New MSP of Crops.-एम.एस.पी. में वृद्धि

न्यूनतम समर्थन मूल्य  (Minimum Support Price) – एम.एस.पी (MSP) –  खरीफ – 2019

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों का स्वागत है, हमारी इस वेवसाईट – www.kisanhomecart.com में.

न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) –  एम.एस.पी (MSP) – खरीफ – 2019 

यह फसलों का न्यूनतम मूल्य होता है जो की किसान को फसल उत्पादन करने पर मिलना ही चाहिए. यह फसल का वह भाव है जिस पर यह माना गया है की अगर फसल इस मूल्य पर बिकती है तो किसान को 50 प्रतिशत लाभ होता है. ( 50% return over all India weighted average cost of production)

एम.एस.पी (MSP) –  यदि मंडी में फसल का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) से कम मिलता है तो फसल को वहा की प्रदेश सरकारे खरीदती है, और उनको खरीदी के लिए केंद्र सरकार (भारत सरकार) भी आर्थिक मदद करती है, ताकि किसान को फसल उत्पादन में होने वाले नुकसान से बचाया जा सके.

एम.एस.पी (MSP) – फसल खरीफ मौसम – 2019 

1.A. धान (Paddy ) – कॉमन (common)  

  • नई एम.एस.पी (MSP)–   1815 रुपये / क्विंटल. 
  • पुराने भाव – 1750 रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 65 रुपये/क्विंटल.

B. धान (Paddy ) – ग्रेड – ए (Grade-A)

  • नई एम.एस.पी (MSP)–   1835 रुपये / क्विंटल.
  • पुराने भाव – 1770 रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 65 रुपये/क्विंटल.

2. A. ज्वार – संकर (Sorghum) (Jowar)- Hybrid

  • नई एम.एस.पी (MSP) —   2550 रुपये/क्विटल.
  • पुराने भाव –  2430  रुपये/क्विंटल
  • बढोतरी – 120 रुपये/क्विंटल.

B. ज्वार – मालदंडी ( Sorghum ) (Jowar) – Maldandi

  •  नई एम.एस.पी (MSP) —   2570 रुपये/क्विटल.
  • पुराने भाव –  2450  रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 120 रुपये/क्विंटल.

3 . रागी (Ragi) – 

  • नई एम.एस.पी (MSP)— 3150  रुपये/क्विटल.
  • पुराने भाव – 2897 रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 253 रुपये/क्विंटल.

4. बाजरा – Bajra (PearlMillet)  

  • नई एम.एस.पी (MSP) — 2000 रुपये/क्विटल
  • पुराने भाव – 1950रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 50 रुपये/क्विंटल.

5. मक्का (Maize) –

  • नई एम.एस.पी (MSP) — 1760 रुपये/क्विटल.
  • पुराने भाव – 1700 रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 60 रुपये/क्विंटल.

6. अरहर – तुअर – TurArhar (PigeonPea)  

  • नई एम.एस.पी (MSP) — 5800 रुपये/क्विटल
  • भाव – 5675 रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 125 रुपये/क्विंटल.

7. मूंग – Moong (Green gram)  

  • नई एम.एस.पी (MSP) — 7050 रुपये/क्विटल.
  • पुराने भाव – 6975 रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 75 रुपये/क्विंटल.

8. उड़द – urad (Black Gram)  

  • नई एम.एस.पी (MSP) — 5700 रुपये/क्विटल.
  • पुराने भाव – 5600 रुपये/क्विंटल.
  •  बढोतरी – 100 रुपये/क्विंटल.

9. मूंगफली (Groundnut with shell) – 

  • नई एम.एस.पी (MSP) — 5090 रुपये/क्विटल.
  • पुराने भाव – 4890 रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 200 रुपये/क्विंटल.

10. सूरजमुखी (Sunflower) – 

  • नई एम.एस.पी (MSP) — 5650 रुपये/क्विटल.
  •  पुराने भाव – 5388 रुपये/क्विंटल.
  •  बढोतरी – 262 रुपये/क्विंटल.

11. सोयाबीन (Soybean) – 

  • नई एम.एस.पी (MSP) — 3710 रुपये/क्विटल.
  • पुराने भाव – 3399 रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 311 रुपये/क्विंटल.

12. तिल (Sesamum) –

  • नई एम.एस.पी (MSP) — 6485 रुपये/क्विटल.
  •  पुराने भाव – 6249 रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 236 रुपये/क्विंटल.

13. रामतिल (NigerSeed)  

  •  नई एम.एस.पी (MSP) — 5940 रुपये/क्विटल.
  • पुराने भाव – 5877 रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 63 रुपये/क्विंटल.

14. A. कपास–मध्यम रेशे वाली– (Cotton-medium staple)-  

  • नई एम.एस.पी (MSP) — 5255 रुपये/क्विटल.
  • पुराने भाव – 5150 रुपये/क्विंटल
  • बढोतरी – 105 रुपये/क्विंटल.

B. कपास – मध्यम रेशे वाली  – (CottonLong staple)

  • नई एम.एस.पी (MSP) — 5550 रुपये/क्विटल.
  • पुराने भाव – 5450 रुपये/क्विंटल.
  • बढोतरी – 100 रुपये/क्विंटल.

अभी मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सोयाबीन, मक्का उड़द, अरहर, कपास, तिल, रामतिल आदि खरीफ फसलों को एम.एस.पी (MSP) भाव पर खरीदी की जाएगी. अत मध्यप्रदेश राज्य के सभी किसान भाई पहले अपनी सभी खरीफ फसलों का पंजीयन अपने तहसील, विकासखंड या जिले  में सहकारी समिति या निकट की मंडी में कराये, उसके बाद फसल को मंडी में बेचे. ताकि न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ लिया जा सके. अन्य राज्यों के किसान भाई अपने जिले में कृषि विभाग में संपर्क करे.

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एम.एस.पी (MSP) – रबी 2019

न्यूनतम समर्थन मूल्य  (Minimum Support Price)

एम.एस.पी (MSP) रबी 2019 

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है चन्द्र शेखर जोशी और आप सभी किसान भाईयों का स्वागत है हमारी  इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में.

न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price)  

एम.एस.पी (MSP) रबी 2019 

यह फसलों का न्यूनतम मूल्य होता है जो की किसान को फसल उत्पादन करने पर मिलना ही चाहिए.

एम.एस.पी (MSP)  यदि मंडी में फसल का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) से कम मिलता है तो फसल को वहा की प्रदेश सरकारे खरीदती है, और उनको खरीदी के लिए केंद्र सरकार (भारत सरकार) भी आर्थिक मदद करती है, ताकि किसान को उत्पादन में होने वाले नुकसान से बचाया जा सके.

एम.एस.पी (MSP) – फसल रवी मौसम  – 2019
1. गेंहू   ( Wheat )

  नई एम.एस.पी (MSP)–   1925 रुपये / क्विंटल.

 पुराना भाव – 1840 रुपये/क्विंटल.

  बढोतरी – 85 रुपये/क्विंटल.

2. चना  (Gram, Chick Pea )- 

        नई एम.एस.पी (MSP) —   4875 रुपये/क्विटल.

    पुराना भाव –  4620  रुपये/क्विंटल.

बढोतरी – 255 रुपये/क्विंटल.

3 . मसूर  (Lentil )- 

    नई एम.एस.पी (MSP)— 4800  रुपये/क्विटल.

    पुराना भाव – 4475 रुपये/क्विंटल.

बढोतरी – 325 रुपये/क्विंटल.

4. सरसों  ( Mustard ) – 

    नई एम.एस.पी (MSP) —  4425 रुपये/क्विटल.

पुराना भाव – 4200रुपये/क्विंटल.

बढोतरी – 225 रुपये/क्विंटल.

5. जौ ( Barley )- 

   नई एम.एस.पी (MSP) — 1525 रुपये/क्विटल.

   पुरानाभाव – 1440 रुपये/क्विंटल.

   बढोतरी – 85 रुपये/क्विंटल.

अभी मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सोयाबीन, मक्का उड़द, अरहर, कपास, तिल, रामतिल आदि खरीफ फसलों को एम.एस.पी (MSP) भाव पर खरीदी की जाएगी.

अत मध्यप्रदेश राज्य के सभी किसान भाई पहले अपनी फसल का पंजीयन अपने तहसील में सहकारी समिति या निकट की मंडी में कराये, उसके बाद फसल को मंडी में बेचे.

ताकि न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ लिया जा सके.

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कृषि में अनुदान के लिए आवेदन

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आज इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे कृषि आदान (कृषि यंत्रो) पर अनुदान लेने के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया के बारे में, ताकि किसान भाई अनुदान या छूट के लिए आसानी से आवेदन कर सके व सरकार की योजनाओं का लाभ ले सके.

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कृषि विभाग में योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन करने के लिए दो वेवसाईट है 1. www.mpdage.org – जब किसान भाई इस वेबसाईट पर क्लिक करेंगे तो उनकों इस वेबसाइट पर सभी योजनाओं की जानकारी मिल जाएगी. और इन योजनाओं पर मिलने वाले अनुदान/छूट के बारे में जानकारी भी मिल जाएगी.

यहाँ पर पहले एक पॉप-अप विंडो खुलती है 1. जिसमे ई-कृषि यंत्र अनुदान (डी.बी.टी.) के निर्देश मिल जायेंगे आप चाहे तो इसपर क्लिक करके इसकों पढ़ सकते है. 2. चूकि अनुदान के लिए आवेदन फिंगरप्रिंट स्कैनर यानि आवेदन के समय स्वयं किसान को आना पड़ता है और उसका अंगूठा लगता है तब आवेदन होता हो. आवेदन करने के लिए डीलर या एम.पी.ऑनलाइन वाले फिंगरप्रिंट स्कैनर खरीद सकते है. 3. तथा यहाँ से ही क्लिक करके सीधे ई कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर भी जा सकते है.

यह सभी जानकारी पढ़ने के बाद पॉपअप विंडो की बंद कर दे. इसके बाद योजनाओं के अन्तरगत आपकी सभी योजनाओ की जानकारी मिल जाएगी जहा पर आप योजनाओ के बारे में पढ़ सकते है. यहाँ पर कृषि यंत्र प्रदान/सप्लाई करने वाले डीलर की सूची भी आपको मिल जाएगी. तथा कौशल विकास के अन्तरगत जो किसान भाई ट्रेक्टर या कंबाइन हार्वेस्टर की सर्विसिंग, मरम्मत या संचालन की ट्रेनिंग लेना चाहते है उसकी भी जानकारी मिल जाएगी. यह प्रशिक्षण निशुल्क है.

अब एक दूसरी वेबसाईट है www.dbt.mpdage.org केवल इसी वेबसाइट पर किसान भाई यंत्रो पर अनुदान लेने के लिए आवेदन कर सकते है. 1. कृषि यंत्र – कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय – इसमें किसान बड़े कृषि यंत्रो के लिए आवेदन कर सकते है – जैसे – ट्रेक्टर, रोटावेटर, थ्रेशर, सीडड्रिल, कंबाइन हार्वेस्टर, ट्रेक्टर माउंटेड स्प्रे पम्प, रेज्ड बेड प्लान्टर  आदि. 2. सिंचाई उपकरण – किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग –इसमें किसान भाई सिंचाई के लिए पाईप, स्प्रिंकर पाईप, ड्रिप, इंजन, मोटर आदि पर अनुदान के लिए आवेदन कर सकते है. 3. माइक्रो सिंचाई/उधानिकी उपकरण – उद्यानिक एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग – इसमें उधानिकी विभाग में मिलने वाले अनुदान के लिए आवेदन कर सकते है. फलो का बग़ीचा, सब्जी बीज, पाली हाउस, प्याज भण्डारण आदि.

महत्पूर्ण नोट – पहले इन वेबसाइट पर आवेदन करने के साथ ही खरीदने के अनुमति मिल जाती थी – मतलब अगर कोई किसान

स्प्रिंकलर पाइप अनुदान पर खरीदना चाहता है तो पहले उसे वेबसाइट पर आवेदन करना रहता है. अगर उसका आवेदन हो जाता है तो वह स्प्रिंकलर पाइप खरीद सकता है और उसकों अनुदान मिल जायेगा.

लेकिन इसमें बहुत दिक्कत आ रही थे पोर्टल महीने में एक या दो बार दो – चार दिन के लिए खुलता था तो आवेदन नहीं हो पाता था. दूसरा केवल जिस दिन पोर्टल खुलता था उसी दिन आवेदन कर सकते थे.

लेकिन अभी इसको ऐसा कर दिया है की किसान 6 नवम्बर 2019 तक आवेदन कर सकते है और 31 अक्टूबर व 7 नवम्बर को लौटरी से नामों का चयन होगा व चयनित किसानो की सूचि पोर्टल पर रहेगी. तथा किसानो को मोबाइल पर भी चयनित होने की जानकारी दी जाएगी. व कृषि विभाग, कृषि अभियांत्रिकी, उधानिकी विभाग के अधिकारी, कर्मचारी भी किसानों को सूचित कर देंगे. इसके बाद किसान भाई जल्दी से जल्दी उस यंत्र आदि को खरीद सकते है जिसके लिए उन्होंने आवेदन किया था.

पहले एक दो दिन पोर्टल खुलने के कारण किसानो के आवेदन हो ही नहीं पाते थे, जिससे किसानो को दिक्कत होती थी. लेकिन अभी पोर्टल लम्बे समय के लिए खुलता है तो यंत्र आदि पर अनुदान का लाभ लेने के लिए किसान भाई आवेदन कर सकते है. जैसे ही उनको खरीदने की अनुमति विभाग या शासन से मिलेगी तब वो उसकी खरीदी कर सकते है जिसके लिय उन्होंने आवेदन किया था.

यह पोर्टल केबल मध्यप्रदेश के किसानो के लिए है तो इस पोर्टल पर केवल मध्यप्रदेश के किसान ही आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते है.

लेकिन अभी लगभग सभी राज्यों में यह योजनाये चल रही है तो अन्य राज्यों के किसान अपनी तहसील, विकासखंड या जिले में कृषि या उधानिकी विभाग में संपर्क करके जानकारी ले सकते है.

अगर कुछ दिक्कत आ रही है तो आप कमेंट करके मुझसे भी पूछ सकते है. 

ज्यादा जानकारी के लिए आप हमारे यूट्यूब चैनल डिजिटल खेती — DIGITAL KHETI पर भी विजिट कर सकते है और

PLAY LIST- उसकी प्लेलिस्ट में सरकारी योजनाओ की लिस्ट में आवेदन कैसे करे व किस पर कितनी छूट या अनुदान है उसके बारे में जानकारी ले सकते है. https://www.youtube.com/playlist?list=PL9-YAXqgaGKbFzeLSVOmFDOn2eUPrSN88

कृषि यंत्र केंद्र – कस्टम हायरिंग सेंटर

नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है, हार्दिक अभिनन्दन है हमारी इस वेवसाईट www.kisanhomecart.com में. यहाँ पर हम किसान भाईयों को खेती से सम्बंधित योजनाओं आदि के बारे में जानकारी प्रदान करते है.

आज हम आपकों बताने वाले है कस्टम हायरिंग सेंटर के बारे में –

जो लोग थोड़ा पढ़े लिखे है एवं खेती के साथ गाँव में ही अपना खेती से ही जुड़ा हुआ व्यवसाय करना चाहते है वो लोग गाँव में ही रहकर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित कर सकते है और स्वयं का रोजगार स्थापित कर सकते है.

इसमें गाँव में खेती में काम आने वाले कृषि यंत्रों का सेंटर स्थापित किया जाता है, जिसमें ट्रेक्टर, ट्राली, थ्रेशर, कल्टीवेटर, प्लाऊ रोटावेटर, हेरों, सीडड्रिल या खेती में काम आने वाले अन्य यंत्र रखे जाते है. और इन कृषि यंत्रो को गाँव के अन्य किसानों कों खेती करने के लिए किराये पर दिया जाता है. जिससे कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने वाले को आय प्राप्त होती है व गाँव के अन्य किसानों को आसानी से कृषि यंत्र मिल जाते है.

ऐसे कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किये जा रहे है.

आवेदन के लिए योग्यता – आवेदक की उम्र 18 वर्ष से लेकर 40 वर्ष के मध्य होनी चाहिये. आवेदक कम से कम 12 वी पास होना चाहिए. कृषि (Agriculture), कृषि अभियांत्रिकी (agriculture engineering) व उधानिकी (Horticulture) से स्नातक (graduate) भी आवेदन कर सकते है. यदि ये लोग आवेदन करते है तो इनको प्राथमिकता दी जाएगी.10 लाख से लेकर 25 लाख की लागत तक का कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित कर सकते है.अनुदान अधिकतम 10 लाख रुपये तक का ही मिलेगा.सामान्य वर्ग के आवेदक को 40% व अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व महिला आवेदक को 50 % अनुदान मिलेगा.

कृषि यंत्रो की इकाई – कस्टम हायरिंग सेंटर में कृषि यंत्रो की तीन इकाई बनाई गई है जिनमे से इकाई 01 के यंत्र अपने कस्टम हायरिंग सेंटर में रखना अनिवार्य है.

इकाई – 01- ट्रेक्टर , पलाऊ , रोटावेटर, कल्टीवेटर या हेरों, सीडड्रिल, थ्रेशर, रेज्ड बेड प्लान्टर या राइस ट्रांसप्लान्टर.

इकाई – 02 – ग्रेडिंग प्लांट ( बीज के लिए )

इकाई -03 ऐच्छिक कृषि यंत्र – अपनी इच्छा एवं स्थानीय आवश्यकताओ पर आधारित कृषि यंत्र.

आवेदन – आवेदन की तारीख 5 सितम्बर से लेकर 19 सितम्बर 2019 तक है इस अवधि के मध्य आवेदन किये जा सकते है.

आवेदन करने के लिए अ.जा., अ.ज.जा. व महिला आवेदक को दो हजार व सामान्य जातिवर्ग के आवेदक को 5 हजार का ड्राफ्ट बैंक से बनबाना है.

आवेदन mponline (एम.पी.ऑनलाइन ) के माध्यम से करना है.

व 19 से 23 सितम्बर के मध्य आवेदन, बैंक ड्राफ्ट, पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र या ऋण पुस्तिका, व शेक्षणिक योग्यता की अंकसूची, अपने जिले में कृषि अभियांत्रिकी के कार्यालय में भौतिक सत्यापन कराना है.

मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले में पांच सेंटर स्थापित करना है कुल 255 सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य है.

इस तरह से अपने गाँव में कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित कर सकते है.

यह योजना केवल मध्य प्रदेश के लोगो के लिए है. अन्य राज्यों के किसान अपने जिले में कृषि (agriculture) या कृषि अभियांत्रिकी (agriculture Engineering) के कार्यालय में संपर्क कर सकते है. इस तरह की योजना सभी राज्यों में चलती है. आवेदन की तारीख अलग अलग रहती है.

दोस्तों इस जानकारी को आप अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे व आप हमारी इस वेवसाईट को आप सब्सक्राइब भी जरूर करे ताकि आपको खेती के बारे में नई नई जानकारी मिलती रहे.

धन्यवाद

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किसान पेंशन योजना -मानधन

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना

इसमें लघु एवं सीमान्त किसानों कों अंशदायी पेंशन का लाभ दिया जायेगा.

लघु किसान – जिनके पास 1 हेक्सेटर लेकर 2 हेक्टर तक जमीन है.

सीमान्त किसान – वो किसान जिनके पास 1 हेक्टर से कम जमीन है.

अंशदायी – इसमें किसानों को भी पैसा देना है तभी उनकों पेंशन योजना का लाभ मिलेगा.

इस योजना का लाभ लेने के लिए योग्यता – इस योजना का लाभ केवल वो ही किसान ले सकते है जो लघु या सीमान्त किसान है. बड़े किसानों ( 2 हेक्टर से अधिक जमीन वाले ) को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा. और जो किसान अन्य किसी पेंशन प्लान का लाभ नहीं ले रहे हो वो किसान इस योजना का लाभ ले सकते है.

योजना के लिय आयुसीमा – इस योजना का लाभ लेने वाले किसान की आयु 18 वर्ष से लेकर 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए . 18 साल से छोटे व 40 वर्ष से अधिक उम्र के किसान इस योजना का लाभ नहीं ले सकते है.

जमा की जाने वाली राशि- इसमें जमा की जाने वाली राशि 55 रुपये से लेकर 200 रुपये प्रति माह रहेगी. जिन की उम्र कम है उनकों कम राशि जमा करना है एवं जिन किसानों की उम्र ज्यादा है उनकों ज्यादा राशि जमा करनी है. उदाहरण के लिए 18 साल के किसान को 55 रुपये  प्रति माह  , 29 साल की उम्र के किसान को 100 रुपये प्रति और 40 वर्ष की उम्र के किसान को 200 रुपये प्रति माह जमा कराना है. इस तरह उम्र के हिसाब से राशि जमा होगी.

तथा जितनी राशि किसान से ली जाएगी उतनी ही राशि केंद्र सरकार द्वारा भी किसान के पेंशन खाते में जमा करायी जाएगी.

पेंशन का लाभ – जब किसान की उम्र 60 साल हो जाएगी इसके बाद किसान के खाते में हर महीने 3000 रुपये की पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी..

आवेदन – यह योजना 9 अगस्त 2019 से शुरू हो गई है तथा इसके आवेदन सामान्य सेवा केंद्र (common Service Centre ) पर होंगे. या जो शहर में ऑनलाइन कम्पूटर सेंटर रहते है जहा से आवेदन आदि भरे जाते है उन सेंटर से किसान भाई आवेदन कर सकते है.

कागजात – इसके लिए किसान को कम्पूटर सेंटर पर आधार कार्ड व बैंक की पासबुक लेके जाना है.

आवेदन की फीस – यह आवेदन निशुल्क है, इसके आवेदन के लिए केंद्र सरकार द्वारा आवेदन करने वाले सेंटर को 30 रुपये प्रति आवेदन का भुगतान किया जायेगा, इसलिए किसान को आवेदन के लिए कोई राशि नहीं देनी है.

प्रीमियम का भुगतान – इसमें किसान जब आवेदन करेंगे तो तो एक ऑटो डेबिट का फार्म आयेगा उसपर किसान अपने हस्ताक्षर करके वापिस कम्पुटर पर अपलोड करेंगे तो राशि स्वत उनके खाते से जमा होती रहेंगी.

और किसान चाहे तो अपनी प्रीमियम की राशि उनकों मिलने वाली प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि में से भी कटवा सकते है. आवेदन के समय यह आप्शन आयेगा. इस तरह किसान बही प्रीमियम का भुगतान कर सकते है.

आवेदन करने के लिए एवं ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करे.

www.pmkmy.gov.in

www.pmkisan.gov.in

खेती बाड़ी के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमारे यूट्यूब चैनल की इस लिंक पर क्लिक करे –

अन्य शर्ते या नियम – 60 वर्ष से पूर्व किसान की मृत्यु होने पर चाहे तो प्रीमियम भरके किसान की पत्नी पेंशन प्लान को चालू रख सकती है. एवं 60 साल पुरे होने पर पत्नी को पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी.

अगर 60 वर्ष की उम्र होने के पूर्व ही किसान की मृत्यु हो जाती है और किसान की पत्नी पेंशन योजना नहीं चाहती है तो जो राशि किसान ने जमा करायी थी वह ब्याज सहित वापिस मिल जाएगी.

अगर किसान की मृत्यु 60 वर्ष के बाद ( पेंशन शुरू होने के बाद ) होती है तो किसान की पत्नी को आधी पेंशन मिलेगी.

दोनों की मृत्यु हो जाने पर पेंशन का जमा फंड सरकार के पेंशन फंड में वापिस चला जायेगा.

इस योजना में महिला व पुरूष दोनों किसान ले सकते है.

Courtesy- krishi and kisan kalyan mantralay bharat sarkar, facebook page and website of of krishi and kisan kalyan mantralay bharat sarkar.

Subsidy on Combine Harvesters, कम्बाईन हार्वेस्टर पर अनुदान- छूट

कम्बाईन हार्वेस्टर खरीदने पर अनुदान/ छूट

इस योजना अन्तर्गत जो किसान कम्बाईन हार्वेस्टर खरीदना चाहते है उन किसानों को कृषि अभियांत्रिकी (Agriculture Engineering ) विभाग द्वारा हार्वेस्टर खरीदने पर अनुदान या छूट दी जा रही है.

जो किसान हार्वेस्टर खरीदना चाहते है वो इस योजना अन्तरगत आवेदन करके योजना का लाभ ले सकते है.हार्वेस्टर फसल कटाई के काम में लिय जाते है – गेंहू सोयाबीन आदि फसले.

हार्वेस्टर पर अनुदान –

  1. कम्बाईन हार्वेस्टर ( स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के साथ – भूसा को भी इकठ्ठा करने वाला ) सेल्फ प्रोपेल्ड (स्वचालित ) 14 फीट कटरवार के साथ – इसमें दो प्रकार से अनुदान दिया गया है. A. जो किसान सीमान्त, लघु, महिला किसान है ( किसी भी जातिवर्ग के ) व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के किसान है इन सभी किसानों को लागत का 50 % अनुदान दिया जायेगा या अधिकतम राशि 8 लाख 56 हजार तक की छूट या अनुदान दी जाएगी . B. एवं ऊपर दिए गए किसानों के अलावा अन्य वर्ग में आने वाले (सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के बड़े किसान) कृषकों को हार्वेस्टर की कुल लागत का 40% तक अनुदान दिया जायेगा या अधिकतम राशि 6 लाख 85 हजार तक की छूट या अनुदान दिया जायेगा.
  • 2. कम्बाईन हार्वेस्टर (ट्रैक टाइप ) ( स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के साथ या विना स्ट्रा मैनेजमेंट के – भूसा को भी इकठ्ठा करने वाला या बिना भूसा प्रबंध के) 6-8 फीट कटरवार के साथ –
  • A. जो किसान सीमान्त, लघु, महिला किसान है ( किसी भी जातिवर्ग के ) व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसान है उनकों लागत का 50 % अनुदान दिया जायेगा या
  • अधिकतम राशि 11 लाख तक का छूट या अनुदान दिया जायेगा .
  • B. एवं ऊपर दिए गए किसानों के अलावा अन्य वर्ग में आने वाले (सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के बड़े किसान) कृषकों को हार्वेस्टर की कुल लागत का 40% अनुदान दिया जायेगा
  • या अधिकतम राशि 8 लाख 80 हजार तक की छूट या अनुदान दिया जायेगा.
  • 3. कम्बाईन हार्वेस्टर (ट्रैक टाइप ) ( स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के साथ – भूसा को भी इकठ्ठा करने वाला ) सेल्फ प्रोपेल्ड (स्वचालित ) 6 फीट कटरवार के साथ –
  • A. जो किसान सीमान्त, लघु, महिला किसान है ( किसी भी जातिवर्ग के ) व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति किसान है उनकों लागत का 50 % अनुदान दिया जायेगा या
  • अधिकतम राशि 7 लाख तक की छूट या अनुदान दिया जायेगा.
  • B. एवं ऊपर दिए गए किसानों के अलावा अन्य वर्ग में आने वाले (सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के बड़े किसान) कृषकों को हार्वेस्टर की कुल लागत का 40% अनुदान दिया जायेगा या
  • या अधिकतम राशि 5 लाख 60 हजार तक की छूट या अनुदान दिया जायेंगा.

इस तरह से तीन प्रकार के हार्वेस्टर पर अनुदान दिया जायेगा – तो जो किसान कम्बाईन हार्वेस्टर खरीदना चाहते है वो किसान आवेदन कर सकते है.

इसके आवेदन ऑनलाइन होंगे तो आपके नजदीकि में जो कम्पूटर किओस्क या सेंटर है उनके द्वारा आवेदन कर सकते है.

आवेदन करने से पूर्व सामान्य श्रेणी के किसानों को 1 लाख रुपये का व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के किसानों को 50 हजार का डिमांड ड्राफ्ट (डी.डी.) बैंक से बनबाना है. और डिमांड ड्राफ्ट का विवरण व स्कैन कॉपी आवेदन के साथ लगानी है. इसके लिए आवेदन 5 अगस्त 2019 से लेकर 19 अगस्त 2019 है. यानि आवेदन की  अंतिम तारीख 19 अगस्त है.

आवेदन के बाद आवेदन की कॉपी व डिमांड ड्राफ्ट अपने जिले में सहायक कृषि यंत्री कार्यालय में जमा कराना होगा. एक जिले में कुल चार हार्वेस्टर तक देने की सीमा है. आवेदन एम.पी. ऑनलाइन (mp online) में माध्यम से होंगे. डिमांड ड्राफ्ट संचालक कृषि अभियांत्रिकी भोपाल के नाम बनवाना है. यह योजना केवल मध्यप्रदेश के किसानों के लिए है.

डिटेल में जानकारी वेवसाईट – www.mpdage.org से भी ले सकते है. ज्यादा जानकारी के अपने जिले में कृषि विभाग या कृषि अभियांत्रिकी के कार्यालय में संपर्क करे.

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बालोर की खेती, सेम की खेती, Cultivation of Bean/Sem,

आज इस पोस्ट में बालोर – सेम की खेती के बारे में जानकारी देंगे.बालोर या सेम को इंडियन बीन भी कहते है. यह एक बेल वाली फसल है जो बारिश में जून जुलाई में लगाई जाती है.

बालोर एक दलहनी फसल है जिसकों खाद/यूरिया की कम मात्रा की जरूरत पड़ती है.

हम जिस खेत की बात कर रहे है वो शांतिलालजी का खेत है इसमें बालोर के साथ लौकी की फसल भी लगाई गई है. किसान चाहे तो इसमें लौकी के जगह दूसरी बेल वाली तोरई या ककड़ी आदि की फसल भी लगा सकते है.

बालोर में पौधे से पौधे की दूरी 3 फीट रखी गई है व लाइन से लाइन से की दूरी 5 फीट रखी गई है.

और लौकी में पौधे से पौधे से की दूरी 6 फीट है व लाइन से लाइन की दूरी 5 फीट है.

लाइन में अल्टरनेट बालोर के पौधे के पास लौकी का पौधा लगाया गया है.

इसमें मेड व नाली बनाई गई है और नाली मेड के किनारे पर  बालोर/सेम व लौकी को लगाया गया है.

खेत के एक किनारे पर नाली बनाई जाती है जिसमें पानी लाकर फिर बालोर व लौकी के पौधों की नाली में पानी या सिंचाई दी जाती है.

किसान भाई चाहे तो ड्रिप लगाकर भी सिंचाई कर सकते है.

जिस जमीन के हम बात कर रहे है बो 1.5 बीघा है.

इसमें 1 किलों प्रति 1.5 बीघा या 3.5 किलों प्रति हेक्टर की दर से बीज लगाया गया है.

और लौकी में 5 पैकेट लेके आये थे 10 ग्राम के 230 रुपये प्रति पैकेट के भाव से.

इसमें बुवाई के बाद 25 किलों यूरिया व 15 किलोग्राम डी.ए.पी. मिलाकर तने से थोड़ी दूरी पर रखा था.

और फसल को 1 महीने की होने पर 10 किलोग्राम 12:32:16 खाद लौकी के पेड़ो के पास रखकर दिया था.

इसमें बेलों को चड़ने के लिए बांस, तार व धागे की सहायता से पांडाल या मचान बनाया जाता है. और बेल के टेनड्रिल धागों की सहायता से पांडाल पर चढ़ जाते है और वृधि/बढ़वार करते रहते है.

पांडाल बनाने के लिए दो बांस खड़े लगाये जाते है और उनके ऊपर एक बांस आड़ा लगाया जाता है. फिर ऊपर तीन लोहे के तार लगाये जाते है. दो तार किनारों पर व एक तार बीच में लगाया जाता है. और दोनों खड़े बांसों के निचले सिरे पर प्लास्टिक की रस्सी बांधते है.

और भी दुसरे तरीकों से मचान या पांडाल बना सकते है अपनी सुविधानुसार.

पांडाल बनाने से फसल बारिश में सडती नहीं है. और पैदावार ज्यादा आती है.

बालोर में शुरू में लीफ माईनर आता है उसकों कीटनाशी डालकर रोक सकते है. व फूलों के समय कीड़ा लगता है उसको कोराजन या टाकूमी कीटनाशी डालकर रोक सकते है.

इस तरह से दो फसल लगाने का फायदा ये है की शुरू में लौकी लगना शुरू हो जाती है व सितम्बर से अक्टूबर तक लगती रहती तो किसान लौकी को बाजार में बेचकर पैसा कमाता है.

बालोर/सेम की फसल अक्टूबर- नवम्बर से लगना शुरू होती है. तब तक लौकी ख़त्म हो जाती है.

तो बालोर लगना शुरू होने के बाद इसकी लगातार तुड़ाई होती रहती है और फलियो को बाजार में बेचकर किसान को पैसा आता रहता है.

अगर सिंचाई की सुविधा लम्बे समय तक उपलब्ध है तो बालोर फरवरी- मार्च तक चलती है.

इस तरह किसान को सितम्बर से फरवरी मार्च तक  लौकी व बालोर से लगातार पैसा आता रहता है.

किसान को इस 1.5 बीघा में लौकी से लगभग 50 हजार व बालोर से 1 लाख 10 हजार की आय होती है व तो कुल 1 लाख 60 हजार तक की आय किसान को प्राप्त होती है.

इस तरह से किसान भाई कम जमीन होने पर भी अच्छा लाभ कमा सकते है.

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खीरा की खेती, Cultivation of Cucumber Crop.

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उन्नत तरीके से खीरा की खेती

खीरा प्रमुख रूप से सलाद के रूप में खाई जानी वाला फल है. यह कुकरबिटेसी कुल का फल है जो गर्मी के मौसम में लगाया जाता है. लेकिन अभी किसी भी मौसम में इसकों लगा सकते है. लेकिन गर्मी के मौसम में खीरा के भाव अधिक रहते है. तो किसान भाई गर्मी में भी इसकी खेती करके अच्छा लाभ ले सकते है.

इसकी खेती खुले खेत में व पॉली हाउस दोनों में की जा सकती है.

खेत में खीरे का उत्पादन.

इसकी बुवाई के लिए 10-12 पैकेट लगे है . एक पैकेट का वजन 25 ग्राम आता है. और एक पैकेट की कीमत 300-500 रुपये प्रति पैकेट रहती है. इस तरह से एक एकड़ में 3000-6000 रुपये तक का बीज लगता है. बुवाई के अनुसार बीज दर 250-350 ग्राम प्रति एकड़ या 11000 बीज प्रति एकड़ रहती है. नुन्हेम्स, सिंजेंटा, वी.एन.आर. आदि कंपनीयों का खीरा आता है तो किसान भाई किसी भी अच्छी कंपनी का बीज लगा सकते है.

खीरे को खरीफ-बारिश में भी लगा सकते है. मई के अंतिम सप्ताह में बुवाई करने पर बहुत अच्छा लाभ होगा. क्योकि बारिश शुरू होने के कुछ समय बाद से इसकी तुड़ाई शुरू हो जाएगी. बुवाई के 50-55 दिन बाद से खीरा लगना शुरू हो जाता है, और कुछ दिनों के अंतर से लगातार लगभग 12-15 बार तुड़ाई होती है.

एक एकड़ जमीन से एक बार में तुड़ाई में 10-15 क्विंटल निकलेगा. और ऐसे इसमें 10-12 बार तुड़ाई होगी तो, इसमें कुल उत्पादन 100-180 क्विंटल तक होगा.

इसकी बुवाई के लिए पांच फुट की दूरी पर मेढ़े बनाई गई है व पौधों से पौधे की दूरी सवा फीट है. अभी इसमें बांस, तार व धागे की सहायता से मचान/पांडाल बनाया जा रहा है जिस पर इसकी बेले चढ़ जाएँगी व फल जमीन से दूर रहेंगे तो सड़ेंगे नहीं. व खीरे की तुड़ाई भी आसानी से कर सकते है.

गर्मी के खीरे की बुवाई करने पर सिंचाई करने के लिए ड्रिप भी लगा सकते है ताकि पानी की कम मात्रा लगे व आसानी से सिंचाई भी की जा सके. बारिश शुरू हो जाएगी तो सिंचाई की जरूरत नहीं है लेकिन ड्रिप लगी रहती है. और बारिश ख़त्म होने के बाद या बीच में अगर सिंचाई की जरूरत पड़ेंगी तो ड्रिप से सिंचाई कर संकते है.

चूकि यह जुलाई के अंतिम सप्ताह में बाजार में बिकना शुरू होगा तो इस समय बाजार भाव अच्छा रहता है. व बाद में सभी लोगो का खीरा बाजार में आ जाता है तो भाव कम हो जाते है. अगर औसत 10 रुपये किलों बिकता है तो एक से 1.5 लाख तक की फसल बेच सकते है. सभी सब्जियों या फलों के उत्पादन पर लाभ भाव पर भी निर्भर रहता है. अगर भाव थोड़ा ज्यादा रहता है तो लाभ बहुत अधिक होता है. सामान्य भाव में भी लाभ अच्छा रहता है.

इस तरह से खीरे का उत्पादन का सकते है.

खीरे की फसल ख़त्म होने के बाद इसमें मक्का लगायेंगे और मक्का को पकने के बाद गर्मी में लोकी या तोरई की फसल लगायेंगे ताकि बांस व तारो से बनाये गए मचान का फिर से उपयोग कर सके.

इस तरह से पुरे साल में खेती से अच्छा लाभ मिलेगा.

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कपास की उन्नत किस्मे, Cultivation of Cotton,

कपास की उन्नत किस्मे, Cultivation of Cotton, DCH Cotton,

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आज इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे डी.सी.एच. कपास के बारे में इसका उत्पादन कर किसान भाई अधिक लाभ कमा सकते है.

देश में दो तरह की कपास बोई जाती है एम.सी.एच. व डी.सी.एच. कपास. इसमें से कपास के कुल क्षेत्र में से बहुत बड़े हिस्से में लगभग 90% भाग में  एम.सी.एच. कपास व बाकी 10 प्रतिशत हिस्से में डी.सी.एच. कपास लगाई जाती है.

डी.सी.एच. कपास की अवधि एम.सी.एच.की तुलना में ज्यादा रहती है. यह कपास लम्बी अवधि तक लगती रहती है. इस कपास का धागा ज्यादा लम्बा रहता है. तथा धागे का रंग थोड़ा भूरे रंग का रहता है. इस कपास का भाव बाजार में ज्यादा मिलता है. जिन क्षेत्रों में यह कपास लगाई जाती है वहा पर इसकी बुवाई बारिश होने के बाद की जाती है. जबकि बहुत सारे राज्यों में एम.सी.एच. कपास की बुवाई बारिश से पूर्व की जाती है.

एक पैकेट में 450 ग्राम बी.टी. कपास आती है जो खेत में कपास के लिए लगाई जाती है. और इसके साथ 120 ग्राम नॉन बी.टी. कपास आती है जिसमे बी.टी. जीन नहीं रहता है. यह नॉन बी.टी. कपास. बी.टी. कपास के चारों और 2 या तीन लाइनों में बोई जाती है, इस पर ही कीटों की इल्ली का प्रकोप होता है व इल्ली का प्रकोप बी.टी कपास पर नही  होता है, इससे बी.टी. कपास के प्रति इल्लियों में प्रतिरोधी क्षमता पैदा नहीं होती हो व बी.टी. कपास की  प्रतिरोधी क्षमता बनी रहती है . बी.टी. कपास पर केवल रस चूसने वाले कीड़ो का ही प्रकोप होता है

एक हेक्टर की बुवाई में लगभग 2.5 किलों या 5 पैकेट बी.टी. कपास लगती है. बीज के एक पैकेट की कीमत 730 रुपये रहती है. कही कही पर कपास के साथ मक्का की इन्टरक्रोपिंग भी की जाती है. ज्यादातर कपास की खेती काली मिटटी में की जाती है, लेकिन आजकल किसी भी प्रकार की उपजाऊ मिट्टी में इसकी खेती कर सकते है, जिसमे जल निकास की सुविधा हो यानि खेत में लम्बे समय तक पानी न भरे. इसका औसत उत्पादन 20-40 क्विंटल प्रति हेक्टर तक होता है. कपास में अगर लगातार सिंचाई करते रहते है तो यह काफी लम्बे समय तक उत्पादन देती है.

यह खरीफ की एक प्रमुख फसल है यह मंडी में 5-6 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिकती है.

कपास की किस्मे – बहुत सी कंपनीयों के कपास के आते है , जिन में से किसी भी कंपनी के कपास की किस्म का चुनाव किसान भाई बुवाई के लिए कर सकते है.

यह सभी विभिन्न प्राइवेट कम्पनियो के कपास की किस्मे है, और भी कंपनी के कपास आते है तो किसान भाई किसी भी कंपनी के कपास का बीज लगा सकते है.

कपास के पैकेट के ऊपर बीज की परिक्षण दिनांक, पैकिंग की दिनांक, बीज की एक्सपायरी दिनांक ( इस तारीख के बाद का बीज नहीं बोना चाहिए), पैकेट की कीमत, बीज का वजन आदि की जानकारी लिखी रहती है.

और पैकेट के ऊपर यह भी लिखा रहता है की यह कपास किस किस राज्य में बुवाई के लिए उपयुक्त है. और पैकेट के ऊपर कस्टमर केयर नंबर भी रहता है, जिस पर किसान फ़ोन करके बीज व कपास की जानकारी ले सकते है. किसान भाई जब भी कपास का पैकेट ख़रीदे तो इन सभी सूचनायों को जरूर पढ़े.

इस पैकेट के ऊपर कपास की किस्म का नाम, कंपनी का नाम व कंपनी का पता आदि लिखा रहता है तो किसान भाइयो को यह जानकारी जरूर पढ़नी चाहिए.