Plastic Mulching Cultivation

फसल उत्पादन की हाई टेक एवं नवीन तकनीकि- प्लास्टिक मल्चिंग

  • 1. मल्चिंग- इसमें फसल की बुवाई प्लास्टिक की पतली पॉलिथीन की परत बिछाकर उसमे छेद करके पौधे लगाकर खेती करने  को प्लास्टिक मल्चिंग कहते है.
  • प्लास्टिक मल्चिंग- इसमें फसल की बुवाई पूर्व खेत में प्लास्टिक की परत बिछाते है, फिर खेती की जाती है.
  • प्लास्टिक मल्च बिछाना- प्लास्टिक मल्च बिछाने से पूर्व खेत को जुताई आदि करके अच्छी तरह तैयार कर लिए जाता है.
  • इसके बाद खेत को समतल करके उचित ऊंचाई एवं आकार की मेड या बेड बनाई जाती है जिसके ऊपर फसल लगाते है.
  • फसल की आवश्यकता अनुसार खाद/उर्वरक डाल दिया जाता है
  • इसके बाद सिंचाई के लिए ड्रिप की लाइन बिछा दी जाती है.
  • प्लास्टिक मल्च बिछाने का तरीका-
  • स्वयं – इसमें प्लास्टिक की शीट को खेत में बनी बेड (शैया) के एक सिरे पर 4-6 इंच मिट्टी में दबा दिया जाता है उसके बाद पूरी बेड पर प्लास्टिक की परत बिछाकर उसको बेड के किनारों एवं दुसरे सिरे पर मिट्टी से दबा दिया जाता है.
  • ट्रेक्टर की सहायता से – इसमें एक मल्चिंग मशीन आती है जो ट्रेक्टर से चलती है उस मशीन में प्लास्टिक शीट का बंडल लगाकर खेत में बेड के ऊपर चलते है तो मशीन शीट को अपने आप बिछाती जाती है व् मिट्टी से किनारों को दबा भी देती है.

मल्च बेड की चौड़ाई सामान्यतया 80 से 120 सेंटीमीटर होती है.

पौधों/बीज की बुबाई- जो फसल आप लगाना चाहते है उसके पौधे से पौधे व लाईन से लाईन की दूरी के अनुसार एक निश्चित साइज़ के पाईप से बेड या मेड पर बिछी प्लास्टिक शीट में छेद बना देते है. इन छेदों में पौध लगा देते है.

  • प्लास्टिक मल्च का चयन- काली या सफ़ेद रंग की प्लास्टिक शीट का उपयोग कर सकते है. 
  • प्लास्टिक मल्चिंग बाजार में आसानी से उपलब्ध रहती है.
  • जिसकी प्रति हेक्टर लागत 4500 से 8000 तक रहती है.
  • फसल – प्लास्टिक मल्चिंग में सब्जी, फूल, कम ऊंचाई के फल आदि की फसल आसानी से लगा सकते है.

 

  • प्लास्टिक मल्चिंग के फायदे-
  • जमीन प्लास्टिक से ढक जाती है तो फसल में खरपतवार उग ही नहीं पाती है.
  • मल्चिंग के कारण पानी भाप बनकर कम उड़ता है व बूंदों के रूप में शीट के नीचे बूंद के रूप में जमा हो जाता है और पुन फसल को मिल जाता है अत फसल में कम सिंचाई की जरूरत होती है.
  • जमीन का तापक्रम ज्यादा रहता है इसलिए हानिकारक कीड़े आदि नष्ट हो जाते है.
  • प्लास्टिक मल्चिंग के कारण खेत में फसल के अलावा खरपतवार आदि के पौधे नहीं उगते है जिसके कारण पूरे खेत में केवल फसल ही दिखाई देती है अत खरपतवार, रोग व कीड़ो का प्रबन्धन करना आसान है.
  • बेड से मिट्टी आदि का फैलाव नहीं होता है अत पौधे को कोई नुकसान आदि नहीं होता है.
  • सिंचाई के लिए पहले से ही मल्च शीट के नीचे ड्रिप लगाते जो फिक्स रहती है अत फसल में सिंचाई आसानी से कर सकते है.
  • व सिंचाई के साथ घुलनशील उर्बरको का उपयोग करके ड्रिप से फसल में आसानी से उर्वरक भी देते है
  • प्लास्टिक मल्चिंग करने पर फसल की देखभाल करना आसान है.
  • प्लास्टिक मल्चिंग उपयोग करने से उत्पादन में वृद्धि  होती है.
  • किसान भाइयो को इस नवीन तकनीकि का अपनी फसल उगने में करना चाहिए ताकि प्रति एकड़ ज्यादा फसल उत्पादन किया जा सके.
  • एक ही शीट को दो-तीन बार फसल उगने में इस्तेमाल कर सकते है.
  • अनुदान/छूट- उधानिकी विभाग में इस पर अनुदान/छूट भी मिलती है अनुदान एवं ज्यादा जानकारी के लिए अपने जिले/ब्लॉक/तहसील  के उधानिकी (Horticulture) विभाग के कार्यालय में संपर्क करे.

 

 

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