिक मल्चिंग के कारण फसल में खरपतवार का प्रकोप कम होता है या नहीं के बराबर होता है क्योंकि पूरी क्यारी ढकी होने के कारण खरपतवार उगता ही नहीं है अगर थोड़ा बहुत उगता है तो प्लास्टिक के कारण वृद्धि नहीं कर पाता है और मर जाता है. तो खरपतवार के कारण उपज में कोई नुकसान या कमी नहीं होती है.

इसके कारण खेत में सिंचाई कम देनी पड़ती है क्योंकि क्यारी प्लास्टिक से ढकी होती है तो पानी कम भाप बनकर उड़ता है.

दूसरा इसमें मेड बनाकर मल्च बिछाने के समय प्लास्टिक शीट के नीचे ड्रिप की लाइन बिछाई जाती है जिससे आवश्यकता के समय फसल में सिंचाई की जा सके. ड्रिप के कारण भी सिंचाई के पानी की बचत होती है. और ड्रिप के साथ पानी में घुलने वाले खादों से फसल में खाद भी दे सकते है,  पानी में घुलने वालो खादों की कीमत कम रहती है, कम मात्रा में देने पड़ते है, और फसल खाद का अच्छी तरह से उपयोग करती है, वेस्ट कम होता है.

खेत में केवल फसल रहने के कारण कीड़े व रोगों की दवाई कम लगती है व सभी फसल के पेड़ो पर अच्छी तरह से स्प्रे होता है.

कीमत या लागत-

इसकी मशीन की कीमत 45000 रुपये रहती है.

या इस मशीन का प्लास्टिक मल्च बिछाने का किराया 300 रुपये प्रति बण्डल रहता है.

एक बीघा में 3 बण्डल लगते है या एक हेक्टर में 15 बण्डल बिछाये जाते है.

तो एक हेक्टर में 4500 रुपये का किराया लगता है.

प्लास्टिक मल्च के बण्डल की कीमत

इसके एक बण्डल की कीमत 1500-1800 रुपये रहती है.

एक हेक्टर में 15 बण्डल लगते है तो इस प्रकार से 22500 –27000 रुपये तक बण्डल का खर्चा आता है.

तो कुल लागत की – मशीन का किराया + बण्डल की कीमत

4500+22500 – 27000= 27000-31500 रुपये तक प्रति हेक्टर लागत आती है.

इसको आप किसी भी फसल मिर्ची, टमाटर , करेला तरबूज या किसी भी फसल में लगा सकते है. जिनकी कीमत अच्छी रहती है उपज ज्यादा रहती है.

महत्वपूर्ण – सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण ये है की प्लास्टिक मल्च लगाने से सभी चीजे व्यवस्थित हो जाती है. तो किसान का ध्यान फसल पर ज्यादा रहता है. क्योकी इसमें सिंचाई, खरपतवार, स्प्रे आदि की लागत व उनपर लगने वाले समय की बचत होती है. यह सब नए ज़माने की उत्पादन तकनीकी है जो किसानों को जरूर अपनानी चाहिए.

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plastic Mulch. https://www.youtube.com/watch?v=qkv4W-89DmY

YouTube Channel. https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA

Cultivation of Flower-Tuberose & Rose, रजनीगंधा व गुलाब की खेती,

Rose crop Production, Tuberose Crop Production,

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  • आज इस पोस्ट में फूलों की खेती के बारे में जानकारी देंगे.
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  • गुलाब – इसकी रोपाई जुलाई-अगस्त या अक्टूबर -नवम्बर में की जाती है.
  • बीज/ कटिंग की मात्रा – इसमें बुबाई कटिंग से की जाती है.    10 हजार कट्टिंग प्रति हेक्टर बुवाई के लिए चाहिए. 
  • बुवाई की दूरी –  1*1 वर्ग मीटर, 2 * 1 वर्ग मीटर, या .75 * 1-2 मीटर  लाइन से लाइन व पौधे से पौधे की दूरी. 
  • प्रूनिंग – गुलाब के पौधे की पुरानी बढ़ी हुई डालियो को काटा जाता है.यह अक्टूबर से दिसंबर महीने में की जाती है. प्रूनिंग के 45 दिन बाद गुलाब में फूल आते है.
  • खाद व उर्वरक – 10-15 टन गोबर की खाद. और नाइट्रोजन – 90 कि.ग्रा./हे., फॉस्फोरस 60 कि.ग्रा./हे. व पोटाश 60 कि.ग्रा./हेक्टर की दर से उपयोग करते है.
  • रजनीगंधा – इसकी रोपाई मार्च – अप्रैल महिने में की जाती है.
  • बीज/कंद की मात्रा – इसकी बुवाई कंद से की जाती है. एक लाख कंद  एक हेक्टर में बुवाई के लिए पर्याप्त है.
  • दूरी – कंदों की रोपाई 30*30 वर्ग सेंटीमीटर पर की जाती है.
  • अंतिम जुताई के समय में 20-25 टन गोबर की खाद डाली जाती. और नाइट्रोजन 200 कि.ग्रा./हे., फॉस्फोरस 50 कि.ग्रा./हे. व पोटाश 70 कि.ग्रा./हे. की दर से उपयोग करते है.
  • खेती बाड़ी में ज्यादा जानकारी के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करे. https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA

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  • Today I will tell you about the production of flowers.
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  • Rose/Gulab – It is planted in July-August or October-November.
  • It is planted by cutting.
  • Amount of seeds / cutting – 10 thousand cuttings per hectare are required.
  • Sowing distance – 1 * 1 or 1 * 2 or .75 * 2 square meter- line to line and plant to plant.
  • Pruning- Vigorous past season shoots or branches are cut down half of it length in the month of October to December. After 45 days of pruning flowering starts.
  • Compost and fertilizer – 10-15 tons of dung manure.
  • And nitrogen 90 kg/ha, phosphorus 60 kg/ha and potash 60 kg/ha are used for planting.
  • Rajanigandha (Tuberose) – It is transplanted in March – April.
  • Number of seeds / tubers – It is sown from the tubers. To plant one hectare one lakh tubers are enough.
  • Distance – Planting of tubers is done at 30 * 30 square centimetres.
  • During last ploughing 20-25 tonne dung manure was added. Nitrogen – 200 kg/ha., Phosphorus 50 kg/ha. And Potash 70 kg/ha are used.

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फूलों की खेती, Cultivation of Flower crops, Foolo ki Kheti.,

फूलों की खेती , Cultivation of Flower Crops.Production of Flower Plants. Fulo Ki kheti, foolo ka utpadan, Phoolo ki kheti, Phoolo ka utpadan,

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  • आज इस पोस्ट में फूलों की खेती के बारे में जानकारी देंगे.
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  • गुलदाऊदी/सेवंती–
  • इसकी बुवाई – जनवरी फरवरी व जून – जुलाई – अगस्त माह में की जाती है.
  • बीज की मात्रा – आजकल बाजार में हाइब्रिड बीज मिलते है. किसान वहा से खरीद सकते है.
  • इसकी बुवाई के लिए पहले नर्सरी में पौध तैयार की जाती है. इसके बाद पौध की खेत में रोपाई की जाती है.
  • इसको जड़ सकर (root Suckers) व टर्मिनल कटिंग (Turminal Cutting) से भी बुवाई करते है.
  • बुवाई के लिए एक लाख प्रति हेक्टर जड़ सकर या टर्मिनल कटिंग की जरूरत पड़ती है.
  • इसमें विभिन्न रंग के फूल आते है.
  • लगाने की दूरी – 45-50*30 सेमी.
  • खाद व उर्वरक – 10-15 टन गोबर की खाद. और और नाइट्रोजन  125 कि.ग्रा./हे., फॉस्फोरस 120 कि.ग्रा./हे. व पोटाश 25 कि.ग्रा./ हे. दर से उपयोग करते है
  • गेंदा – बुवाई का समय.
  • गर्मी में – जनवरी -फरवरी में लगाते है.         
  • खरीफ/बारिश में – मई – जून में लगाते है.
  • सर्दी/रबी में – सितम्बर – अक्टूबर में लगाते है.
  • बीज की मात्रा – अभी हाइब्रिड बीज आते है. जिसमे में एक बीज की कीमत  एक रुपये से लेकर 1.5 रुपये तक रहती है. और एक हेक्टर में लगभग दस से पंद्रह हजार बीज बुवाई में लगते है. पहले बीजों नर्सरी लगाई जाती है. इसके बाद खेत में पौध की रोपाई की जाती है.
  • बुवाई की दूरी – पौध को 30*30 सेंटीमीटर या 40*40 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाते है.
  • खाद एवं उर्वरक – गोबर की खाद – 30 टन/हे., और नाइट्रोजन – 120 कि.ग्रा./हे., फॉस्फोरस 80 कि.ग्रा./हे. व पोटाश 80 कि.ग्रा./हेक्टर की दर से उपयोग करते है.
  • ग्लाडियोलस – बुवाई का समय – यह जुलाई – नवम्बर महीने में लगाई जाती है.  
  • बीज/कंद की मात्रा- इसकी बुवाई के लिए 150000-180000 ( 1.5 से 1.8 लाख ) कंद/हेक्टर की जरूरत रहती है.                   
  • दूरी – इसकी बुवाई में लाइन से लाइन व पौधे से पौधे से की दूरी 30*20 सेमी. रहती है.                                   
  • खाद – इसमें प्रति हेक्टर 20-25 टन गोबर की खाद प्रयोग की जाती है. और नाइट्रोजन – 60 कि.ग्रा./हे., फॉस्फोरस 40 कि.ग्रा./हे. व पोटाश 40 कि.ग्रा./हेक्टर की दर से उपयोग करते है.                                                         
  • इसके फूल विभिन्न रंगों के आते है.
  • Hello guys, my name is Chandra Shekhar Joshi and you all are welcomed to our website www.kisanhomecart.com.
  • Today in this  I will tell you about the production of flowers.
  • On this website, we write posts or blogs related to agriculture. So that the farmers keep getting information about farming.
  • Please all of you must subscribe to this post/website.
  • There is a blue subscribe button below the post. Write your name and mail id in it. Click on submit button. And subscribe to this website.
  • Whenever we will introduce new posts about agriculture, you will get information through notification.
  • And do share this information on Whats App or Facebook.
  •  And if you want to ask something then there is a comment box below the post. Write comment/your question, name and mail id in it. And click on the post comment button of blue color.
  • Chrysanthemum (Guldaudi) – It is sown in January -February and June-July-August Month.
  • The quantity of seed – Now a days hybrid seeds can be purchased from market.
  • It has flowers of different colors
  • Seedlings are prepared in the nursery for the sowing of it first. After this planting is done in the field.
  • It is also sown by root sucker or terminal cuttings. One lakh root suckers or terminal cutting are used for sowing one hactre area.
  • The distance for sowing – 45-50 * 30 cm
  • Compost and fertilizer – 10-15 tons of dung manure. And nitrogen 125 kg/ha, phosphorus 120 kg/ha and potash 25 kg/ha are used.
  • It has different kinds of flowers.
  • Marigold – sowing time- in Summer –  January-February month.
  • Kharif / rainy season – in June / June month.
  • Winter / Rabi – September-October month.
  • Quantity of Seed – Now hybrid seeds are used in sowing of marigold. The price of one seed range from one rupee to one and half rupees (1-1.5 Rs/seed). And in one hectare, about ten to fifteen thousand seeds are sown.
  • First nursery is planted with seeds. After this planting of seedling is done in the field.
  • Sowing distance – Planting is done at the space of 30 * 30 cm or 40 * 40 cm. away.
  • Fertilizers and manure – Farm yard manure /compost – 30 ton/ha. And nitrogen 120 kg/ha, phosphorus 80 kg/ha and potash 80 kg/ha are used for planting.
  • Gladiolus – It is planted in the month of July – November.
  • Quantity of seeds / tubers – 150000-180000 (1.5 to 1.8 lakh) of tubers / hectare are needed for sowing.
  • Distance – The distance from the plant to the plant and line to line is 20 * 30 cm for sowing.
  • Compost and fertilizer – 20-25 tons of dung manure. And nitrogen 60 kg/ha, phosphorus 60 kg/ha. and potash 40 kg/ha are used.
  • It has different kinds of flowers.

For more information Please Click on this Link.Thanks. ज्यादा जानकारी के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करे.

https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA

Hydroponics and Mushroom Production Training. मशरूम व हाइड्रोपोनिक्स का प्रशिक्षण.

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

आज में आपको बताने वाला हूँ कुछ ट्रेनिंग के बारे में जिसे कोई भी कर सकता है चाहे वो गाँव में रहकर खेती करते है या शहर में रहते हो और उनके पास थोड़ी जगह है तो या वो किराये पर भी ले सकते है. और इस ट्रेनिंग या प्रशिक्षण का खर्चा आदि के बारे में . यह ट्रेनिंग है मशरूम के उत्पादन व हाइड्रोपोनिक्स तरीके से सब्जी उत्पादन के बारे में. अगर किसान खेती बाड़ी के साथ इनका व्यवसाय करता है या इस नए तरीके से खेती करता है तो उनकी आय निश्चित रूप से बढ़ेगी.

हमारी इस वेवसाईट पर हम कृषि से सम्बंधित पोस्ट लिखते है. ताकि किसान भाइयो को खेती के बारे में नई-नई जानकारी मिलती रहे.आप सभी किसान भाईयों और दोस्त, हमारी इस पोस्ट/ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करे व इस जानकारी को अपने व्हाट्सअप या फेसबुक पर शेयर जरूर करे. और पोस्ट के नीचे नीले रंग का सब्सक्राइब का बटन है, तो आप उस में अपना नाम व मेल आई.डी. लिखकर क्लिक करके हमारी इस वेवसाईट को सब्सक्राइब जरूर करे, ताकि जब भी हम कृषि की योजनाओं के बारे में नई पोस्ट डाले तो आपको नोटिफिकेशन के द्वारा इसकी जानकारी मिल जाये. और अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स है उसमे अपना कमेंट, नाम एवं मेल आई.डी. लिख कर नीले रंग के पोस्ट कमेंट के बटन पर क्लिक करे.

सबसे पहले हम बात करते है मशरूम की ट्रेनिंग के बारे में तो इसमें में आपको दो ट्रेनिंग के बारे में बताऊंगा जिसमे से आप कोई सी भी ट्रेनिग कर सकते है. तो इसमें सबसे पहले है इन्दोरी मशरूम के बारे में यह लोग मशरूम का उत्पादन करते है और किसानो को मशरूम के उत्पादन की ट्रेनिंग भी देते है, तो जो लोग मशरूम उत्पादन कर व्यवसाय करना चाहते है वो इसने संपर्क करके आप इनसे अगली ट्रेनिंग की समय स्थान व दिनांक पूछ सकते है और उस समय पर जाकर प्रशिक्षण ले सकते. यह ट्रेनिग में मशरूम उत्पादन व स्पान का उत्पादन (मशरूम का बीज), रोग कीड़ो का नियंत्रण, मशरूम की मार्केटिंग या उसको बेचने की व्यवस्था आदि के बारे में पूरी जानकारी देते है. इनकी फीस ट्रेनिग की अवधि व साथ में देने वाले सामान के अनुसार होती है. इनकी सबसे कम ट्रेनिंग की फीस 500 रुपये प्रति व्यक्ति है. इनसे संपर्क करने के लिए आपको इनके मोबाइल नंबर 7354247521 & 8718996585 पर इनसे बात कर सकते है. यह मध्यप्रदेश में इंदौर में कार्य करते है. तो इनके नजदीकी के जो लोग है वो इनसे संपर्क कर सकते है.

दूसरा है – सोम्य  फूड्स प्राइवेट लिमिटेड – इनका कार्यक्षेत्र देहरादून में है. ये लोग इन हाउस एडवांस मशरूम कल्टीवेशन ट्रेनिंग का आयोजन करते है. यह मशरूम उत्पादन में काफी एडवांस है. यह उतराखंड की कृषि विभाग व वहा की प्रदेश  सरकार के साथ मिलकर युवाओ को ट्रेनिंग देकर उनको व्यवसाय के लिए प्रेरित करते है. इनके संस्थापक व टीम के मेंबर कई बार मशरूम के सम्बन्ध में विदेश भ्रमण भी कर चुके है. व अभी रिसेंटली बाबा रामदेव के साथ पंतजलि के साथ भी मशरूम उत्पादन शुरू किया है.  इनकी अगली ट्रेनिंग 3 -10 जून 2019 को शुरू होगी. जिसकी फीस प्रति व्यक्ति पंद्रह हजार रुपये है. यह साल में कई बार ट्रेनिंग कराते है. तो इनसे संपर्क करने के लिए इस नंबर 7409993860 पर  आप इनसे संपर्क कर सकते है. यह मशरूम के उत्पादन रखरखाब व बेचने तक सभी के बारे में पूरी जानकारी देंगे. ट्रेनिंग की फीस अलग अलग रहती है.

तीसरा है – हाइड्रोपोनिक्स ट्रेनिंग – इसमें केवल पानी से सब्जी का उत्पादन किया जाता है. इसमें सब्जी फसल उगाने के लिए मिटटी का उपयोग नहीं किया जाता है. यह जो ट्रेनिग कराते है उनका नाम है धाकड़ हाई टेक नर्सरी. ये हाइड्रोपोनिक्स की सम्पूर्ण जानकारी देते है. और इनके पास सभी साइज़ में हाइड्रोपोनिक्स के सेट रहते है. जिनको किसान इनसे खरीद सकते है व हाइड्रोपोनिक्स द्वारा सब्जी उगाकर अपना बिज़नस शुरू कर सकते है. इनकी प्रशिक्षण की फीस कम से कम एक हजार रुपये रहती है.

इस प्रकार से कोई भी व्यक्ति इनसे संपर्क करके अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रशिक्षण ले सकता है. इन सभी का फेसबुक आई.डी. है जहा पर आप इंनके बारे में और  डिटेल ले सकते है. Facebook ID – 1. For Mushroom – इन्दोरी मशरूम – Indori mushroom सोम्य फूड्स प्राइवेट लिमिटेड – Soumya Foods Private Limited 2. for Hydroponics -धाकड़ हाई-टेक नर्सरी – Dhakad Hi-Tech Nursery .

Hello friends My name is Chandra Shekhar Joshi and you are welcome to our website www.kisanhomecart.com.

Today, I’m going to tell you about some training that anyone can do, whether they live in the village or they live in the city and they have some space or they can also rent it. And about the cost of this training etc. This training is about production of mushrooms and vegetable production in hydroponics manner. If the farmer does this business with their cultivation or cultivates this new way then his income will definitely increase.

On this website, we write posts related to agriculture. So that the farmers can get new information about farming. All of you must subscribe to this post / blog and share this information on your WhatsApp or Facebook. Below the post there is a blue subscribe box, in that box write your name and email id. Click on the button and subscribe to this website. so that whenever we put new posts about the agriculture, you can get this information through notification. And if you want to ask something then there is a comment box below the post, in this write your comment, name and email id. And send it to me by clicking on the blue comments button.

First of all, we talk about the training of mushrooms. In this I will tell you about two training from which you can do any training. First of all, I will tell you about Indori Mushroom. These people produce mushrooms and also train to the farmers for production of mushroom. People who want to do business mushroom production can contact them. And you can ask them the time and date of the next training. And then go to that training and take training. It gives full information about the production of mushroom, production of spawn (mushroom seeds), control of disease insects, marketing of mushroom or arrangement for selling it in the training. Their fees are in accordance with the duration of the training and the accompanying goods. Their lowest training fee is Rs 500 per person. To get in touch with them, you can talk to them on their mobile number 7354247521 & 8718996585. It works in Indore in Madhya Pradesh. So, people who are close to them can contact them.

The second is – Soumya Foods Pvt. Ltd. – Their area of ​​work is in Dehradun. These people organize In House Advance Mushroom Cultivation Training. This is quite advanced in mushroom production. It trains the youth of Uttarakhand with the agriculture State Department of Uttarakhand and the state government, giving them training and motivating them for business. Their founders and team members have also travelled abroad in relation to mushrooms. And with the Baba Ramdev, he has already started mushroom production. Their next training will begin on June 3-10 June, 2019. The fee of which is fifteen thousand rupees per person. It trains many times a year. You can contact them at this number 7409993860. It will provide complete information about all the mushroom production till production and marketing. Training fees remain different for different trainings.

The third is – Hydroponics training – In this vegetable are produced in water. In this, soil is not used to grow vegetable crops. The name Dhakad High Tech Nursery provides training to farmers about it. It gives complete information of hydroponics. And they have a set of hydroponics in all sizes. farmers can buy them and can start their own business of cultivating vegetable by hydroponics. Their training fees are at least one thousand rupees.

In this way, any person can contact them and can take training to start their own business.

 These are their Facebook IDs. Where you can take more details about trainings. Facebook ID – 1. For Mushroom – Indori mushroom. Soumya Foods Private Limited 2. For Hydroponics – Dhakad Hi-Tech Nursery .

तोरई/गिलकी फसल, चिकनी व धारीवाली तोरई, Cultivation of Torai/ Gilki/ Sponge Gourd and Ridge Gourd.

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

आज इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे तोरई या गिलकी फसल के उत्पादन के बारे में. और इसके बीज की कीमत, बीज दर व उत्पादन से मुनाफा या लाभ के बारे में. इसको इंग्लिश में sponge guard व Ridge Guard भी कहते है क्योकि यह दो तरह की रहती है चिकनी तोरई व धारी वाली तोरई. जिन किसान भाइयो के पास सिंचाई की सुविधा है वो किसान तोरई को गर्मी में उत्पादन कर लाभ कमा सकते है. और बारिश के मौसम में भी लगा सकते है.

हमारी इस वेवसाईट पर हम कृषि से सम्बंधित, फसल उत्पादन, उधानिकी फसल, पशुपालन, कृषि की सरकारी योजनाओं के बारे में पोस्ट या ब्लॉग लिखते है, ताकि किसान भाइयो को खेती के बारे में नई-नई जानकारी मिलती रहे.आप सभी से निवेदन है इस जानकारी को अपने दोस्तों में व्हाट्सअप या फेसबुक पर शेयर जरूर करे. और पोस्ट के नीचे नीले रंग का सब्सक्राइब का बटन है, उस में अपना नाम व मेल आई.डी. लिखकर  क्लिक करके हमारी इस वेवसाईट को सब्सक्राइब जरूर करे, ताकि जब भी हम कृषि के बारे में नई पोस्ट  डाले तो आपको नोटिफिकेशन के द्वारा पोस्ट की जानकारी मिल जाये. और अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स है उसमे अपना कमेंट, नाम एवं मेल आई.डी. लिख कर नीले रंग के पोस्ट कमेंट के बटन पर क्लिक करे.

तोरई के बीज की दर 400 से 600 ग्राम प्रति एकड़ रहती है और बीज की कीमत 4000 से 12000 रुपये प्रति किलोग्राम रहती है. बीज का भाव बीज की गुणवत्ता के अनुसार रहता है, बहुत सारी प्राइवेट कंपनी कलश सीड, बायोसीड, सिंजेंटा, नुन्हेम्स, वी.एन.आर.सीड,अंकुर सीड आदि कंपनी है जो दोनों प्रकार की तोरई का बीज बेचती है. बाजार में बहुत सारी कंपनी का बीज आता है, आप किसी भी कंपनी का बीज खरीद सकते है. यह बीज हाइब्रिड रहता है जिसका उत्पादन अधिक रहता है.

इसकों लगाने के लिए दूरी पौधे से पौधे व लाइन से लाइन अलग अलग रहती है. बारिश के सीजन में दूरी ज्यादा रखते है. व गर्मी में दूरी कम रखी जाती है.1.5 मीटर *1.5 मीटर  या  1.5-2 *1-1.5 मीटर या  1.5-2.5*0.6-1.2  मीटर .

खाद या उर्वरक की मात्रा – 16-24 कि.ग्रा. नाइट्रोजन 12-16 कि.ग्रा. फॉस्फोरस व 12 कि.ग्रा. पोटाश प्रति एकड़. तथा बाद में 10 कि.ग्रा. नाइट्रोजन फूल लगने के समय दिया जाता है. बुवाई का समय – आजकल किसी भी मौसम में तोरई लगाई जा सकती है. गर्मी की बुवाई – जनवरी – फरवरी महीने में. बारिश की बुवाई – जून- जुलाई महीने में की जाती है

इसमें सीधे बुवाई की जाती है ,बीज को मेड नीचे वाले किनारे पर लगा दिया जाता है. वुबाई के 30-35 दिन वाद से फूल आने लगते है एवं 60-75 दिन के फल लगना शुरू हो जाते है. फिर कुछ दिन 4-6 दिन के अंतर पर लगातार फलों तुड़ाई की जाती जाती है. लगभग 2 महीने तक तुड़ाई होती है व उपज प्राप्त की जाती है.

उपज – एक एकड़ में लगभग 8-10 टन या 80-100 क्विंटल या 8000-10000 किलोंग्राम तक तोरई की उपज प्राप्त होती है. अगर 5-10 रुपये प्रति किलों भी बेचते है मंडी में 40-50 हजार रुपये तक आते है. जो सामान्य फसल उत्पादन की तुलना में हमेशा ज्यादा रहते है.गर्मी में तोरई के भाव ज्यादा रहते है व लाभ भी अधिक मिलता है.

ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करके हमारे यूट्यूब चैनल “डिजिटल खेती ” पर विजिट करे. धन्यवाद.

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Cultivation of Torai/ Gilki/ Sponge Gourd and Ridge Gourd.

Hello friends My name is Chandra Shekhar Joshi and welcome to our website www.kisanhomecart.com.

Today in this post we will discuss about the production of Torai or Gilki crop. And about the price of its seed, seed rate and profit of production. It is also called sponge guard and ridge guard in English because it has two types- smooth Torai and striped Torai (Dhari Vali Torai). Farmers who have irrigation facilities, can make the profit by cultivating it in summer. And it can also be planted in the rainy season.

On our website, we write posts or blogs related to agriculture crop production, horticulture crops, animal husbandry, government schemes of agriculture. So that the farmers are getting new information about farming.

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The quantity  of tomato seed is 400 to 600 grams per acre and the cost of seed is 4000 to 12000 rupees per kg. The seed price remains in accordance with the quality of the seed. There are so many private companies include Kalash Seed, Biosseed, Syngenta, Nunhems, VNR Seed, Ankur seed etc which sell  seed of Torai. You can buy seeds of any company. This seed remains hybrid, which produces more.

The distance from the plant to plant and line to line is different for planting it. Keep the distance in the rainy season more. And the distance is kept low in summer. Spacing – Plant to Plant & Row to Row-   1.5 meters * 1.5 meters or 1.5-2 * 1-1.5 meters or 1.5-2.5 * 0.6-1.2 meters.

Quantity of fertilizer or fertilizer – Use 16-24 kg Nitrogen, 12-16 kg Phosphorus and 12 kg Potash per acre And at the time of flowering, 10 kg Nitrogen is given.

Sowing Time – Nowadays, it can be grown in any season. Summer Sowing  – in the month of January – February . Sowing of rainy Season or Kharif  – in month of June-July . The sponge guards are sown directly and the seeds are placed on the bottom edge of the ridge.

Flowers begin from 30-35 days after sowing, and fruiting starts 60-75 days after sowing. Then on the difference of 4-6 days, the fruits are harvested continuously. It is harvested roughly for 2 months.

Yield – Yield of it, Approximately 8-10 ton / acre or 80-100 quintals / acres 8000-10000 Kg / acre. If you sell 5-10 rupees per kilo in the mandi, then it comes to 40-50 thousand rupees. Which is always more than normal crop production. The rate of torai is high in summer. The benefits also get more.

For more Information Please visit our YouTube channel ” Digital Kheti” . Thanks.

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तरबूज की उत्पादन तकनीकि, Cultivation of Watermelon.,

तरबूज की उत्पादन लागत, तरबूज की उत्पादन तकनीकि, Cultivation of Watermelon.

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

आज इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे तरबूज (water melon) फसल के उत्पादन के बारे में. यह मुख्यतया गर्मी की फसल है. यह एक अतिरिक्त आय की तरह है क्योंकि लोग ज्यादातर गर्मी में फसल उत्पादन नहीं करते है, तो जिन किसान भाइयो के पास सिंचाई की सुविधा है वो तरबूज का उत्पादन कर अधिक लाभ कमा सकते है.

हमारी इस वेवसाईट पर हम कृषि से सम्बंधित, फसल उत्पादन, उधानिकी फसल, पशुपालन, कृषि की सरकारी योजनाओं के बारे में पोस्ट या ब्लॉग लिखते है. ताकि किसान भाइयो को खेती के बारे में नई-नई जानकारी मिलती रहे.

आप सभी किसान भाईयों और वीडियो देखने बाले हमारे सभी दोस्तों से निवेदन है हमारी इस पोस्ट/ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करे व इस जानकारी को अपने दोस्तों में व्हाट्सअप या फेसबुक पर शेयर जरूर करे. और पोस्ट के नीचे नीले रंग का सब्सक्राइब का बटन है, तो आप सभी से निवेदन है उस में अपना नाम व मेल आई.डी. लिखकर  क्लिक करके हमारी इस वेवसाईट को सब्सक्राइब जरूर करे, ताकि जब भी हम कृषि की तकनिकी या कृषि की योजनाओं के बारे में नई वीडियो डाले तो आपको नोटिफिकेशन के द्वारा पोस्ट  की जानकारी मिल जाये. और अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स है उसमे अपना कमेंट, नाम एवं मेल आई.डी. लिख कर नीले रंग के पोस्ट कमेंट के बटन पर क्लिक करे.

तरबूज की बीज दर – इसकी बीज दर 250 ग्राम प्रति एकड़ रहती है.  बीज का भाव 35-40 हजार रूपये प्रति किलोग्राम रहता है. हालाँकि सस्ता बीज भी आता है लेकिन उसका उत्पादन बहुत ही कम रहता है. बहुत सारी प्राइवेट सिंजेंटा, कलश सीड, नुन्हेम्स सीड कंपनी आदि, जिनका हाइब्रिड तरबूज का बीज आता है, किसान भाई खाद, बीज बेचने वालों की दुकान से तरबूज का बीज खरीद सकते है.

लगाने की विधि – इसको रिज बेड पध्दति से लगाते है इसमें चार फीट की दूरी पर मेड बनाते है और पौधे से पौधे एक फुट की दूरी रखकर बीज को लगा दिया जाता है.लगाने का समय – जनवरी -फरवरी –मार्च का प्रथम सप्ताह बुवाई के लिय उपयुक्त है.

कुछ लोग तरबूज उगाने के लिए प्लास्टिक मल्च का उपयोग करते है, जिसके अन्दर सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम भी लगा दिया जाता है. मल्च वाली पॉलिथीन में पौधों को बाहर आने के लिए छेद कर दिए जाते है. कुछ लोग एक हिल में दो बीज भी लगाते है ताकि कम से कम एक बीज उग आये और जगह खाली न रहे, नहीं तो उत्पादन में कमी आती है. इसमें  बीज की मात्रा ज्यादा लगती है.प्लास्टिक मल्च के कारण खेत में खरपतवार नहीं उगते है व ड्रिप के कारण आसानी से सिंचाई भी कर सकते है. प्लास्टिक मल्चिंग की लागत प्रति एकड़ 20 हजार रुपये आती है.

पौधों में 30-40 दिन बाद फूल आते है एवं लगभग 70-75 दिन में फल बनता है. जिसकी तुड़ाई करते है और मंडी में थोक में या फुटकर में बेच सकते है.

आय व्यय एक एकड़ में लगभग बीस हजार फल लगते है अगर एक फल का वजन 2 किलो का माने तो लगभग 2 कि.ग्रा. * 20000 फल तो कुल चालीस हजार किलोग्राम तरबूज का उत्पादन होता है एक एकड़ में.और मंडी में 5-10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से थोक में बिकता है और फुटकर में बेंचे तो 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भी बिकता है. इस तरह से किसान तरबूज की खेती से अच्छा लाभ कमा सकते है. अगर पाच रुपये किलो के हिसाब से भी सेल माँने तो  दो लाख होता है और एक लाख का भी खर्चा माने तो लगभग एक लाख की बचत होती है.

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