Grading of Seed,बीज व दानों की ग्रेडिंग,

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों और ब्लॉग पढ़ने वाले साथियों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

स्पाईरल ग्रेडर –आज हम यहाँ चर्चा करेंगे स्पाइरल ग्रेडर के बारे में- इसकी कीमत, इस पर मिलने वाला अनुदान, किस किस फसल में इसका प्रयोग कर सकते है, प्रयोग करने का तरीका, इसके द्वारा ग्रेडिंग के फायदे, फसल की सफाई, बीज व दानों से अन्य फसल के बीज व कूड़े करकट को हटाना आदि के बारे में चर्चा करेंगे.

इस वेवसाईट पर हम कृषि के बारे में पोस्ट या ब्लॉग लिखते है. ताकि किसान भाइयो को जानकारी मिलती रहे. आप सभी किसान भाईयों और दोस्तों से निवेदन है हमारी इस पोस्ट/ब्लॉग को सब्सक्राइब करे व इस जानकारी को अपने दोस्तों में व्हाट्सअप या फेसबुक पर शेयर जरूर करे. पोस्ट के नीचे नीले रंग का सब्सक्राइब का बटन है, उस में अपना नाम व मेल आई.डी. लिखकर  क्लिक करके वेवसाईट को सब्सक्राइब जरूर करे, ताकि जब भी हम कृषि या कृषि की योजनाओं के बारे में नई पोस्ट डाले तो आपको नोटिफिकेशन के द्वारा इसकी जानकारी मिल जाये. और अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स है उसमे अपना कमेंट, नाम एवं मेल आई.डी. लिख कर नीले रंग के पोस्ट कमेंट के बटन पर क्लिक करे

स्पाईरल ग्रेडर – इसका उपयोग बीज को साफ करने के लिए किया जाता है. इसके द्वारा गोल दाने वाले बीजों को साफ किया जाता है. जैसे सोयाबीन, उड़द, अरहर, मूंग और चवला आदि. अभी बुवाई का समय आ रहा है तो किसान भाई इसके द्वारा बीज को साफ करके बोये तो उनकी उपज में वृद्धि होगी व फसल में अन्य फसल के पौधे व खरपतवार कम रहेंगे. इसके द्वारा ग्रेडिंग करने से बीज में उपस्थित सभी टूटे हुए बीज, मिट्टी, कंकड़, अन्य फसल के बीज, खरपतवारों के बीज,पौधों के तने, डाली आदि के टुकड़े, पत्तियों के टुकड़े,दाने के छिलके आदि सभी को साफ किया जा सकता है.

अगर किसान फसल कटाई के बाद मंडी में बेचने से पहले सोयाबीन जैसी गोल दाने वालों फसलों को इस स्पाइरल ग्रेडर से साफ करके मंडी में बेचने ले जायेंगे तो निश्चित रूप से उनकों फसल के ज्यादा भाव मिलेंगे. गाँव में अगर एक किसान के पास भी यह स्पाइरल ग्रेडर है तो गाँव के अन्य किसान भी इसका प्रयोग करके अपनी फसल की ग्रेडिंग कर सकते है.

इसकी कीमत 5-6 हजार रुपये रहती है. कुछ राज्यों में कृषि विभाग द्वारा इस पर अनुदान दिया जाता है और इसकी कीमत 1200-1500 रुपये पड़ती है. इस पर लगभग 70-80 प्रतिशत तक अनुदान या छूट मिलती है. इसके लिए अपने जिले में कृषि विभाग में संपर्क करे. इसके द्वारा एक घंटे में लगभग 4-5 क्विंटल तक बीज/दानों की ग्रेडिंग की जा सकती है. और दो मजदूर की एक दिन लागत 500 रुपये रहती है इस तरह से आठ घंटे में लगभग 32-40 क्विंटल तक ग्रेडिंग कर सकते है और ग्रेडिंग की प्रति क्विंटल लागत 12-15 रुपये आती है. और ग्रेडिंग वाली फसल बिना ग्रेडिंग की गई फसल की तुलना में 100-350 रुपये प्रति कुन्तल ज्यादा भाव में बिकती है. तो किसान को बहुत ही ज्यादा लाभ होता है.

ऊपर से जब बीजों या दानों को डालते है तो ये पुरे स्पाइरल मशीन में घूमते है और नीचे की तरफ लुढ़कते है, और एक तरफ साफ दाने व दूसरी तरफ से कचरा आदि बाहर निकलता है. इसको चलाने के लिए किसी इलेक्ट्रिक या मोटर ट्रेक्टर आदि की जरूरत नहीं पड़ती है. नाही किसी मजदूर आदि को इसे चलाना पड़ता है. बस इसकों सीधा खड़ा करके ऊपर से दानों को डालते रहे और नीचे टोकरी लगा कर साफ दानों को वापिस से बोरों में भरते रहे व कचरे आदि को भी टोकरी में भरकर एक तरफ डाल दे.

इस तरह से किसान भाई बीज व फसल की सफाई व ग्रेडिंग कर सकते है. व फसल उत्पादन में ज्यादा से ज्यादा लाभ ले सकते है. दोस्तों इस जानकारी/पोस्ट को शेयर करना न भूले साथ ही वेवसाईट को सब्सक्राइब करके आपका सहयोग व स्नेह बनाये रखे. धन्यवाद. सभी को शुभकामनाये.

Seed Certification

Seed Certification or Seed  Production

In this high – quality certified seed is prepared for high crop production.

What is seed-

  • It is highly productive.
  • Which is unaltered
  • Which has high germination percentage.
  • Which is genetically pure.

Types of seed-

  • Nucleus Seed
  • Breeder Seed.
  • Foundation Seed.
  • Certified Seed.
  • Hybrid Seed.
  • Truthful level seed (TL)
  • What kind of seed can be produced-
  • Hybrid Seed- this kind of seed can be produced by highly skilled persons or scientists. This can also be produced by the farmers but after a long training and practical experience.
  • Generally Certified and foundation seeds are produced by the farmers.
  • Production of such kind of seeds is very easy to farmers.
  • Mostly self-pollinated crop like wheat, chickpea, soybean, lentil, arhar (Pigeon Pea ) etc.
  • Farmers can produce only seed of notified varieties of these crops.
  • Farmers can search online, notified varieties of different crops.
  • How certified seed can be produced by farmers-
  • Farmers can produce certified seed individually or forming an institutional agency viz.
  • Personnel.
  • Proprietor farm.
  • Farmer Groups
  • Society.
  • Farmer Producer Company.
  • Private company.
  • How seed production is done-
  • Contact agriculture department of own district.
  • Contact Deputy Director Agriculture of Agriculture Department of own District.
  • Or contact seed certification officer of your district.
  • Details of seed certification officer can be found on websites.
  • Each state has his own certification agency website. So, search it online or google.
  • Documents for seed Certification-
  • Khata Khasra (B-I)
  • Photo of farmer
  • Seed license from agriculture department.
  • Agreement letter with seed grader plant. (Mostly each district or nearby district has grading plans so farmers can search details of grading plant of their district on website of state seed certification agency. 
  • Application-
  • Fill the certification application completely
  • Deposit the fee of seed certification which is 800-1500 Rs. /hectare
  • Apply for certification through seed certification officers of your district.
  • Last Date for application-
  • Last date is 30 June to 15 July in case of khar  if crops season.
  • Last date is 30 October to 30 December in case of Rabi Crops.
  • Sometimes date may be changed according the state or crops seasons.
  • Seed Production-
  •  For the certified seed production, purchase foundation seed from the reliable of government agency with bill. If farmers do not know about the agency, they can take help from seed certification officer.
  • The foundation seed selling agency – Krishi vigyan kendre, government agriculture farms, old or already exists societies, state certified seed production agency, national seed corporations etc. can be found in their district.
  • Now sowing of this seed is done as the crop is sown.
  • Inspection-
  • Seed certification officer comes 2-4 times to inspect the crop. He comes before the sowing, at the time of standing crop and at grading of seed.
  • Then he takes sample of seed and send it to testing laboratory for germination test, moisture test and purity test etc.
  • If the produced seed follow the seed certification standard or requirement then certification tag is provided to the seed producers.
  • The producer can pack the seed and can sell it to other farmers or agency.
  • Benefit of Seed Production-
  • Farmers can produce seed easily.
  • This is just like crop production, in this some government rule and regulation have to follow only.
  • Seed is very costly, so reduce the cost of cultivation and to do the business of seed, farmers can do seed production.
  • When farmers are the producers and the consumers as well than why farmers should not grow their own seed. Please Thinks about it.
  • Seed Certification websites of some States-
  • For Madhya Pradesh state-
  • http://mpssca.org/
  • For Rajasthan-
  • http://rssopca.in/
  • For Uttar Pradesh-
  • http://upseedcert.upsdc.gov.in/Index.aspx.
  • For Hariyana-
  • http://hssca.org.in.
  • farmers can search for their on state.
  • for more information see the following video –
  • प्रमाणित बीजों की उपार्जन दर व उत्पादन पर अनुदान, Procurement Rate of Certified Seed
  • https://youtu.be/8-rBlxQE_-g
  • प्रमाणित बीजों पर अनुदान , Seed Subsidy and Rate of Seed-
  • https://youtu.be/Hf1M3u7VOrQ
  • Farmer Producer Company-
  • https://youtu.be/wCGCoPiyK_8
  • License of Fertilizer, Seed & Pesticides-
  • https://youtu.be/O76-B3obmTY

प्रमाणित बीज उत्पादन

बीज उत्पादन

  • बीज कृषि में एक मुख्य आदान है.
  • अच्छी बीज बोयेंगे तो अच्छा उत्पादन होगा.
  • बीज उत्पादन- बीज व्यवसाय
  • सोसाइटी का निर्माण
  • अपने गाँव या समीप के गाँव के 21 या उससे अधिक लोगो का समूह बनाये.
  • उनमे से अध्यक्ष व सचिव व संस्था का कोई नाम चुनकर, अपने जिले में सोसाइटी का पंजीयन कराये.
  • संस्था का पंजीयन
  • अपने जिले में किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट(सी.ए.) से मिले.
  • व आपकी संस्था की स्थापना का पंजियन जिले/पंचायत में करवाए .
  • सी.ए. आपका जी.एस.टी. में भी पंजीयन करवा देंगे.
  • संस्था का करेंट अकाउंट खुलवाये
  • लाइसेंस 
  • अपने ब्लॉक में कृषि अधिकारी से बीज का लाइसेंस बनवाये.
  • इसके बाद अपने जिले में बीज की ग्रेडिंग करने वाले तलाशे.
  • उससे अग्रीमेंट करे अव आप बीज उत्पादन के लिए तैयार है.
  • बीज उत्पादन मात्रा
  • कितनी बीज के मात्र आपको लगेगी, पैसा व साधन कितने उपलब्ध है उस आधार पर बीज उत्पादन की मात्रा निश्चित करे.
  • प्रमाणीकरण पंजीयन
  • अपने जिले के बीज प्रमाणीकरण अधिकारी से मिले.
  • उसके बताये अनुसार जमीन के कागज, पहचान पत्र व प्रमाणीकरण शुल्क देकर बीज उत्पादन का पंजीयन करे.
  • बीज निरीक्षक
  • किसी ज्ञात जगह से आधार बीज खरीदकर बुवाई करे जब आप बीज की बुवाई के बाद तो तीन चार बार बीज प्रमाणीकरण अधिकारी फसल का निरिक्षण करने आएगा.
  • उसके दयारा बताये गए निर्देशों का पालन करे ताकि बीज उत्पादन सफल रहे..
  • फसल की कटाई, थ्रेशिंग, भण्डारण, व पैकिंग
  • फसल कटाई करके भण्डारण करे.
  • उसके बाद बीज निरीक्षक/बीज प्रमाणीकरण अधिकारी बीज के सैंपल ले जायेगा
  • व उसमे नमी, शुद्धता आदि की जाँच करके रिपोर्ट तैयार करेंगा.
  • ग्रेडिंग   
  • बुवाई से कुछ महीने पूर्व उत्पादित बीज को ग्रेडिंग प्लांट पर ले जाये व बीज की ग्रेडिंग करवाए इसके बाद निर्धारित मात्रा नये बेगो में भरकर प्रमाणित बीज का टेग लगाकर पैकिंग करे.
  • अब प्रमाणित बीज बेंचने के लिए तैयार है.
  • बीज को बेचना
  • अपने गाँव या आसपास के गाँव में बीज को बेंचे, कृषि विभाग को दे सकते है. खुद की दुकान लगाकर बेंच सकते है.
  • प्रमाणित बीज    
  • बीज उत्पादन पर सरकार अनुदान भी देती है इसका लाभ लेने के लिए कृषि विभाग में संपर्क करे.
  • कुछ सालो बाद जब आप ज्यादा मात्रा में बीज उत्पादन करना चाहते है तो बीज निगम या किसी सरकारी बीज वितरण/उत्पादन संस्था से सम्पर्क कर सकते है वो हर साल अपने लिए बड़ी मात्रा में बीज उत्पादन करने के लिए आवेदन करवाते है. ये संस्थाये बीज उत्पादन के लिए अग्रिम राशी भी उपलब्ध भी कराती है इसके लिए आपकी संस्था/सोसाइटी थोड़ी पुरानी होनी चाहिए, उसका रिकॉर्ड अच्छा हो, ज्यादा मात्रा में बीज उत्पादन करने की क्षमता होनी चाहिए, तथा लगातार इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना चाहिए.
  • बीज उत्पादन के लिए ऋण     
  • जब सोसाइटी बीज को किसी पंजीकृत गोडाउन में रखती है तो उसकी पाबती पर बैंक बड़ी ही आसानी से लोन संस्था को दे देगी.
  • जब संस्था को तीन साल से ज्यादा हो जाये व आप संस्था का लगातार इनकम टैक्स रिटर्न भरते है तो बैंक आपको आसानी से लोन से देंगी.

किसानों के लिए प्रमाणित बीजों का भाव/विक्रय दर, बीजों पर अनुदान

 सरकार/कृषि विभाग से निर्धारित अनुदान की दर व बीजों की विक्रय दर
किसानों के लिए प्रमाणित बीजों का भाव, बीजों की विक्रय दर, प्रमाणित बीजों पर अनुदान
किसानों के लिए प्रमाणित बीजों के फाइनल रेट-
क्र.स. फसल का नाम संस्था की बीज विक्रय दर अनुदान /छूट कृषको के लिए बीज की विक्रय दर
गेंहू फसल का बीज
1 गेंहू ऊँची जाति/किस्म ( 10 वर्ष तक की अवधि ) 3750 750 3000
2 गेंहू ऊँची जाति/किस्म ( 10 वर्ष से अधिक अवधि ) 3700 100 3600
3 गेंहू बोनी जाति/किस्म ( 10 वर्ष तक की अवधि ) 3550 750 2800
4 गेंहू बोनी जाति/किस्म  ( 10 वर्ष से अधिक अवधि ) 3300 100 3200
चना फसल का बीज
1 चना  ( 10 वर्ष तक  ) 6300 1300 5000
2 चना  ( 10 वर्ष से अधिक ) 6300 500 5800
3 चना काबुली  ( 10 वर्ष तक  ) 6700 1300 5400
4 चना काबुली ( 10 वर्ष से अधिक ) 6500 500 6000
मटर फसल का बीज
1 मटर  ( 10 वर्ष तक  ) 4000 2000 2000
2 मटर  ( 10 वर्ष से अधिक ) 3800 300 3500
3 मटर अर्किल समस्त किस्मे 4400 00 4400
मसूर फसल का बीज
1 मसूर  ( 10 वर्ष तक  ) 6400 3200 3200
2 मसूर ( 10 वर्ष से अधिक ) 5900 2500 3400
सरसों फसल का बीज
1 सरसों  ( 15 वर्ष तक  ) 6000 3000 3000
2 सरसों ( 15 वर्ष से अधिक ) 6000 00 6000
अलसी फसल का बीज
1 अलसी  ( 15 वर्ष तक  ) 5800 2900 2900
2 अलसी  ( 15 वर्ष से अधिक ) 5500 00 5500
जौ फसल का बीज
1 जौ  ( 10 वर्ष तक  ) 2900 800 2100
2 जौ ( 10 वर्ष से अधिक ) 2900 400 2500
मूंग फसल का बीज
1 मूंग  ( 10 वर्ष तक  ) 6600 3300 3300
2 मूंग ( 10 वर्ष से अधिक ) 6500 2500 4000
  • संस्था द्वारा बीज विक्रय दर पर किसानों को बेचा जायेगा.
  • एवं अनुदान की राशि सीधे किसानों के खाते में आयेगी. उदाहरण के लिए  मूंग की संस्था की बीज विक्रय दर है 6600  रुपये/क्विंटल तो किसान को  6600  रुपये/क्विंटल के भाव से पूरा पैसा देना है अनुदान  की राशि 3300 रुपये/क्विंटल की दर से किसानों के खाते में वापिस आयेगा.
  • इसके लिए किसान अपना आधार नंबर, बैंक खाता नंबर , बैंक का आई.ऍफ़.सी.कोड., खाता खसरा आदि जहा से बीज खरीद रहे है उस संस्था सोसाइटी या प्रमाणित बीज विक्रय केंद पर जमा कराये.
  • ज्यादा जानकारी के लिए कृषि विभाग या अपनी सोसाइटी में संपर्क करे.
  • तथा किसान अपने नजदीकि की सोसाइटी या सरकारी बीज प्रमाणित विक्रेता से ही बीज खरीदे.
  • ये मध्यप्रदेश राज्य के लिए है, अन्य राज्यों के किसान अपने जिले में कृषि विभाग में संपर्क करे.
  • यह योजना सभी राज्यों में है अत किसान अपने राज्य में कृषि विभाग या अपनी नजदीकि की सहकारी समिति/सोसाइटी में संपर्क करे.
  • खेती बाड़ी, पशुपालन, विभाग की योजनओं आदि के बारे में यूट्यूब पर खोजे डिजिटल खेती  Digital Kheti या नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करे.
  • कृपया डिजिटल खेती Digital Kheti चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे.
  • https://www.youtube.com/channel/UC8y4ihEQyARwqQMGbzR4ISA.

प्रमाणित बीजों की उपार्जन अथवा खरीदी दर, बीज उत्पादन पर अनुदान

राज्य शासन कृषि मंत्रालय/कृषि विभाग द्वारा निर्धारित प्रमाणित बीजों की उपार्जन दर.

प्रमाणित बीजों की उपार्जन अथवा खरीदी दर, बीज उत्पादन पर अनुदान.

रबी 2018-19 में किसानों के लिए प्रमाणित बीजों की उपार्जन अथवा खरीदी  दर.

  • जो किसान प्रमाणित बीज उत्पादन करते है, संस्था के माध्यम से उनकों बीज उत्पादन करने पर खरीदी या उपार्जन की दर निर्धारित की गई है, इसमें किसानो को संस्था से बीज खरीद के उनकें बीज उत्पादन कार्यक्रम के लिए बीज उत्पादन करना पड़ता है, जब फसल तैयार हो जाती है तो कटाई व थ्रेशिंग के बाद इस दर से संस्था किसानों से वापिस बीज की खरीदी करती है. किसान के खेत पर बीज प्रमाणीकरण अधिकारी निरीक्षण  के लिए आता है व किसानों को संस्था के अनुसार अन्य काम भी उनकी देखरेख में करने पड़ते है ताकि प्रमाणित बीज उत्पादन की क्रिया को पूरा किया जा सके.

प्रमाणित बीजों की उपार्जन दर,

क्र.स. फसल का नाम कृषकों के लिए

उपार्जन दरे

1 गेंहू ऊँची जाति/किस्म (10 वर्ष तक की अवधि) 2200
2 गेंहू ऊँची जाति/किस्म (10 वर्ष से अधिक अवधि) 2200
3 गेंहू बोनी जाति/किस्म (10 वर्ष तक की अवधि) 2000
4 गेंहू बोनी जाति/किस्म(10 वर्ष से अधिक अवधि) 2000
5 चना (10 वर्ष तक) 4600
6 चना (10 वर्ष से अधिक) 4600
7 चना काबुली (10 वर्ष तक ) 5100
8 चना काबुली (10 वर्ष से अधिक) 5100
9 मटर (10 वर्ष तक ) 2300
10 मटर (10 वर्ष से अधिक) 2300
11 मटर अर्किल समस्त किस्मे 2800
12 मसूर (10 वर्ष तक) 4500
13 मसूर (10 वर्ष से अधिक) 4500
14 सरसों (15 वर्ष तक ) 4150
15 सरसों (15 वर्ष से अधिक) 4150
16 अलसी (15 वर्ष तक ) 4100
17 अलसी (15 वर्ष से अधि ) 4100
18 जौ (10 वर्ष तक ) 1500
19 जौ (10 वर्ष से अधिक) 1500
20 मूंग (10 वर्ष तक ) 5700
21 मूंग  (10 वर्ष से अधिक) 5700

इस तालिका में दर्शाई गई दरों के अनुसार बीज उपार्जित किये गए प्रमाणित बीजों का भुगतान संस्था द्वारा किया जायेगा. इसमें संस्था द्वारा दिए जाने वाले बोनस की राशि भी सम्मिलित है.

प्रमाणित बीज उत्पादन पर किसानों को अनुदान-
क्र.स. फसल का नाम बीज उत्पादन अनुदान (रुपये/क्विंटल अनुदान योजना
1 चना (10 वर्ष तक की अवधि ) 1000 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन.एफ.एस.एम.- दलहन)
2 मसूर (10 वर्ष तक की अवधि) 3200 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन.एफ.एस.एम.- दलहन)
3 सरसों (10 वर्ष तक की अवधि ) 1000 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
4  अलसी (10 वर्ष तक की अवधि ) 2500 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
आधार बीज उत्पादन पर किसानों को अनुदान-
क्र.स. फसल का नाम बीज उत्पादन अनुदान (रुपये/क्विंटल योजना का नाम जिससे अनुदान दिया जाता है.
1 सरसों  (10 वर्ष तक की अवधि ) 500 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
2 अलसी  (10 वर्ष तक की अवधि ) 2500 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
  • प्रमाणित/आधार बीज उत्पादन अनुदान में से 75 % राशि बीज उत्पादक कृषक को व शेष 25 % राशि प्रदेश की बीज उत्पादक संस्थाओ मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक एव वितरण संघ,सोपा, फार्मर प्रोडूसर कंपनी राज्य बीज एवं फार्म विकास, शासकीय कृषि प्रक्षेत्र आदि को दिया जायेगा.
  • प्रमाणित व आधार बीज के उत्पादन पर अनुदान के लिए किसान अपना आधार नंबर बैंक खाता, बैंक का आई.ऍफ़.सी.कोड., खाता खसरा आदि  उस संस्था, सोसाइटी या प्रमाणित बीज उत्पादन केंद पर जमा कराये जिस संस्था के अन्दर वो लोग बीज उत्पादन कर रहे है.
  • ज्यादा जानकारी के लिए कृषि विभाग या बीज उत्पादन कराने वाले संस्थान में संपर्क करे.
  • ये मध्यप्रदेश राज्य के लिए है, अन्य राज्यों के किसान अपने जिले में कृषि विभाग में संपर्क करे. सभी राज्यों में हर मौसम रबी व खरीफ में बीज उत्पादन कार्यक्रम चलता है. अत किसान भाई इसमें भाग ले सकते है व बीज उत्पादन कर सकते है, व प्रमाणित व आधार बीज उत्पादन करके बेंच सकते है. बीज उत्पादन करने से किसानों को खेती में ज्यादा लाभ होगा. बीज उत्पादन की जानकारी के लिए इसी वेवसाइट पर इससे सम्बंधित लेख पढ़े या हमारे यूट्यूब चैनल डिजिटल खेती Digital Kheti पर भी विडियो देख सकते है.
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बीजों पर अनुदान , Subsidy on Seeds Rabi 2018.

बीजों पर सरकार/कृषि विभाग से निर्धारित अनुदान की दर

बीज वितरण अनुदान रुपये/क्विंटल

  • 1. फसल का नाम – गेंहू
  • A. ऊँची जाति/किस्म (10 वर्ष तक की अवधि)
  •      बीज खरीदने पर अनुदान  – 750 रुपये/क्विंटल
  • B. ऊँची जाति/किस्म (10 वर्ष से अधिक अवधि)
  •      बीज खरीदने पर अनुदान  – 100 रुपये/क्विंटल
  • C. बोनी जाति/किस्म (10 वर्ष तक की अवधि)
  •      अनुदान  – 750 रुपये/क्विंटल.
  • D. बोनी जाति/किस्म (10 वर्ष से अधिक अवधि)
  •      अनुदान  – 100 रुपये/क्विंटल.
  • गेहू में अनुदान की राशि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन.एफ.एस.एम.) व राष्ट्रिय कृषि विकास योजना (आर.के.वी.वाई.) से किसानों को दी जाती है.
  • 2. फसल का नाम – चना
  • A. जाति/किस्म//वैरायटी – (10 वर्ष तक की अवधि)
  •      बीज खरीदने पर अनुदान  – 1300 रुपये/क्विंटल
  • B. जाति/किस्म//वैरायटी (10 वर्ष से अधिक अवधि)
  •     बीज खरीदने पर अनुदान    – 500 रुपये/क्विंटल
  • 3 फसल का नाम – चना काबुली
  • A. जाति/किस्म//वैरायटी – (10 वर्ष तक की अवधि)
  •      बीज खरीदने पर अनुदान  – 1300 रुपये/क्विंटल
  • B. जाति/किस्म//वैरायटी – (10 वर्ष से अधिक अवधि)
  •      बीज खरीदने पर अनुदान  – 500 रुपये/क्विंटल
  • चना/काबुली चना में अनुदान/छूट की राशि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन.एफ.एस.एम.- दलहन ) से किसानों को दी जाएगी.
  • 4 फसल का नाम –  A. मटर (10 वर्ष तक)
  •    बीज खरीदने पर अनुदान  – 2000 रुपये/क्विंटल
  • B. फसल का नाम – मटर ( 10 वर्ष से अधिक )
  •      बीज खरीदने पर अनुदान – 300 रुपये/क्विंटल
  • C. फसल का नाम – मटर अर्किल समस्त किस्मे
  • अनुदान – 00/00 रुपये/क्विंटल
  • कोई अनुदान नहीं है
  • मटर में अनुदान की राशि राष्ट्रिय कृषि विकास योजना (आर.के.वी.वाई.) से किसानों को दी जाएगी.
  • 5. फसल का नाम – A. मसूर (10 वर्ष तक )
  •     अनुदान  – 3200 रुपये/क्विंटल
  • B. फसल का नाम – मसूर (10 वर्ष से अधिक)
  •      अनुदान – 2500 रुपये/क्विंटल
  • मसूर में अनुदान/छूट की राशि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन.एफ.एस.एम.- दलहन ) से किसानों को दी जाएगी.
  • 6. फसल का नाम – A. सरसों (15 वर्ष तक)
  •    अनुदान – 3000 रुपये/क्विंटल
  • B. फसल का नाम – सरसों (15 वर्ष से अधिक)
  •      अनुदान – 00/00 रुपये/क्विंटल, यानि अनुदान नहीं है
  • सरसों में अनुदान/छूट की राशि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन.एफ.एस.एम.- ओ.एस.ओ.पी.) से किसानों को दी जाएगी.
  • 7. फसल का नाम – A. अलसी (15 वर्ष तक)
  •     अनुदान – 2900 रुपये/क्विंटल
  • B. फसल का नाम – अलसी (15 वर्ष से अधिक)
  •     अनुदान – 00/00 रुपये/क्विंटल, यानि अनुदान नहीं है
  • अलसी में अनुदान/छूट की राशि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन.एफ.एस.एम.- ओ.एस.ओ.पी.) से किसानों को दी जाएगी.
  • 8. फसल का नाम –A. जौ (10 वर्ष तक )
  •      अनुदान – 800 रुपये/क्विंटल
  • B. फसल का नाम – जौ (10 वर्ष से अधिक)
  •     अनुदान – 400 रुपये/क्विंटल,
  • जौ में अनुदान/छूट की राशि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन.एफ.एस.एम.- सी.सी.) से किसानों को दी जाएगी.
  • 9. फसल का नाम – A. मूंग (10 वर्ष तक)
  •     अनुदान – 3300 रुपये/क्विंटल
  • B. फसल का नाम – मूंग (10 वर्ष से अधिक)
  •     अनुदान – 2500 रुपये/क्विंटल,
  • मूंग में अनुदान/छूट की राशि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एन.एफ.एस.एम.- दलहन) से किसानों को दी जाएगी.
  • संस्था द्वारा बीज विक्रय दर पर बीज किसानों को बेचा जायेगा.
  • एवं अनुदान की राशि सीधे किसानों के खाते में आयेगी. उदाहरण के लिए गेहू की संस्था की बीज विक्रय दर है 3750 रुपये/क्विंटल तो किसान को 3750 रुपये/क्विंटल के भाव से पूरा पैसा देना है अनुदान 750 रुपये/क्विंटल की दर से किसानों के खाते में आयेगा.
  • इसके लिए किसान अपना आधार नंबर, बैंक खाता, बैंक का आई.ऍफ़.सी.कोड., खाता खसरा आदि जहा से बीज खरीद रहे है उस संस्था सोसाइटी या प्रमाणित बीज विक्रय केंद पर जमा कराये. ताकि अनुदान किसान के खाते में आ सके.
  • ज्यादा जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि विभाग या अपने नजदीकि की सोसाइटी में संपर्क करे.
  • तथा किसान अपने नजदीकि की सोसाइटी या सरकारी बीज प्रमाणित संस्था से ही बीज खरीदे.
  • ये अनुदान/छूट मध्यप्रदेश राज्य के लिए है.
  • यह योजना सभी राज्यों में है अत अन्य राज्यों के किसान अपने जिले में कृषि विभाग में संपर्क करे.
  • 10 वर्ष तक की अवधि की किस्म या वैरायटी का मतलब है की यह वैरायटी वैज्ञानिकों द्वारा विकसित करने में अभी से 10 साल से कम समय हुआ हुआ है, अभी 2018 चल रहा है तो ऐसी किस्म वर्ष 2008 में या 2008 के बाद विकसित हुई है. यानि इस किस्म को विकसित हुए 10 साल से कम का समय हुआ है.
  • 10 वर्ष से अधिक अवधि की किस्म या वैरायटी का मतलब है की यह वैरायटी वैज्ञानिकों द्वारा विकसित करने में अभी से 10 साल से अधिक समय हुआ हुआ है, अभी 2018 चल रहा है तो ऐसी किस्म वर्ष 2008 में या 2008 के पहले विकसित हुई है. यानि इस किस्म को विकसित हुए 10 साल से अधिक का समय हो गया है.
  • ऐसा ही 15 वर्ष तक की अवधि  या 15 वर्ष से अधिक अवधि की किस्मों के वारे में समझा जाये.
  • धन्यवाद, 

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किसान उत्पादक कंपनी

फार्मर्स प्रोडूसर कंपनी

  • यह कम्पनी प्राथमिक उत्पादको दयारा बनाई जाती. इस कंपनी को फसल, सब्जी, फल, दूध, मछली, मुर्गी आदि उत्पादन करने वाले किसान आसानी से बना सकते है.
  • यह एक वैधानिक संस्था है जिसमे इसके सदस्यों को ही इससे लाभ या बचत का फायदा मिलता है. इस लाभ को वो लोग आपस  में बाट सकते है और अपने लिए एक नया व ज्यादा लाभ या कमाई का स्रोत पैदा कर सकते है.
  • बीज उत्पादक कंपनी के फायदे- जब अकेला किसान अपनी कम फसल को बेचता है तो उसको लाभ कम मिलता है. अगर किसान कम्पनी बनाकर कही बाहर या ऊंचे भाव वाली मंडी में बेचते है, तो उनको लाभ ज्यादा होता है. सभी किसान फसल उत्पादन करते है यदि ये लोग कंपनी के दयारा बीज उत्पादन या फल सब्जी, दूध आदि की प्रोसेसिंग करते है, तो उनको लाभ ज्यादा मिलता है. किसान कम्पनी के माध्यम से बीज, खाद, दवाई आदि का लाइसेंस लेकर, इकठठा खरीदकर आपस में सदस्य या गाँव के किसानो को बेंचते है तो उनको कीमत कम लगती. अगर कोई नये यंत्र या यंत्रो को खरीदकर किराये पर देने से किसानों की उपज बढेंगी. नयी फसल या तरीका को अपनाने व बाद में उपज को बेंचने में भी किसान को सुविधा रहती है.
  • किसान उत्पादक कंपनी कैसे बनाए
  • कंपनी बनाने के लिए कुछ किसान जो थोड़े पढ़े लिखे हो वो लोग अपने गाँव या समीप के गाँव के लोगो का समूह बनाये. इन लोगो के साथ  दो या तीनबार  बैठक करे व उनसे कंपनी बनाने व उसके फायदों के बारे में चर्चा करे. कंपनी बनाने के लिए 33 % से अधिक सीमांत ( जिनके पास एक हेक्टर से कम जमीन है) व लघु (जिनके पास 1-2 हेक्टर जमीन हो) किसान कंपनी के सदस्य होने चाहिए ताकि कंपनी को सरकार से मिलने वाली छूट का लाभ भी मिल जाये. इसमें ध्यान ये रखे की किसान समान सोच व रूचि वाले होने चाहिए तथा उनके अन्दर अपनी खेती से ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने की इच्छा/चाहत हो, ताकि कंपनी को आसानी से चलाया जा सके.
  • अब उस गाँव के ग्रुप में से ही एक आदमी का चुनाव करे जो किसानों की सामान्य जानकारी इकठठा कर सके व बाद में कोई सूचना या जानकारी आये तो लोगो तक उसको पहुंचा सके.
  • बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर का चुनाव – बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर का चुनाव कंपनी में शामिल होने वाले लोगो में से ही सर्वसम्मति से करते है, यह थोड़े पढ़े लिखे व कम्पनी को चलाने में सक्षम हो. बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर की संख्या 5 से लेकर 15 तक हो सकती है. इस बोर्ड में एक या दो महिला भी होनी चाहिए.
  • अध्यक्ष व सचिव का चुनाव- चुने गए बोर्ड डायरेक्टर में से अध्यक्ष व सचिव का चुनाव करते है. ये लोग हस्थाक्षरी ऑथोरिटी होते है व बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर के साथ मिल कर कम्पनी चलते है.
  • कंपनी के सदस्य- कोई भी प्राथमिक उत्पादक कंपनी का मेम्बर हो सकता है. एक घर से केवल एक ही आदमी कंपनी का  सदस्य हो सकता है. कंपनी में जितने ज्यादा सदस्य होंगे उतना अच्छा है. शुरूआत में 250-500 मेम्बर से कंपनी शुरू कर सकते है. बाद में सदस्य संख्या बढ़ाते रहे. एक कंपनी में कम से कम 10 सदस्य हो सकते है तथा अधिकतम सदस्यों की कोई सीमा नहीं है.
  • कंपनी का पंजीयन- अपनी जान पहचान या अपने जिले में किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सी.ए.) तलाशे. यह सी.ए. कंपनी का पंजीयन करवा देंगे.
  • कागजात- सी.ए. को प्राथमिक उत्पादक/ किसानों की सूची जो कंपनी में सदस्य बनना चाहते है, बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर व अध्यक्ष, सचिव का  नाम, पेन कार्ड, आधार नंबर, पता आदि के कागजात उपलब्ध कराये ताकि वह कंपनी का पंजीयन करा सके.
  • पंजीयन फीस – कंपनी के पंजीयन में लगभग 40000 (चालीस हजार रुपये) रुपये का खर्चा आता है, इसमें पंजीयन की फीस, सी.ए. की  फीस व स्टाम्प आदि के खर्चे आते  है.
  • कंपनी बनाते समय कंपनी के पास 100000 (एक लाख रुपये) रुपये होने चाहिए जिसे पेड अप कैपिटल कहते है.
  • यह पैसा सदस्य किसानों से एकत्रित किया जाता है. एवं कंपनी को चलाने, व्यापार करने व अन्य खर्चो के लिए भी पैसा सदस्य किसानों से एकत्रित करते है तथा उनको कंपनी में शेयर होल्डर बनाया जाता है. बाद में जो भी कंपनी में लाभ होता है, उतना शेयर के अनुपात में लाभ का वितरण किया जाता है.
  • दो या तीन महीने के अन्दर कंपनी का पंजीयन हो जाता है. अब कंपनी के सदस्य व्यापार शुरू कर सकते है.
  • बिज़नेस प्लान- अब कंपनी सदस्य मिलकर व्यापार की रूपरेखा बनाये की इसके अन्दर किसका व कितनी मात्रा में व्यापार करना है.
  • कंपनी का व्यवसाय- कंपनी बनाने के बाद निम्नलिखित प्रकार के व्यापार कर सकते है.
  • बीज प्रमाणीकरण – बीज उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकिंग,मार्केटिंग आदि.
  • खाद, बीज, दवाई का लाइसेंस लेकर किसानों को बेंचना.
  • कृषि उत्पाद को खरीदकर किसी ज्यादा भाव वाले बाजार में बेचना.
  • कृषि उत्पाद का ब्रांड बनाना, पैकेजिंग, मानकीकरण, लेबलिंग एवं मार्केटिंग.
  • कृषि उत्पाद की प्रोसेसिंग करके नया उत्पाद बनाना व बेंचना.
  • डेयरी, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, रेशम पालन, मुर्गीपालन या अन्य व्यवसाय.
  • किसानों के उत्पादन व उपलब्धता के आधार पर अन्य कोई व्यवसाय.
  • कृषि उत्पादो का निर्यात.
कंपनी को आर्थिक सहयोग
  • कंपनी के सदस्यों से पैसा एकत्रित करे.
  • प्रबन्धन पूँजी- शुरूआती समय में कंपनी के लिए फर्नीचर, लेखन सामग्री आदि के लिए स्माल फार्मर्स एग्रीकल्चर कंसोर्टियम (एस.एफ.ए.सी., Small Farmer Agriculture Consortium., SFAC) लगभग 3.5 लाख रुपये देता है.
  • इक्विटी ग्रांट फण्ड- जितना कंपनी के सदस्य पैसा एकत्रित करते है उतना ही पैसा एस.एफ.ए.सी. (Small Farmer Agriculture Consortium., SFAC)) कंपनी को उपलब्ध कराता है. जिसे इक्विटी ग्रांट फण्ड कहते है,जिसकी सीमा 10 लाख रुपये तक रहती है, तथा इस पैसे को कंपनी तीन बार में अपने सदस्य संख्या बढाकर ले सकती है. एक सदस्य के हिसाब से एक बार ही यह पैसे दिया जाता है.
  • प्रबन्धन पूँजी व इक्विटी ग्रांट फण्ड कंपनी को वापिस नहीं करना पड़ता है यह पैसा कंपनी के पास ही रहता है.
  • क्रेडिट गारन्टी फण्ड- एस.एफ.ए.सी. (Small Farmer Agriculture Consortium (SFAC)) किसानो को बैंक से 100 लाख तक का बिना कुछ गिरवी रखे लोन भी देता है.
  • जब कंपनी तीन साल तक चल जाये व उसका लगातार इनकम टेक्स रिटर्न भरते है तो कंपनी ऋण  के लिए बैंक में भी आवेदन कर सकती है.
  • ऋण आदि के बारे में जानकारी के लिए कंपनी बनाने से पूर्व एस.एफ.ए.सी. (SFAC) की वेबसाईट पर जाकर विस्तृत जानकारी ले सकते है व उनके कार्यालय में संपर्क कर सकते है ताकि उनकी लोन सम्बन्धी नियम व शर्ते पूरी की जा सके व उनकी योजनाओ का लाभ लेने में कोई परेशानी न हो.
  • www.sfacindia.com
  • खेती बाड़ी व सरकार की कृषि से सम्बंधित योजनओं के लिए यू ट्यूब या गूगल पर हमारे चैनल –

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  • धन्यवाद

 

बीज प्रमाणीकरण

बीज प्रमाणीकरण, प्रमाणित बीज उत्पादन

  • 1. बीज उत्पादन
  • फसल उत्पादन के लिए हाई गुणवत्ता का प्रमाणित बीज उत्पादन करना ही बीज प्रमाणीकरण व बीज प्रमाणित बीज उत्पादन होता है.
  • 2. बीज
  • जिसका उत्पादन उच्च हो
  • बीज में कोई मिलावट न हो.
  • अंकुरण प्रतिशत ज्यादा हो.
  •  आनुवंशिक रूप से शुद्ध हो
  • 3. किसका बीज  उत्पादन करे.
  • प्रमाणित बीज.- कुछ फसलो जैसे गेहू, चना, सोयाबीन, मसूर अरहर व अन्य फसले का बीज प्रमाणीकरण कर सकते है. इसमें केवल नोटीफाईड किस्मो के बीजो का प्रमाणीकरण कर सकते है, नोटीफाईड किस्मो की सूची इन्टरनेट पर खोज सकते है, आसानी से सूची मिल जाएगी.
  • 4 .कौन उत्पादन कर सकता है.
  • कोई भी व्यक्ति बीज उत्पादन कर सकता है किसी भी तरीके से चाहे वो किसान हो या न हो. जो किसान नहीं है वो किसानो को अपने साथ किसी संस्था के माध्यम से जोड़कर प्रमाणित बीज उत्पादन कर सकता है.
  • व्यक्तिगत.
  • प्रोप. फर्म.
  • समूह, समिति.
  • प्राइवेट कंपनी
  • 5. संपर्क करे
  • जिले के कृषि विभाग के उपसंचालक से.
  • बीज प्रमाणीकरण संस्था के बीज प्रमाणिकरण अधिकारी से.
  • या बीज प्रमाणीकरण की वेवसाईट पर.
  • 6. कागजात
  • खाता खसरा (बी -1)
  • फोटो.
  • उप संचालक कृषि से लाईसेन्स.
  • ग्रेडिंग प्लांट की सहमति.
  • हर जिले में ग्रेडिंग प्लांट होता है, सूची प्रमाणीकरण की वेवसाईट पर देखे.
  • आवेदन प्रमाणीकरण संस्था से ले.
  • 7.आवेदन.
  • आवेदन भर कर दे.
  • प्रमाणीकरण की फीस जमा करे.
  • यह लगभग 800-1500 रुपये प्रति हेक्टर रहती है.
  • हर जिले में बीज प्रमाणीकरण निरीक्षक रहता है उसके माध्यम से आवेदन करे
  • 8. आवेदन की दिनांक
  • . खरीफ फसलो की प्रमाणीकरण की अंतिम तारीख 30 जून से 15 जुलाई.
  • रबी फसलो की प्रमाणीकरण की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर से 30 दिसम्बर.
  • 9. बीज उत्पादन
  • आधार बीज किसी संस्था से ले व् उसका बिल भी ले.
  • और बुबाई करे व बीज उत्पादन करे.
  • 10. निरिक्षण
  • फसल के बुबाई के पूर्व व् खडी फसल व ग्रेडिंग के समय बीज प्रमाणीकरण अधिकारी 2-4 बार . जाँच करने आयेंगा व बीज के नमूने लेकर परिक्षण के लिए भेजेगा.
  • इसके बाद कटाई के बाद ग्रेडिंग कराके व् पैकिंग करके बोने व बेचने के लिए तैयार है .
  • 11. व्यवसाय
  • इसलिए किसान आसानी से बीज उत्पादन कर सकते है.
  • यह फसल उगाने जैसा ही है बस कुछ सरकारी कार्यवाही व नियम का पालन करना है.
  • 12. लाभ
  • सभी जानते है की बीज फसल उत्पादन से महंगा मिलता है.
  • जब उत्पादक/कस्टमर दोनों किसान ही है तो बाजार से महंगा बीज क्यों ख़रीदे.
  • सभी राज्यों में बीज प्रमाणीकरण संस्थाये है व उनकी वेबसाइट है, ज्यादा जानकरी के लिए उनसे संपर्क करे.
  • ज्यादा जानकारी के लिए गूगल या यूट्यूब पर हमारा चैनल खोजे/सर्च करे- Digital Kheti .

 

 

 

 

 

 

Farmer Producer Company

Farmer Producer Company

Farmer Producer Company- this is the company which is made by primary producer to their own benefit and run by them too. Primary Producers- farmer, milk producer, fishermen, etc.This is also run by primary producers.Company is a legal form which share benefit/income/profits among the members.

Need of the farmer producer company- the requirements of the primary producers are the same. So at the time of purchase of input they can purchase a big amount of inputs, this reduce the cost of the input to them. Because this is group of small farmers who collect their produce and may sale at rational rate. By collecting the amount they can do something bigger which increase their income.

How to make a farmer Producer company- first farmers should make group village wise, farmers of  many nearby villages may come together to make a producer company. In this more than 33% of the member should be marginal (farmers which have less 1 hectare Land) and small farmers in farmer Producers Company. (Have land 1-2 hectares they should be like minded and should have zeal to earn more with their produce by removing middlemen.Take 2-3 meeting with them and told the benefit of the farmer producer company. It will take 3-6 month. Now collect the general information of the farmers which are interested and want to be a member of company.

Selection of Board of Director – from these farmers select the board of Director these persons should be some educated and able to handle the company. These numbers may be 5-15 persons. One woman member should be in board of Directors.

Selection of Chairman and secretary- from the selected Board of Director choose the Chairman and secretary for the company. These persons are signatory authority for financial and other work in the company with the board of director.

Member of the company- any primary producer can be the member of the company. Only one person from the family can be the member in one company. The number of the member should be as more as possible. Initially it may 200-500 members. But the more the member will be best. Minimum limit is 10member and there is not limit of maximum member.

  • Registration of the company – contact a chartered Accountant (C.A.) in your district. CA will register the company in office of the registrar of company.
  • Document- Provide the complete list of the producers who want to be the member of the company.
  • Provide name and other information for example- pan card, adhar number of the board of directors.
  • Provide Fees for the registration and charges of CA. The fees will be approx- 40 thousand.
  • Initially the form making a company there is a need 1 lakh for making a company this is called paid up capital.
  • Collection of the money – collect some amount from the company member to run and register company.
  • Within two-three month the company will register and now the company member can start the business.
  • Business Plan – Now make a plan of business what they want to do in what amount. And collect the money to run business and management of the company by making the farmers as share holder.

Business can be done under the company- there is some example of the businesses which can be done, producer can done as per their requirement and availability-

  1. Procurement of inputs- the company can take license of the seed pesticides, fertilizers etc to sale to the members or others.
  2. Aggregation and storage of produce.
  3. Processing like drying, cleaning, grading.
  4. Brand building, packaging, standardization, labeling and marketing.
  5. They may purchase produce in big amount and sale it at higher price in other market.
  6. Export of produce.
  7. Anything which is as per their need and availability.

Economic support-

  1. Collect money from member of company.
  2. Management Fund- Small Farmer Agriculture Consortium (SFAC) provides money for the management of the company in initial stage of the company to purchase furniture, stationery etc.
  3. Equity Grand Fund – This is also providing to the company up to a limit of 10 lakh. To get this money the company must also collect the same amount from their members.
  4. Credit Guarantee Fund- up to a 100 lakh limit this amount is provided to company as loan without mortgaging anything.
  5. Direct Loan can be taken from the Bank if company is running well for more than three years and company is filling income tax return properly.
  6. How to get grant from the small farmers agriculture consortium visit the website, from where you will also find the rule and regulation about getting grant from them.

By making a farmer producer company farmers can earn more and can make their lives better.

 

 

Seed Production Business

“Seed Production”

Seed Production is a very important thing in the cultivation of the crops. The farmers can produced the certified seed easily. Here I am giving the full detail how the farmer can produce seed and how they can sale it to others and can make a huge profit.

Seed production is just like the production of the crops as the farmers are growing from a long time. The procedure of the crop production is well known by the farmers. There is a very small different in crop production and seed production. They have to make a small change in Growing the crops under this they will have do registration and have to follow  some government rule and the other procedure are same like crop production.

  • Seed- We all knows the seed is a very important input in the crop cultivation.
  • If farmers have the best quality seed than their crops will also be excellent.
  • When farmer is growing crops why he cannot produce the seed or can do a seed business.
  • We all know the cost of the seed is much higher than the produce of the farmer. For example the rate of farmer produce like wheat is 1500-1600 Rs. /Quintal and the rate of wheat seed is 3200-3400 Rs/Quintal. So business of the seed production is most beneficial to the farmers.

 Farmers should think about it.

  • Formation of the society– there are so many ways using them farmer can produce seed easily but most convenient way is formation of the society for the seed production. It is the medium size organization under which farmers can start seed production.
  • To make a society, make a group of 21 people or more than 21 people. Among these people select one person as chairmen and other one as secretary.
  • Now give a name of the society as you like… After that collect the document of the farmers and resister the institute as society in the office of the society registrar.
  • Now search a chartered Accountant (CA) in the district. The CA will register your farm as society and he will also register the society in GST also.
  • After the registration open a current account in the bank.
  • Seed License – after this go to the agriculture department with the document and fees of the license and apply for the seed license. The agriculture department will give the seed license for selling of the seed.
  • After that search a seed grading plant in your district. Mostly in each district there is a grading plant. If not found search the list of registered grading plant online on the website of seed certification agency of your state.
  • Make an agreement with them and take permission for grading of the seed.
  • After this decide the quantity of the seed which have to produced.
  • It should not be much less or too high. But it should produce some benefit to the farm/society in first year.
  • Registration for the seed certification-
  • Now search seed certification officer/seed inspector of your area/district.
  • This may be asked to the agriculture department of district or may be found online because in all state there is seed certification agency. Search it there and take the contact number and call to them to find the seed inspector of your area.
  • After that collect the document and fees of certification and register the document for seed certification by the help of seed certification officer.
  • After registration purchase the Foundation seed as per requirement.
  • Sowing of seed is done in the field.
  • During the crop growth the seed inspector will come to inspect the crop for 3-4 times.
  • Follow the instruction of seed inspector.
  • Threshing, storage and Sampling and bagging – Cut the crop and after threshing store it in the godown.
  • The seed inspector will collect the seed sample for testing the moisture percentage, purity percentage, GOT test etc.
  • The testing report will come after that certification tag is provided to society.
  • Now the farmer will have to done grading the seed at grading machine.
  • Now the farmers can fill the bag with certification tag in prescribed quantity.
  • Now this is ready to sale.

Sale of the seed – Now the member of the society can sale their seed to others farmers. Or they may sale their produce by the shop.

  • They can also supply the seed to agriculture department of their district.
  • Subsidy for seed Production – For the seed production government also provide subsidy. For this the society member can contact to the agriculture department.
  • If the society wants to produce seed in more quantity then they can contact to government seed production agency which every year give a requirement of seed. They need a large quantity every year. Society can produce seed to them in large quantity.
  • Loan for the seed Production – society can keep its seed in the registered godown, on the receipt of the godown the bank also provide loan to the farmer at low rate of interest.
  • If society is filling income tax return for previous three year on the basis of that the bank can also give loan to the society for seed production.
  • Special Note- before the starting the business of seed production the one or two member of the society should take training of seed production. There are so many places where they can take the training.
  • And most efficient way is to take a job in some old society which are already producing seed from a long time and deeply watch the procedure of the seed production.
  • It is business which will be very successful there is a no chance of decreasing the demand of the seed.